Greater Noida School News : “पेड़ नहीं बचेंगे तो भविष्य नहीं बचेगा” — पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र की दो टूक, कहा बचपन से ही पाठ्यक्रम में शामिल हो पर्यावरण संरक्षण, ध्रुव क्लासेज़ के शैक्षणिक-पर्यावरणीय सम्मेलन में उमड़ा शिक्षा जगत, 50 से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्य और शिक्षाविद हुए शामिल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ती तकनीक और घटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच अगर सबसे बड़ी जरूरत है, तो वह है पर्यावरण के प्रति जागरूक पीढ़ी का निर्माण। इसी गंभीर विषय को केंद्र में रखते हुए पूर्व राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने एक सशक्त और भावनात्मक संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल अभियानों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे बचपन से ही शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
यह विचार उन्होंने शिक्षण संस्था ध्रुव क्लासेज़ द्वारा जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा में आयोजित शैक्षणिक-पर्यावरणीय सम्मेलन में व्यक्त किए। सम्मेलन में दिल्ली-एनसीआर के 50 से अधिक प्रतिष्ठित विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षाविद, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
“शिक्षा ही पर्यावरण की सबसे मजबूत ढाल”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा— “अगर हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित धरती देखें, तो पर्यावरण संरक्षण को बचपन से ही शिक्षा का हिस्सा बनाना होगा। जब बच्चा किताबों में प्रकृति को पढ़ेगा, तभी वह उसे बचाने की जिम्मेदारी समझेगा।”
उन्होंने कहा कि आज देश में नई-नई तकनीकें आ रही हैं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स तक विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि तकनीकी प्रगति का पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे छात्रों में तकनीक के साथ-साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित करें।
शिक्षा केवल परीक्षा नहीं, जिम्मेदारी भी
सम्मेलन का आयोजन ध्रुव क्लासेज़ द्वारा इस उद्देश्य से किया गया कि शिक्षा को केवल अंकों और प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ा जाए।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. आर.के. भारती ने कहा—
“आज की शिक्षा प्रणाली का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं होना चाहिए। हमें ऐसे नागरिक तैयार करने हैं जो समाज, पर्यावरण और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार हों।”
उन्होंने कहा कि अगर छात्र बचपन से ही प्रकृति, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत और पर्यावरण संतुलन जैसे विषयों से जुड़ते हैं, तो भविष्य की कई समस्याओं का समाधान स्वतः हो जाएगा।
नीति से ज़मीन तक छात्रों की भागीदारी ज़रूरी
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी IAS शैलेंद्र कुमार भाटिया ने कहा कि— “कोई भी नीति तब तक सफल नहीं हो सकती, जब तक उसमें समाज और शिक्षण संस्थानों की सक्रिय भागीदारी न हो। पर्यावरण संरक्षण में छात्रों की भूमिका सबसे अहम है, क्योंकि वही भविष्य के नीति-निर्माता हैं।”
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालयों में प्रोजेक्ट्स, गतिविधियों और व्यवहारिक शिक्षा के माध्यम से पर्यावरण को जोड़ा जाए, तो यह दीर्घकालिक समाधान साबित होगा।
तकनीक भी बने पर्यावरण की मित्र
सम्मेलन में उद्योग जगत की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। Lohum के वाइस प्रेसिडेंट चेतन जैन ने बैटरी रीसाइक्लिंग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी पर विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि—
“अगर तकनीक को सही दिशा दी जाए, तो वही तकनीक पर्यावरण की सबसे बड़ी रक्षक बन सकती है।”
उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को यह समझाया कि ऊर्जा संरक्षण और रीसाइक्लिंग आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
नई शिक्षा नीति और वैश्विक सोच
Affinity Sky के प्रतिनिधियों ने नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा-उद्योग सहयोग, प्रोजेक्ट-आधारित लर्निंग और वैश्विक अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के छात्र न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी जाकर भारत का नाम रोशन कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें सही मार्गदर्शन और कौशल मिले।
“हम सिर्फ IIT-NEET नहीं, जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं”
ध्रुव क्लासेज़ के निदेशक ने स्पष्ट किया कि संस्था का उद्देश्य केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन कराना नहीं है—
“हमारा लक्ष्य ऐसे जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है, जो समाज और पर्यावरण के लिए भी सोचें।”
विद्यालयों को मिली नई दिशा
जेपी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या मीता भांडुला ने कहा कि ऐसे सम्मेलन विद्यालयों को शिक्षा की नई सोच देते हैं—
“इसका सीधा लाभ छात्रों, शिक्षकों और समाज को मिलता है। यही बच्चे आगे चलकर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
शिक्षा से ही बचेगा पर्यावरण
यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक चिंतन और संकल्प था—कि अगर आज शिक्षा में पर्यावरण को जगह दी गई, तो कल की दुनिया सुरक्षित होगी। पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का संदेश साफ था—प्रकृति बचेगी, तभी भविष्य बचेगा।



