UP Jewar News : जेवर की जंग में नया ट्विस्ट!, क्या भाजपा के ‘हैट्रिक मैन’ जेवर विधायक का टिकट कटेगा?, RLD ने ठोका दावा, 2027 की सियासत में सीट शेयरिंग का सबसे बड़ा सस्पेंस बना जेवर, NDA के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ी हलचल, एयरपोर्ट बनने के बाद और बढ़ा सीट का महत्व, जातीय समीकरण भी बनाते हैं सीट को दिलचस्प
इतिहास भी कम रोचक नहीं, अभी केवल चर्चाएं, फैसला बाकी, क्या भाजपा 31 विधायकों की सीट छोड़ेगी?

जेवर/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। उत्तर प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक बिसात पर मोहरे सजने शुरू हो गए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में शामिल जेवर विधानसभा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और अरबों रुपये के निवेश के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी यह सीट अब चुनावी समीकरणों के कारण सुर्खियों में है।
राजनीतिक चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा के दो बार के विधायक धीरेंद्र सिंह वर्ष 2027 में भी भाजपा के उम्मीदवार होंगे या फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सीट बंटवारे में यह सीट राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के खाते में चली जाएगी? फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं और इसी ने जेवर की राजनीति को गर्मा दिया है।
NDA के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) वर्तमान समय में NDA गठबंधन का हिस्सा हैं। केंद्रीय मंत्री और RLD प्रमुख जयंत चौधरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनकी पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर लड़ेगी। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार RLD ने भाजपा से करीब 40 विधानसभा सीटों की मांग की है।
इन्हीं सीटों में गौतमबुद्ध नगर जिले की जेवर विधानसभा सीट भी शामिल बताई जा रही है। वर्ष 2022 के चुनाव में यह सीट भाजपा के पास थी, लेकिन उससे पहले जब RLD समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी, तब भी इस सीट पर उसका दावा मजबूत माना जाता था। अब NDA में शामिल होने के बाद RLD इस सीट को अपने लिए उपयुक्त मान रही है।
धीरेंद्र सिंह की हैट्रिक की तैयारी पर लग सकता है ब्रेक?
जेवर के वर्तमान विधायक धीरेंद्र सिंह क्षेत्र के सबसे सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए धीरेंद्र सिंह ने पहली बार भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2022 में भी उन्होंने अपनी सीट बचाए रखी और लगातार दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा यह सीट RLD को दे देती है तो धीरेंद्र सिंह की लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ने और जीत की हैट्रिक लगाने की योजना प्रभावित हो सकती है। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया गया है कि सीट छोड़ी जाएगी, लेकिन राजनीतिक अटकलें लगातार तेज हो रही हैं।
एयरपोर्ट बनने के बाद और बढ़ा सीट का महत्व
जेवर विधानसभा आज केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का केंद्र बन चुकी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब, फिल्म सिटी और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं ने इस सीट का राजनीतिक महत्व कई गुना बढ़ा दिया है। राजनीतिक दलों का मानना है कि जो भी पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करेगी, उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा राजनीतिक संदेश देने का अवसर मिलेगा। यही वजह है कि भाजपा और RLD दोनों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का विषय बनती जा रही है।
जातीय समीकरण भी बनाते हैं सीट को दिलचस्प
जेवर विधानसभा का चुनावी गणित हमेशा से रोचक रहा है। क्षेत्र में विभिन्न समुदायों का प्रभाव है और यही कारण है कि कोई भी दल यहां टिकट वितरण को लेकर बेहद सावधानी बरतता है। अनुमानित मतदाता संरचना के अनुसार—
ठाकुर मतदाता : 70-75 हजार
गुर्जर मतदाता : 60-70 हजार
दलित मतदाता : 55-60 हजार
ब्राह्मण मतदाता : 45-50 हजार
मुस्लिम मतदाता : 35-40 हजार
जाट मतदाता : 15-20 हजार
अन्य समुदाय : 35-40 हजार
यही सामाजिक समीकरण इस सीट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे जटिल और दिलचस्प सीटों में शामिल करते हैं।
इतिहास भी कम रोचक नहीं
जेवर विधानसभा का इतिहास कई राजनीतिक बदलावों का गवाह रहा है। एक समय यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी, लेकिन परिसीमन के बाद इसे सामान्य वर्ग के लिए खोल दिया गया। 1990 के दशक में भाजपा ने यहां जीत की हैट्रिक लगाई थी। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी ने लगातार तीन चुनाव जीतकर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। वर्ष 2017 में भाजपा ने फिर वापसी की और धीरेंद्र सिंह के नेतृत्व में यह सीट दो बार लगातार भाजपा के खाते में गई।
यानी इतिहास बताता है कि जेवर का मतदाता विकास, नेतृत्व और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर मतदान करता है।
क्या भाजपा 31 विधायकों की सीट छोड़ेगी?
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि यदि RLD को 35 से 40 सीटें दी जाती हैं तो भाजपा के कई मौजूदा विधायकों की सीटें प्रभावित हो सकती हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर RLD दावा कर रही है।
हालांकि भाजपा के भीतर भी इस विषय पर अलग-अलग राय बताई जा रही हैं। एक वर्ग RLD को अधिक सीटें देने के पक्ष में है ताकि गठबंधन मजबूत रहे, जबकि दूसरा वर्ग सीमित सीटें देने की वकालत कर रहा है।
अभी केवल चर्चाएं, फैसला बाकी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि फिलहाल जेवर सीट को लेकर जो चर्चाएं चल रही हैं, वे सीट शेयरिंग के संभावित समीकरणों पर आधारित हैं। भाजपा और RLD दोनों दलों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन इतना तय है कि जैसे-जैसे 2027 नजदीक आएगा, जेवर विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक सीटों में शामिल रहेगी। यहां केवल एक टिकट का सवाल नहीं होगा, बल्कि यह NDA के भीतर शक्ति संतुलन, जातीय समीकरण और विकास की राजनीति की भी परीक्षा होगी।
अब सबकी निगाहें भाजपा और RLD नेतृत्व पर टिकी हैं कि आखिर सीट बंटवारे की अंतिम तस्वीर क्या बनती है और क्या धीरेंद्र सिंह हैट्रिक की ओर बढ़ेंगे या फिर जेवर की सियासत में कोई नया चेहरा उभरेगा।



