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New Noida Authority News : “न्यू नोएडा” प्रोजेक्ट में अधिग्रहण को मिलेगी रफ्तार, दो तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार और चार लेखपालों की टीम करेगी बड़ा काम, किसानों से संवाद प्रक्रिया शुरू, मुआवज़ा दर और भूमि उपयोग तय करने की प्रक्रिया शुरू, कृषि भूमि से इंडस्ट्रियल ज़ोन तक, 20 साल का मास्टर प्लान तैयार, न्यू नोएडा, भविष्य का स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा के बाद अब “न्यू नोएडा” प्रोजेक्ट विकास की दिशा में निर्णायक कदम उठा चुका है। करीब 80 गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रशासन ने एक विशेष टीम गठित करने का फैसला लिया है। इस टीम में दो तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार और चार लेखपाल शामिल होंगे। यह टीम न केवल किसानों से संवाद स्थापित करेगी बल्कि मुआवज़ा, सर्वेक्षण और भूमि चिन्हांकन प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाएगी।

न्यू नोएडा के अधिग्रहण में आएगी रफ्तार

गौतमबुद्ध नगर प्रशासन ने न्यू नोएडा प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। अब तक प्रोजेक्ट का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है, और अगला चरण भूमि अधिग्रहण का रहेगा।
न्यू नोएडा के अंतर्गत कुल 209.11 वर्ग किलोमीटर (लगभग 20,911 हेक्टेयर) भूमि पर शहर विकसित किया जाएगा। इसे चार बड़े फेज़ों में बांटकर आगे बढ़ाया जाएगा ताकि अगले 15 से 20 वर्षों में यह इलाका एक आधुनिक औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय शहर के रूप में उभर सके।

भू-स्वामियों से सहमति आधारित अधिग्रहण मॉडल

इस प्रोजेक्ट के लिए “लैंड पूलिंग” और “सहमति आधारित अधिग्रहण मॉडल” अपनाया जा रहा है। यानी किसानों से जबरन ज़मीन नहीं ली जाएगी, बल्कि उन्हें उचित मुआवज़ा और हिस्सेदारी दी जाएगी।
यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के संयुक्त प्रयास से इसे एक हाइब्रिड अधिग्रहण मॉडल के तहत लागू किया जाएगा।

इस मॉडल में किसानों के साथ सीधे संवाद और मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी ताकि उनकी राय, सुझाव और आपत्तियों को ध्यान में रखकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

मुआवज़ा दर और भूमि उपयोग तय करने की प्रक्रिया शुरू

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, न्यू नोएडा प्रोजेक्ट के लिए जिन गांवों की भूमि ली जानी है, उनमें मुआवज़ा दर तय करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
डीएम कार्यालय में इन दरों को लेकर बैठकें लगातार चल रही हैं। किसानों को यह बताया जा रहा है कि अधिग्रहण के बाद कितनी प्रतिशत भूमि विकसित रूप में उन्हें वापस दी जाएगी और बाकी का भुगतान किस अनुपात में होगा।

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“न्यू नोएडा” प्रोजेक्ट में अधिग्रहण को मिलेगी रफ्तार, दो तहसीलदार, दो नायब तहसीलदार और चार लेखपालों की टीम करेगी बड़ा काम

कृषि भूमि से इंडस्ट्रियल ज़ोन तक — 20 साल का मास्टर प्लान तैयार

न्यू नोएडा के लिए तैयार मास्टर प्लान में औद्योगिक, आईटी, रेजिडेंशियल, कॉमर्शियल और ग्रीन ज़ोन शामिल हैं। इसका लक्ष्य नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बाद एक “तीसरा बड़ा औद्योगिक हब” बनाना है।
इस योजना में आने वाले वर्षों में औद्योगिक निवेश, स्टार्टअप ज़ोन और हाईटेक टाउनशिप विकसित की जाएंगी। अनुमान है कि यह इलाका 5 लाख से अधिक रोजगार अवसरों का केंद्र बनेगा।

किसानों से संवाद की शुरुआत

टीम को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह गांव-गांव जाकर किसानों से उनकी राय ले।
प्रत्येक गांव में लेखपाल और नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी जाकर किसानों को अधिग्रहण मॉडल समझाएंगे और उनसे लिखित सहमति प्राप्त करेंगे। साथ ही, किसानों को यह भी बताया जाएगा कि उन्हें मुआवज़े के साथ-साथ विकसित भूखंड भी दिए जाएंगे ताकि वे भविष्य में भी भूमि के लाभ से जुड़े रहें।

स्थायी कार्यालय और बैठकें शुरू होंगी जल्द

अधिकारियों ने बताया कि भूमि अधिग्रहण कार्यों के लिए एक स्थायी कार्यालय खोला जाएगा, जहां किसान अपनी शिकायतें और सुझाव दर्ज कर सकेंगे।
यह कार्यालय ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और राजस्व विभाग के बीच समन्वय का केंद्र होगा।
टीम नियमित रूप से किसान पंचायतों और बैठकों का आयोजन करेगी, जिसमें अधिग्रहण की प्रगति की समीक्षा होगी।

प्राथमिकता वाले गांवों से शुरू होगा अधिग्रहण कार्य

जिन गांवों में किसानों ने अधिग्रहण के लिए सहमति दे दी है, वहां से प्रक्रिया की शुरुआत होगी। इन गांवों को “फेज़-1 प्रोजेक्ट ज़ोन” में रखा गया है। इनमें मुख्यतः जेवर रोड, बुलंदशहर रोड और दनकौर के नजदीकी क्षेत्र शामिल हैं। यह इलाके यमुना एक्सप्रेसवे के समानांतर विकसित होंगे और जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेंगे।

न्यू नोएडा – भविष्य का स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी

अधिकारियों के अनुसार, “न्यू नोएडा” उत्तर प्रदेश की भविष्य की स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होगा। इसमें सोलर पावर पार्क, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण-अनुकूल ग्रीन जोन और उच्च तकनीक इंडस्ट्रियल यूनिट्स शामिल होंगी। इस योजना के माध्यम से सरकार का लक्ष्य है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और न्यू नोएडा मिलकर “एनसीआर का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” बनें।

“न्यू नोएडा” अब कागज़ों से निकलकर ज़मीन पर उतरने जा रहा है। किसानों की भागीदारी, पारदर्शी अधिग्रहण प्रक्रिया और समन्वित विकास की नीति के साथ यह प्रोजेक्ट न सिर्फ गौतमबुद्ध नगर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देगा। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे अधिग्रहण की रफ्तार बढ़ेगी, वैसे-वैसे “न्यू नोएडा” अपने नाम के अनुरूप एक नया और आधुनिक शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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Raftar Today
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