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Greater Noida West Breaking News : "सुरक्षा बिल्डर नोएडा छोड़ो!", जेपी कॉसमॉस सोसायटी में फूटा गुस्सा, पोस्टरों और नारों से गूंज उठा परिसर, बढ़े चार्ज, लिफ्ट की समस्या, टूटी सुविधाएँ और अव्यवस्थाओं पर निवासियों का महा-विरोध, सोसायटी की महिलाएँ भी खुलकर आगे आईं—बोलीं ‘हम भी हक़ की लड़ाई लड़ेंगे’, बिल्डर प्रबंधन पर सवाल—“कहाँ जा रहा है हमारा पैसा?”

नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा सेक्टर-134 स्थित जेपी कॉसमॉस सोसायटी में शनिवार को माहौल अचानक गर्मा गया, जब लंबे समय से बदहाल सुविधाओं से परेशान निवासियों का धैर्य आखिरकार टूट गया। सुबह के वक्त सोसायटी परिसर में लोग हाथों में पोस्टर–बैनर और नारों के साथ एकत्र हुए और बिल्डर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
निवासियों ने एक सुर में नारा लगाया—

“सुरक्षा बिल्डर नोएडा छोड़ो!”

इस नारे ने सोसायटी की गलियों से लेकर पार्किंग तक हर कोने में गूंज पैदा कर दी।

लंबे समय से जमा हो रहा था गुस्सा—शनिवार को बन गया ‘विस्फोट का दिन’

निवासियों का कहना है कि वे कई महीनों से टूटी सुविधाओं, बढ़े हुए मेंटेनेंस और अव्यवस्था की शिकायतें करते आ रहे थे, लेकिन बिल्डर की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए।
धीरे-धीरे लोगों का रोष बढ़ता गया और आखिरकार शनिवार को यह गुस्सा सामूहिक आंदोलन में बदल गया।

प्रदर्शन में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल हुईं। बुजुर्ग, युवा, हाउसवाइव्स, यहाँ तक कि कुछ निवासी अपने बच्चों के साथ भी विरोध में खड़े दिखाई दिए।
लोगों के हाथों में लिखे पोस्टर सोसायटी की स्थिति की सच्चाई बयान कर रहे थे—

  • “सुविधाएँ दो या चार्ज वापिस लो!”
  • “बिल्डर की मनमानी नहीं चलेगी!”
  • “मेंटेनेंस बढ़ाया, सुविधाएँ घटाईं—ये कैसी विकास गाथा!”

प्रदर्शन में बुनियादी सवालों की गूंज—‘हमने घर लिए थे… तकलीफें नहीं!’

निवासियों का कहना है कि सोसायटी की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
लिफ्टों की खराबी,
टूटे प्लास्टर,
जगह-जगह पानी रिसाव,
लाइट की दिक्कत,
सफाई व्यवस्था की कमजोरी,
और डीजी बैकअप तक का ठीक से न मिलना,
इन सब समस्याओं का सामना रोजाना करना पड़ रहा है।

लोगों का आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन ने न तो मरम्मत कार्य सही तरह से करवाया, न ही लोगों की शिकायतों पर ध्यान दिया।

मेंटेनेंस चार्ज में बढ़ोतरी पर बवाल—निवासियों ने कहा: “जेब खाली, सुविधाएँ गायब!”

प्रदर्शन का सबसे बड़ा मुद्दा रहा

बिना AOA की स्वीकृति के बढ़ाया गया मेंटेनेंस चार्ज।

निवासियों ने बताया कि
मेंटेनेंस चार्ज में अचानक भारी बढ़ोतरी कर दी गई,
जबकि सुविधाएँ पहले से भी ज्यादा बदहाल हैं।
मकानों की लागत बढ़ने, महंगाई बढ़ने और बिजली–पानी के खर्च के बीच इस बढ़े हुए चार्ज ने निवासियों की कमर ही तोड़ दी।

लोगों का कहना है कि बढ़ा हुआ चार्ज न केवल अनुचित है, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के विरुद्ध भी है क्योंकि बिना अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) की मंजूरी कोई भी बढ़ोतरी मान्य नहीं होती।

निवासियों ने बिल्डर से स्पष्ट शब्दों में कहा:

“पहले सुविधा ठीक करो, फिर चार्ज बढ़ाना!”

