Sharda University News : शारदा विश्वविद्यालय में शिक्षा, संस्कृति और आत्मबल का संगम, कश्मीर से रामेश्वरम तक की गूंज, विचारों की अनूठी यात्रा, ख्वाजा रेंज़ुशा, शिप्रा पाठक और प्रो. हरिशंकर सिंह जैसे दिग्गजों ने छात्रों को दिया आत्मनिर्भर भारत का संदेश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर शिक्षा और सामाजिक चेतना का संगम देखने को मिला। नॉलेज पार्क स्थित इस वैश्विक स्तर के विश्वविद्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रख्यात वक्ताओं ने भाग लिया और विद्यार्थियों के साथ शिक्षा, राष्ट्रवाद, नारी सशक्तिकरण और सांस्कृतिक विरासत पर अपने विचार साझा किए।
राष्ट्रीय चेतना को जगाता विचार मंच
इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मौजूद रहे:
- ख्वाजा फारूक रेंज़ुशा – अध्यक्ष, कश्मीर सोसाइटी
- शिप्रा पाठक – वाटर वूमन, पर्यावरण कार्यकर्ता और पदयात्री
- प्रोफेसर हरिशंकर सिंह – बीबीए विश्वविद्यालय, लखनऊ
- वाइके गुप्ता – प्रो चांसलर, शारदा विश्वविद्यालय
- डॉ. सिबाराम खारा – वाइस चांसलर, शारदा विश्वविद्यालय
कार्यक्रम की शुरुआत विचारों के आदान-प्रदान के साथ हुई और समापन विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण जैसे सार्थक कर्म से हुआ, जो पर्यावरण और विचारशीलता दोनों की दिशा में एक प्रेरक पहल थी।
कश्मीर की पीड़ा से लेकर पुनरुत्थान तक की कहानी सुनाई ख्वाजा रेंज़ुशा ने
कश्मीर सोसाइटी के अध्यक्ष ख्वाजा फारूक रेंज़ुशा ने अपने वक्तव्य में कश्मीर के सांस्कृतिक और वैचारिक संघर्ष को बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 1990 और 2000 के दशक के कट्टरपंथी दौर में भी कश्मीर में फिल्म महोत्सव, सूफी सम्मेलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए, जब ऐसे आयोजनों पर सख्त प्रतिबंध थे।
“हमने कट्टरपंथी विरोध के बीच भी विचारों और कला की लौ जलाए रखी। यह एक वैचारिक संघर्ष था और हमने हार नहीं मानी।” – ख्वाजा फारूक रेंज़ुशा
उन्होंने बताया कि कश्मीर की 4000 साल पुरानी सभ्यता और उसकी वैचारिक पहचान को पुनर्जीवित करने का कार्य वे बीते तीन दशकों से कर रहे हैं। उनकी कई किताबें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हो चुकी हैं, जो एक “भारत केंद्रित कश्मीरी दृष्टिकोण” को मजबूती से स्थापित करती हैं।
रामेश्वरम तक पदयात्रा करने वाली शिप्रा पाठक बनीं बेटियों की प्रेरणा
कार्यक्रम में मौजूद शिप्रा पाठक जिन्हें देशभर में “वाटर वूमन” के नाम से जाना जाता है, उन्होंने अयोध्या से रामेश्वरम तक की 3,952 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जल जागरूकता और महिला सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा:
“यूपी में बेटियों के मन में अब सुरक्षा का भरोसा पैदा हुआ है। अगर कुछ गलत होता है तो उन्हें पता है कि सरकार और समाज उनकी सुनवाई करेगा।”
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व मॉडल सिर्फ उत्तर भारत में नहीं, बल्कि कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी आश्चर्यजनक लोकप्रियता हासिल कर रहा है।
“मैंने दक्षिण के राज्यों में योगी जी के नाम पर भरोसा और सम्मान को महसूस किया है। यूपी अब मिसाल बन रहा है।” – शिप्रा पाठक
शिक्षा का चरित्र तय करता है राष्ट्र का भविष्य – प्रो. हरिशंकर सिंह
प्रोफेसर हरिशंकर सिंह, बीबीए विश्वविद्यालय लखनऊ के अनुभवी शिक्षक, ने कार्यक्रम को एक दार्शनिक आयाम दिया। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता ने सदैव शिक्षा और दर्शन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है।
“भारत की शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन मूल्य, राष्ट्र भावना और सामाजिक समर्पण है।”
उन्होंने यह भी कहा कि शारदा विश्वविद्यालय तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में जो प्रयास कर रहा है, वह देश को ‘विकसित भारत’ की दिशा में ले जाने की अहम कड़ी है।

शिक्षा के साथ पर्यावरण के प्रति भी संवेदनशीलता
कार्यक्रम के समापन से पूर्व परिसर में पौधारोपण भी किया गया, जिसमें सभी अतिथियों और फैकल्टी मेंबर्स ने हिस्सा लिया। यह केवल एक औपचारिक क्रियाकलाप नहीं, बल्कि “शिक्षा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी” का प्रतीक था।
प्रो चांसलर वाइके गुप्ता ने दी ऐतिहासिक झलक
शारदा विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर वाइके गुप्ता ने कहा:
“जब से मानव सभ्यता का सूर्य उदित हुआ है, भारत तब से शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। हमारी संस्कृति ने सदैव दुनिया को मार्गदर्शन दिया है।”
उन्होंने बताया कि हर युग में भारतीय शिक्षा का उद्देश्य बदला है, और वर्तमान लोकतांत्रिक भारत के लिए हमें ऐसे उद्देश्य निर्धारित करने होंगे जो वैश्विक स्तर पर भारत को नेतृत्व दे सकें।
शिक्षा नीति पर फैकल्टी संग संवाद
कार्यक्रम के दौरान शारदा विश्वविद्यालय के फैकल्टी सदस्यों के साथ शिक्षा नीति और उसमें हो रहे परिवर्तनों पर विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि हमें ऐसी नीतियां बनानी होंगी जो छात्रों को न केवल ज्ञान दें, बल्कि उन्हें समाज के लिए जिम्मेदार और मूल्य आधारित नागरिक भी बनाएं।
मुख्य झलकियाँ (Highlights)
| 🔹 भाग | विवरण |
|---|---|
| 📍स्थान | शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा |
| 🎤 मुख्य वक्ता | ख्वाजा रेंज़ुशा, शिप्रा पाठक, प्रो. हरिशंकर सिंह |
| 🌱 समापन | पौधारोपण और पर्यावरण संकल्प |
| 🧠 विषय | शिक्षा में बदलाव, राष्ट्र चेतना, महिला सशक्तिकरण |
| 👥 सहभागिता | फैकल्टी, छात्र, प्रशासकीय पदाधिकारी |
रफ्तार टुडे की राय: शिक्षा, विचार और समाज सेवा का सुंदर संगम
इस प्रकार का आयोजन छात्रों को केवल एक भाषण नहीं, जीवन में आगे बढ़ने का दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह कार्यक्रम “नई शिक्षा नीति 2020” की भी उसी भावना को दर्शाता है – जहाँ ज्ञान, कौशल, मूल्य और आत्मनिर्भरता एक ही सूत्र में बंधे हों।
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