Breaking News : “लाखों की फ़ीस, थाली में कीड़ा!”, ग्रेटर नोएडा की इस कॉलेज की कैंटीन बनी विवाद का अखाड़ा, छात्रों का फूटा गुस्सा, गेट से लेकर किचन तक हंगामा, “खाना नहीं, ज़हर परोसा जा रहा है” – छात्रों ने किया खाने का बहिष्कार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित मंगलमय कॉलेज उस समय सुर्खियों में आ गया, जब छात्रों को परोसे गए खाने में कीड़ा निकलने की घटना सामने आई। यह मामला सिर्फ खराब भोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देखते ही देखते छात्र आंदोलन, हंगामा, तोड़फोड़ और मारपीट तक पहुंच गया। लाखों रुपये की फीस देने वाले छात्रों ने सवाल उठाया कि जब पढ़ाई, हॉस्टल और सुविधाओं के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, तो खाने की गुणवत्ता इतनी घटिया कैसे हो सकती है?
छोटे-भटूरे में मिला “अनचाहा प्रोटीन”, उबल पड़ा छात्र आक्रोश
प्रत्यक्षदर्शी छात्रों के अनुसार, कॉलेज कैंटीन में रोज़ की तरह छोले-भटूरे परोसे जा रहे थे। जैसे ही कुछ छात्रों ने खाने की शुरुआत की, छोलों में कीड़ा दिखाई दिया। पहले तो छात्रों को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, लेकिन जब प्लेटें चेक की गईं, तो कई छात्रों ने उसी तरह की गंदगी देखी। कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे कॉलेज कैंपस में आग की तरह फैल गई।
“खाना नहीं, ज़हर परोसा जा रहा है” – छात्रों ने किया खाने का बहिष्कार
घटना से नाराज छात्रों ने तुरंत खाने का बहिष्कार कर दिया।
प्लेटें कैंटीन में ही फेंकी गईं
“No Food, No Fees Scam” जैसे नारे लगे
छात्रों ने आरोप लगाया कि कैंटीन में साफ-सफाई का नामोनिशान नहीं
छात्रों का कहना था कि यह पहली बार नहीं है जब खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठे हों, लेकिन इस बार मामला सीधे सेहत से जुड़ा होने के कारण बर्दाश्त से बाहर हो गया।
कैंटीन से कॉलेज गेट तक पहुंचा बवाल
हंगामा सिर्फ कैंटीन तक सीमित नहीं रहा। नाराज छात्र कॉलेज गेट तक पहुंच गए और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी दौरान कैंटीन संचालन से जुड़े कुछ लोगों और छात्रों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है, जिसमें कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी साफ देखी जा सकती है।
छात्रों के गंभीर आरोप – “जगह-जगह गंदगी, किचन में बदबू”
छात्रों का आरोप है कि जब उन्होंने कैंटीन का निरीक्षण किया तो किचन में गंदगी फैली हुई थी
बर्तनों की हालत खराब थी
खाने को ढककर नहीं रखा गया था
साफ पानी और स्वच्छता के मानकों की अनदेखी हो रही थी
छात्रों का कहना है कि अगर समय रहते आवाज़ न उठाई जाती, तो फूड पॉयजनिंग जैसी बड़ी घटना भी हो सकती थी।
“लाखों की फीस लेते हो, बदले में कीड़ा देते हो?”
छात्रों का गुस्सा सिर्फ खाने को लेकर नहीं, बल्कि कॉलेज प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर भी है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज लाखों रुपये की फीस लेता है
हॉस्टल और कैंटीन फीस अलग से वसूली जाती है
इसके बावजूद मूलभूत सुविधा यानी खाना भी सुरक्षित नहीं
एक छात्र ने कहा “हम पढ़ाई के लिए यहां आए हैं, बीमार होने के लिए नहीं। अगर खाने में कीड़ा मिलेगा तो पढ़ाई कैसे करेंगे?”
कॉलेज प्रबंधन की चुप्पी पर सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल कॉलेज प्रबंधन की चुप्पी को लेकर उठ रहा है।
न तो तत्काल कोई आधिकारिक बयान
न ही कैंटीन सील करने की सूचना
न ही छात्रों से औपचारिक माफी
छात्रों का कहना है कि हर बार की तरह इस बार भी मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि कैंटीन की स्वास्थ्य विभाग से जांच कराई जाए
दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई हो
कैंटीन संचालन का ऑडिट किया जाए
भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए निगरानी समिति बने
शिक्षा का मंदिर या लापरवाही का अड्डा?
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि
क्या निजी कॉलेज सिर्फ फीस वसूली के केंद्र बनते जा रहे हैं?
क्या छात्रों की सेहत और सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित है?
ग्रेटर नोएडा जैसे एजुकेशन हब में इस तरह की घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाती हैं।
मंगलमय कॉलेज की यह घटना केवल एक कैंटीन विवाद नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार, स्वास्थ्य और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।