डीजी बैकअप की मांग—बिजली जाए तो पूरा टावर अंधेरे में डूब जाता है

सोसायटी निवासियों ने बताया कि डीजी बैकअप की स्थिति बेहद खराब है। कई-कई घंटों तक बिजली कटने पर टावरों में अंधेरा पसर जाता है, लिफ्ट बंद हो जाती हैं,
और बुजुर्गों व बच्चों के लिए स्थिति खतरनाक बन जाती है।

लोगों ने डीजी बैकअप में सुधार के साथ-साथ लॉगबुक मेंटेनेंस, समय पर डीज़ल भरने और बैकअप की क्षमता बढ़ाने की मांग की।

पेंट–प्लास्टर और स्ट्रक्चर की समस्या—कहीं पपड़ी झरती है तो कहीं सीलन टपकती है

सोसायटी के निवासियों ने प्लास्टर और संरचना से जुड़ी समस्याओं को भी बड़े मुद्दे के रूप में उठाया।
कई टावरों में—

  • दीवारों का प्लास्टर उखड़ रहा है,
  • सीलन ने घरों का हाल खराब कर रखा है,
  • कई जगह क्रैक नज़र आते हैं,
  • और कुछ स्थानों पर पेंट की हालत बेहद दयनीय है।

निवासियों ने कहा कि जब घर खरीदे थे तब उन्हें “लक्ज़री सुविधाओं” का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज हालत ऐसी है कि मरम्मत भी समय पर नहीं होती।

लिफ्ट की खराबी ने बढ़ाई परेशानी—कभी बंद, कभी फंसी, कभी उतरते-चढ़ते डर

अक्सर सोसायटी की लिफ्ट खराब हो जाती है।
कई लोग बताते हैं कि वे बीच में फंस चुके हैं। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।
प्रदर्शनकारी ने कहा कि
“मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपए ले लिए जाते हैं, लेकिन लिफ्ट जैसी जरूरी सुविधा ही सुरक्षित नहीं है।”

प्रदर्शनकारियों ने दी चेतावनी—“मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन होगा और बड़ा”

निवासियों ने बिल्डर प्रबंधन को साफ चेतावनी दी है कि यदि—

  • बढ़ा हुआ मेंटेनेंस चार्ज वापस नहीं लिया गया,
  • सभी सुविधाओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ,
  • और पारदर्शी बिलिंग प्रक्रिया लागू नहीं की गई,

तो आने वाले दिनों में वे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।

लोगों ने कहा कि अब वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।
“घर लेने के बाद भी संघर्ष करना क्यों पड़े? हम अब जवाब चाहते हैं।”

सोसायटी की महिलाएँ भी खुलकर आगे आईं—बोलीं: ‘हम भी हक़ की लड़ाई लड़ेंगे’

प्रदर्शन की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि अपनी आवाज़ भी बुलंद की।
महिलाओं ने कहा—

“हमारे बच्चों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हम भी आवाज़ उठाएँगी।”

उनका कहना था कि कई बार शिकायतें देने के बाद भी कोई समाधान नहीं दिखता, इसलिए अब सामूहिक विरोध ही एकमात्र रास्ता बचा था।

बिल्डर प्रबंधन पर सवाल—“कहाँ जा रहा है हमारा पैसा?”

कई निवासियों ने आरोप लगाया कि उन्हें स्पष्ट जानकारी तक नहीं दी जाती कि मेंटेनेंस राशि कहाँ खर्च होती है।
ना तो ऑडिटेड रिपोर्ट,
ना ट्रांसपेरेंट अकाउंटिंग,
और ना ही वर्क रिपोर्ट,
सोसायटी को दी जाती है।

इससे लोगों में अविश्वास बढ़ा है।

जेपी कॉसमॉस में निवासियों का सब्र जवाब, अब जवाब मांग रहे हैं ‘हक़ और सुविधा’ का

प्रदर्शन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि जेपी कॉसमॉस सोसायटी के निवासी अब बिल्डर की मनमानी के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
वे अपने हक़ की लड़ाई में एकजुट हो चुके हैं और सुविधाएँ बहाल होने तक संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार हैं।

निवासियों ने कहा “हमने घर शांति के लिए खरीदे थे, समस्याओं के लिए नहीं!”

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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