Dharmik Ramlila News : ग्रेटर नोएडा में श्रीरामलीला महोत्सव का चौथा दिन, शिवधनुष टूटा, परशुराम क्रोधित हुए और सीता-राम विवाह से गूँज उठा जनकपुर, जनकपुर में विवाह और अयोध्या की तैयारियाँ, राज्याभिषेक की घोषणा और वनवास की वेदना

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी ग्रेटर नोएडा द्वारा आयोजित विजय महोत्सव-2025 के चौथे दिन का मंचन एक दिव्य आध्यात्मिक अनुभव साबित हुआ। परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिशा-निर्देशन और समिति अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के मार्गदर्शन में शुक्रवार, 27 सितंबर की शाम रामायण की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का सजीव मंचन किया गया। श्रीरामलीला महोत्सव का चौथा दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और सीख से भरा जीवन-दर्शन साबित हुआ। दर्शकों ने हर प्रसंग से भावनात्मक जुड़ाव महसूस किया और आयोजन स्थल “जय श्रीराम” के गगनभेदी नारों
विशेष अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
आज की लीला में मुख्य अतिथि के रूप में श्री इकबाल सिंह लालपुरा (सदस्य, भाजपा राष्ट्रीय संसदीय बोर्ड) उपस्थित रहे। साथ ही राजगुरु बीकानेर स्टेट विमर्शानंद गिरी जी महाराज भी विशेष अतिथि के रूप में मंचासीन हुए। सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर मंचन की शुरुआत की और दर्शकों के साथ इस पावन अवसर की महत्ता साझा की।
सीता स्वयंवर और शिवधनुष भंग का अद्भुत दृश्य
लीला का प्रारंभ माता सीता के स्वयंवर से हुआ। देश-विदेश से आए वीरों और राजाओं ने शिवधनुष उठाने का प्रयास किया, किंतु सभी असफल रहे। तभी महाराज जनक ने निराश होकर कटु वचन कहे—“क्या अब यह धरती वीरों से खाली हो गई है?” महर्षि विश्वामित्र के संकेत पर भगवान श्रीराम ने शिवधनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया। जैसे ही प्रत्यंचा चढ़ी, धनुष दो टुकड़ों में टूट गया। पूरा रामलीला मैदान “जय श्रीराम” के नारों से गूँज उठा।

परशुराम का आगमन और शांत स्वरूप
धनुष भंग होते ही भगवान परशुराम क्रोधावेश में प्रकट हुए। उनके और लक्ष्मणजी के बीच संवाद हुआ, जिससे पूरा वातावरण रोमांचित हो उठा। अंततः श्रीराम की विनम्रता और स्वरूप को पहचानकर परशुराम शांत हुए और आशीर्वाद देकर विदा हो गए।
जनकपुर में विवाह और अयोध्या की तैयारियाँ
इसके बाद जनकपुर में राम-सीता विवाह का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया। सीता माता ने भगवान राम को वरमाला पहनाई, और साथ ही चारों भाइयों के विवाह संपन्न हुए।
विदाई के क्षणों ने दर्शकों को भावुक कर दिया, वहीं अयोध्या में बारातियों के स्वागत और सजे-धजे नगर का दृश्य बेहद दिव्य रहा। विविध व्यंजनों और सजावट ने दर्शकों को अयोध्या की भव्यता से रूबरू कराया।

राज्याभिषेक की घोषणा और वनवास की वेदना
अयोध्या लौटने पर महाराज दशरथ ने राम के राज्याभिषेक की घोषणा की। परंतु मंथरा के बहकावे में आकर कैकयी ने दशरथ से दो वरदान माँग लिए—भरत के लिए अयोध्या का राज्य और राम को 14 वर्ष का वनवास।
यह दृश्य देखते ही पूरे पंडाल में सन्नाटा छा गया। भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के वनगमन के दृश्य ने उपस्थित जनों को भावुक कर दिया। अनेक दर्शकों की आँखें नम हो गईं।
सीख: निर्णय सोच-समझकर लें
आज के मंचन से एक गहरी सीख भी मिली—कभी भी बहकावे या किसी के कहने पर निर्णय नहीं लेना चाहिए, वरना पूरा परिवार और जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। मंथरा और कैकयी का प्रसंग इसी का प्रतीक है।

प्रमुख गणमान्य उपस्थित
इस अवसर पर समिति संस्थापक परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज, एडवोकेट राजकुमार नागर, पंडित प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, बालकिशन सफीपुर, धीरज शर्मा, अध्यक्ष आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, उपाध्यक्ष व संरक्षक मंडल के दर्जनों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
मंचन के दौरान मीडिया प्रभारी अतुल आनंद सिंह ने पूरे आयोजन का संचालन किया।



