Noida Authority News : “हवा ज़हरीली हुई तो सिस्टम सख़्त हुआ!”, नोएडा में GRAP-4 का अलार्म, सीईओ की कुर्सी से सड़क तक एक्शन मोड, वाहन-निर्माण-उद्योग सब पर गिरी गाज, बैठक में पूरा सिस्टम मौजूद, अफसरों से लेकर स्कूल-कॉलेज तक को चेतावनी, सीईओ डॉ लोकेश एम का दो टूक संदेश

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा की हवा जब सांस लेने लायक नहीं रही, तो प्रशासन ने भी अब नरमी छोड़कर सख़्ती का रास्ता पकड़ लिया है। बढ़ते वायु प्रदूषण, गिरती एयर क्वालिटी और लोगों की सेहत पर मंडराते खतरे को देखते हुए नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) डॉ. लोकेश एम. की अध्यक्षता में एक हाईलेवल आपात समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मकसद साफ था—GRAP-4 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) को काग़ज़ों से निकालकर ज़मीन पर उतारना और प्रदूषण फैलाने वालों पर बिना किसी लिहाज़ के कार्रवाई करना।
बैठक में पूरा सिस्टम मौजूद, अफसरों से लेकर स्कूल-कॉलेज तक को चेतावनी
इस महत्वपूर्ण बैठक में नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, औद्योगिक इकाइयों, आईटी कंपनियों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। साफ संदेश दिया गया कि अब प्रदूषण को लेकर “चलता है” वाला रवैया नहीं चलेगा। हर विभाग को अपनी-अपनी जिम्मेदारी तय कर तत्काल, प्रभावी और परिणाम दिखाने वाली कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पर्यावरण मंत्री की बैठक के बाद नोएडा में सख़्ती का डोज
बैठक में बताया गया कि 15 दिसंबर 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में वायु गुणवत्ता को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए थे। उन्हीं निर्देशों के अनुपालन में नोएडा में GRAP-4 के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया। सीईओ ने साफ कहा कि “अब हर विभाग को नतीजे देने होंगे, बहाने नहीं।”
वाहनों से फैल रहा ज़हर, अब नहीं मिलेगी छूट
नोएडा में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं बताया गया।
BS-IV से नीचे के वाहनों पर कड़ी नजर
धुआं उगलने वाले वाहनों के चालान और जब्ती
ट्रैफिक जाम वाले इलाकों की विशेष निगरानी
परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए कि शहर की सड़कों पर अब “पॉल्यूशन फैलाया तो सीधा एक्शन” की नीति अपनाई जाए। साथ ही इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया गया।
निर्माण स्थलों पर धूल उड़ाई तो काम बंद!
नोएडा में चल रही निर्माण गतिविधियां भी प्रदूषण की बड़ी वजह बन रही हैं। बैठक में साफ निर्देश दिए गए कि:
सभी निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट अनिवार्य
नियमित पानी का छिड़काव
निर्माण सामग्री ढककर रखना जरूरी
नियम तोड़े तो तत्काल कार्य बंद
सीईओ ने कहा कि “शहर का विकास जरूरी है, लेकिन लोगों की सांसों की कीमत पर नहीं।”
उद्योगों को चेतावनी – नियम माने या ताला लगे
औद्योगिक इकाइयों को भी साफ संदेश दे दिया गया।
प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाली यूनिट्स पर कड़ी कार्रवाई
जरूरत पड़ने पर फैक्ट्री सील
उत्सर्जन पर लगातार मॉनिटरिंग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए कि निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता न रह जाए, बल्कि ज़मीन पर असर दिखे।
खुले में कचरा जलाया तो सीधे केस
खुले में कचरा जलाने से निकलने वाला धुआं भी हवा को ज़हरीला बना रहा है। सेक्टरों, खाली प्लॉटों और औद्योगिक इलाकों में कचरा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध
दोषियों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई
डीजी सेट पर भी नकेल
नोएडा में बड़ी संख्या में संस्थान डीजी सेट का उपयोग कर रहे हैं, जो प्रदूषण बढ़ा रहे हैं।
डीजी सेट का न्यूनतम उपयोग
डुअल फ्यूल मोड में रेट्रोफिटिंग के निर्देश
नियम न मानने वालों पर कार्रवाई
सड़कें चमकेंगी, धूल नहीं उड़ेगी
सभी मुख्य सड़कों पर मैकेनिकल रोड स्वीपिंग
NCAP के तहत मिले संसाधनों का पूरा इस्तेमाल
नियमित पानी का छिड़काव
हरियाली बढ़ेगी, कंक्रीट नहीं
सड़कों के खाली हिस्सों में घास और पौधरोपण
पार्कों और ग्रीन बेल्ट का बेहतर रखरखाव
प्रदूषण के हॉट-स्पॉट इलाकों में हरित क्षेत्र विकसित करने की योजना
स्कूल-कॉलेजों को भी निर्देश
GRAP-4 की अवधि में
वर्क फ्रॉम होम
ऑनलाइन/हाइब्रिड क्लासेज
बड़े आयोजनों से परहेज
छात्रों की अनावश्यक आवाजाही कम करने पर जोर दिया गया।
जनता भी बनेगी भागीदार
बैठक में साफ कहा गया कि प्रदूषण से लड़ाई सिर्फ प्रशासन नहीं जीत सकता। आरडब्ल्यूए, सामाजिक संगठन और आम नागरिकों की भागीदारी जरूरी
खुले में कचरा न जलाने
कम दूरी के लिए वाहन न निकालने
प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील
सीईओ डॉ लोकेश एम का दो टूक संदेश
डॉ. लोकेश एम. ने कहा “अब प्रदूषण को हल्के में लेने का वक्त नहीं है। नियम तोड़े गए तो कार्रवाई तय है, चाहे कोई भी हो।” नोएडा में GRAP-4 के साथ प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। सवाल बस इतना है—क्या ये सख़्ती सिर्फ बैठकों तक सीमित रहेगी या सच में शहर की हवा को सांस लेने लायक बनाएगी?



