Kailash Institute News : “दीपों की जगमग, संस्कारों की महक और उल्लास का संगम” — कैलाश इंस्टीट्यूट में दीपावली महोत्सव ने बाँधा समा, छात्रों ने परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम पेश किया, पर्यावरण और सामाजिक संदेश पर भी रहा फोकस

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। दीपों की सुनहरी लौ, आरती की मधुर ध्वनि और रंगोली की मनमोहक छटा ने कैलाश इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड पैरामेडिकल साइंसेस के प्रांगण को पूरी तरह आध्यात्मिक और संस्कृतिमय बना दिया। अवसर था — दीपावली महोत्सव का, जो इस वर्ष श्रद्धा, सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता के रंगों से सजा नजर आया।
दीप प्रज्वलन से आरंभ हुआ दिव्य उत्सव
महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और लक्ष्मी-गणेश पूजन से हुई। संस्थान की अध्यक्षा संतोष गोयल, महानिदेशक संदीप गोयल और शिक्षा निदेशक बिंदिया गोयल ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। दीपक की रोशनी के साथ पूरे परिसर में सकारात्मकता और भक्ति का वातावरण फैल गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया उत्साह
छात्रों ने मंच पर रंगारंग प्रस्तुतियाँ दीं — पारंपरिक लोकनृत्य, भक्ति गीत और नाट्य मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कई प्रस्तुतियों में अंधकार पर प्रकाश की विजय, सत्यमेव जयते, और स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक संदेशों को भी रचनात्मक रूप में पेश किया गया। रंग-बिरंगे परिधानों में विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति की झलक बखूबी दिखाई और तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।
रंगोली, दीप सज्जा और मिष्ठान से सजा कैंपस
कैंपस के हर कोने में दीपों की कतारें और फूलों से सजी रंगोलियों ने दिवाली की पवित्रता को जीवंत कर दिया। छात्रों ने दीप सज्जा प्रतियोगिता में अनोखी रचनात्मकता दिखाई। किसी ने मिट्टी के दीपों को पारंपरिक रूप दिया, तो किसी ने पर्यावरण-हितैषी दीये बनाकर “ग्रीन दिवाली” का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में मिष्ठान वितरण और सहभोज का आयोजन हुआ, जहाँ विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साथ मिलकर सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।
“संस्कृति से जुड़ना ही सच्ची शिक्षा” – संतोष गोयल
अध्यक्षा संतोष गोयल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा “दीपावली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अच्छाई की जीत और आत्मज्ञान का प्रतीक है। हमें अपने जीवन में इसी प्रकाश को फैलाना है और दूसरों के जीवन में भी उजियारा लाना है।”
महानिदेशक संदीप गोयल ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम स्पिरिट का विकास करते हैं। वहीं शिक्षा निदेशक बिंदिया गोयल ने कहा “कैलाश इंस्टीट्यूट केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि संस्कृति और मूल्यों की भी पाठशाला है। हमें गर्व है कि हमारे विद्यार्थी भारतीय परंपराओं को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।”
पर्यावरण और सामाजिक संदेश पर भी रहा फोकस
इस वर्ष के दीपावली उत्सव में छात्रों ने “प्रदूषण-मुक्त पर्व” का संदेश दिया। मिट्टी और फूलों से बने इको-फ्रेंडली दीये, पुनः उपयोग योग्य सजावट सामग्री और प्लास्टिक मुक्त आयोजन ने संस्थान की पर्यावरण-जागरूक सोच को उजागर किया।
साथ ही, नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों ने “स्वस्थ भारत – स्वच्छ भारत” थीम पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य – शिक्षा के साथ संस्कार
संस्थान प्रशासन के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों को न केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट बनाना है, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, सहयोग और मानवता के मूल्यों से भी जोड़े रखना है। पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि “संस्कारों से सजी शिक्षा ही सच्चे विकास की कुंजी है।”
आयोजन में सहभागिता और पुरस्कार वितरण
दीपावली महोत्सव में सैकड़ों विद्यार्थियों ने भाग लिया। सर्वश्रेष्ठ रंगोली, दीप सज्जा और नृत्य प्रस्तुति के लिए विजेताओं को प्रमाणपत्र और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह आयोजन उनके कॉलेज जीवन का सबसे यादगार दिन रहा।
“प्रकाश से ही जीवन में दिशा मिलती है”
कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और “जय जय लक्ष्मी माता” भजन के साथ हुआ। हर चेहरे पर खुशी, गर्व और आत्मीयता झलक रही थी। अंत में पूरे परिसर में विद्यार्थियों ने दीप जलाकर यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में अंधकार नहीं, बल्कि ज्ञान और सेवा का प्रकाश फैलाएँगे।
यह दीपावली महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह संस्कार, शिक्षा, पर्यावरण और एकता का अद्भुत संगम था। कैलाश इंस्टीट्यूट ने एक बार फिर साबित किया कि जब शिक्षा के साथ संस्कृति का प्रकाश जुड़ता है, तो समाज में सकारात्मकता और सद्भाव की नई किरण जगमगाने लगती है।



