Dharmik Ramlila News : नारद मोह से अहंकार का अंत और भगवान विष्णु की अद्भुत माया, ग्रेटर नोएडा रामलीला मंचन के दूसरे दिन का भव्य आयोजन, अद्भुत झांकियां और देवा-सुर संग्राम का रोमांचक मंचन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। धार्मिक आस्था, संस्कृति और भक्ति रस से सराबोर ग्रेटर नोएडा की रामलीला का दूसरा दिन बेहद खास और ज्ञानवर्धक रहा। परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में आयोजित इस दिव्य मंचन ने उपस्थित भक्तों को आध्यात्मिक संदेश और जीवन की गहरी सीख दी। रामलीला का यह दूसरा दिन दर्शकों के लिए भक्ति, ज्ञान और सीख से भरा हुआ रहा। नारद मोह की कथा ने जहां अहंकार के दुष्परिणाम को उजागर किया, वहीं भगवान विष्णु की अद्भुत माया और श्रीराम अवतार की कथा का संकेत भी दिया।
यह आयोजन केवल मंचन नहीं, बल्कि समाज के लिए एक दर्पण है जिसमें हर व्यक्ति अपने जीवन का मार्गदर्शन पा सकता है।
नारद मोह की लीला – अहंकार और माया का अद्भुत संवाद
दूसरे दिन की मुख्य प्रस्तुति रही ‘नारद मोह’ की लीला। कथा के अनुसार भगवान नारद जी अपनी तपस्या और ब्रह्मचर्य के बल पर गर्वित हो उठते हैं। अप्सराओं ने उन्हें मोहित करने का प्रयास किया, कामदेव ने भी पूरी शक्ति लगाई, किंतु नारद जी विचलित नहीं हुए। यही उनकी तपस्या का अहंकार बन गया।
अध्यक्ष श्री आनंद भाटी ने मंच से समझाया – “जब अहंकार चरम पर होता है तो व्यक्ति न गुरु की सुनता है, न ईश्वर की।” यही हुआ नारद जी के साथ। उन्होंने भगवान शिव और ब्रह्मा जी की सलाह को अनसुना कर सीधे भगवान विष्णु से मिलने का निश्चय किया।
भगवान विष्णु अपने भक्त को कभी नहीं छोड़ते। उन्होंने नारद जी को अहंकार से मुक्ति दिलाने के लिए अद्भुत माया रची। जब नारद जी इस माया जाल में उलझे और अंततः नाराज होकर भगवान विष्णु को श्राप दिया, तो वहीं से यह कथा भगवान श्रीराम के अवतार की दिशा में अग्रसर हो गई।
अद्भुत झांकियां और देवा-सुर संग्राम का रोमांचक मंचन
रामलीला मंचन में नारद मोह की कथा के साथ-साथ देवा-सुर संग्राम का भी भव्य चित्रण हुआ। युद्ध के दृश्य, शस्त्रों की टंकार और मंच पर की गई झांकियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर दिखाए गए दैवीय पात्रों की पोशाक, संगीत और संवाद इतने जीवंत थे कि हर कोई स्वयं को उस युग का साक्षी मानने लगा।
यह मंचन सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा बल्कि एक गहरा संदेश भी दिया कि अहंकार हर स्थिति में विनाश का कारण बनता है और भक्ति, विनम्रता और समर्पण ही जीवन का सार है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने बढ़ाई शोभा
आज के मंचन में विशेष अतिथि के रूप में विधायक शोहरतगढ़ श्री विनय वर्मा तथा एन. पी. सिंह, अध्यक्ष DDRWA ने उपस्थिति दर्ज कराई। दोनों अतिथियों ने मंचन की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक एकता का संचार करते हैं।
आयोजन समिति और प्रमुख हस्तियों की गरिमामयी मौजूदगी
मंचन के अवसर पर मुख्य संस्थापक परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक एडवोकेट श्री राजकुमार नागर, श्री पंडित प्रदीप शर्मा, श्री शेर सिंह भाटी, श्री हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक श्री सुशील नागर, श्री धीरेंद्र भाटी, श्री मनोज गुप्ता, श्री सतीश भाटी, श्री दिनेश गुप्ता, श्री पवन नागर, श्री बालकिशन सफीपुर, श्री धीरज शर्मा सहित सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
महासचिव श्रीमती ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष श्री अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री महेश शर्मा बदौली, श्री सुभाष भाटी, श्री उमेश गौतम, श्री योगेंद्र भाटी, श्री मनीष डाबर, श्रीमती रोशनी सिंह, श्री चैन पाल प्रधान, मीडिया प्रभारी श्री अतुल आनंद, उपाध्यक्ष जितेंद्र भाटी, श्री सत्यवीर मुखिया, श्री फिरे प्रधान, श्री पी पी शर्मा, श्री सुनील बंसल, श्री महेश कमांडो, सचिव एडवोकेट विमलेश रावल, श्रीमती ज्योति सिंह, श्री वीरपाल मावी, श्री जयदीप सिंह, श्रीमती गीता सागर, श्री यशपाल नागर, श्री तेजकुमार भाटी सहित तमाम भक्तगणों ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
रामलीला के सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश
यह मंचन केवल धार्मिक कथा नहीं थी, बल्कि समाज के लिए गहरी सीख लेकर आया। आज के समय में जब लोग भौतिक उपलब्धियों और अहंकार में खो जाते हैं, नारद मोह की कथा यह याद दिलाती है कि सच्चा मार्ग केवल विनम्रता और भक्ति में ही निहित है।
इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, धर्म और इतिहास से जोड़ने का कार्य भी होता है।
मीडिया प्रभारी का संदेश
मीडिया प्रभारी अतुल आनंद सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में भी रामलीला मंचन में अनेक रोचक और आध्यात्मिक प्रसंगों का मंचन होगा। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने और इस आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बनने का आग्रह किया।



