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Maharastra Poltical Crisis: शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया इस्तीफा, बीजेपी सरकार बना सकती है, एकनाथ शिंदे ने करा है कमाल, राज ठाकरे और छगन भुजबल के साथ मिलकर

मुंबई, रफ्तार टुडे शिवसेना प्रमुख और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया इस्तीफा दे दिया है। बीजेपी सरकार बना सकती है। एकनाथ शिंदे ने कमाल कर दिया है। राज ठाकरे और छगन भुजबल के साथ मिलकर।

शिवसेना में फिर बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं। इस बार पार्टी के कद्दावर नेता और महा विकास अघाड़ी सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे (ने पार्टी को दगा देने का प्‍लान बनाया है।

इन नेताओं ने अलग-अलग समय पर बाल ठाकरे की पार्टी से मुंह मोड़ा। बेशक, इनके जाने से पार्टी को तगड़ा झटका लगा। लेकिन, महाराष्ट्र में शिवसेना के अस्तित्‍व पर कभी खतरा पैदा नहीं हुआ। इस कड़ी में एक और बात द‍िलचस्‍प है।

वह यह है कि इन सभी नेताओं ने ऐसे समय में बगावत का बिगुल बजाया जब वो शिवसेना में अपने शिखर पर थे। एकनाथ शिंदे के मामले में अहम यह है कि उद्धव ठाकरे के हाथों में पार्टी की कमान आने के बाद यह किसी बड़े नेता के बागी होने का पहला केस है।

एकनाथ शिंदे पूरे दिन सुर्खियों में रहे। शिंदे ने महाराष्‍ट्र की राजनीति में अचानक भूचाल ला दिया। उनके कारण एमवीए सरकार पर संकट के बादल छा गए। शिवसेना के सामने एकनाथ शिंदे ने शर्त रख दी है। उन्‍होंने दो-टूक कह दिया है कि बीजेपी के साथ आने पर ही वह शिवसेना में वापस लौटेंगे। इस तरह शिंदे ने शिवसेना से अलग रास्‍ता बनाने के साफ संकेत दे दिए।

यह सब कुछ विधान परिषद चुनाव के एक दिन बाद शुरू हुआ। इसमें एमवीए को छह में से एक सीट पर हार मिली। इसके बाद मंगलवार को खबर आई कि राज्य के मंत्री और शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे एकांतवास में चले गए हैं। धीरे-धीरे तस्‍वीर और साफ हुई। पता चला कि शिंदे के साथ कम से कम 22 विधायकों ने बगावत कर दी है। वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

बाल ठाकरे की पार्टी के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की सेंधमारी हुई हो। पार्टी का गठन होने के बाद पहली बार छगन भुजबल ने शिवसेना में बगावत करने की हिमाकत की थी। यह बात 1991 की है। भुजबल ने ठाकरे के खिलाफ विरोध का बिगुल बजाया था। भुजबल की अगुआई में 18 शिवसेना विधायकों ने पार्टी छोड़ी थी। वो कांग्रेस में शामिल हो गए थे। यह पार्टी में दो-फाड़ का पहला मामला था। छगन भुजबल की बगावत के बाद विधानसभा में शिवसेना 52 सीटों से घटकर 34 पर पहुंच गई थी।

चाचा से नाराज होकर राज ठाकरे ने किया पार्टी से विद्रोह
महाराष्‍ट्र की राजनीति में राज ठाकरे कभी चमकता सितारा माने जाते थे। उनके आक्रामक तेवरों और बाल ठाकरे से मिलती-जुलती छवि ने राज्‍य में उन्‍हें लोगों का चहेता बना दिया था। राज ठाकरे को शिवसेना के भावी नेता के तौर पर देखा जाने लगा। यह और बात है कि जब शिवसेना का उत्‍तराधिकारी बनाने की बात आई तो बाल ठाकरे ने भतीजे राज के बजाय बेटे उद्धव को तरजीह देने के संकेत दिए। इस बात से नाराज होकर राज ठाकरे ने शिवसेना से बगावत कर दी। जनवरी 2006 में पार्टी से अलग होने के बाद मार्च 2006 में उन्‍होंने अपनी पार्टी बना ली। इस पार्टी का नाम रखा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस)। उनके साथ तब शिवसेना के कई समर्थक भी गए थे।

उद्धव से अनबन के कारण नारायण राणे ने किया था बाय-बाय
जब बाल ठाकरे बेटे उद्धव को प्रमोट करने में लगे थे, ठीक उसी समय शिवसेना के कद्दावर नेता नारायण राणे के अंदर भी आग सुलग रही थी। राजनीति में उद्धव की एंट्री 2002 में हुई थी। तभी से उनके लिए शिवसेना में माहौल बनाया जाने लगा था। उद्धव को पार्टी ने विधानसभा चुनाव प्रभारी बना दिया। यह बात नारायण राणे को बिल्‍कुल पसंद नहीं आई। वो खुलकर बाल ठाकरे के फैसले को चुनौती देने लगे थे। इसके बाद उद्धव को कार्यकारी अध्‍यक्ष बनाने का ऐलान कर दिया गया। राणे को उद्धव का नेतृत्‍व किसी भी कीमत पर स्‍वीकार नहीं था। वो बागी बन गए थे। जुलाई 2005 में राणे ने अपने रास्‍ते शिवसेना से अलग कर लिए। इसके उलट शिवसेना ने दावा किया कि पार्टी को धोखा देने के कारण राणे को निकाला गया।

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