Greater Noida West News : “स्मार्ट सिटी का सपना, गड्ढों में दम तोड़ता सच!”ग्रेटर नोएडा वेस्ट में टूटी सड़कें बनीं जानलेवा, प्राधिकरण की चुप्पी पर जनता का फूटा गुस्सा, जानलेवा बनी Cherry County से Amrapali Centurion तक की सड़क

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टूडे (डिजिटल न्यूज़ डेस्क)।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट… जिसे कभी आधुनिकता, सुव्यवस्थित प्लानिंग और बेहतर जीवनशैली का प्रतीक माना गया था, आज वही इलाका बुनियादी सुविधाओं की बदहाली की तस्वीर बन चुका है। यहां की टूटी सड़कें, उड़ती धूल, कीचड़ से भरे गड्ढे, अनियमित जलापूर्ति और लगातार हो रही बिजली कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि लोग इसे “स्मार्ट सिटी” नहीं बल्कि “संघर्ष सिटी” कहने लगे हैं।
जानलेवा बनी Cherry County से Amrapali Centurion तक की सड़क
Cherry County से Fusion Homes होते हुए Amrapali Centurion तक जाने वाली मुख्य सड़क आज मौत को न्योता देती नजर आती है। सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है, जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और हल्की बारिश में ही कीचड़ फैल जाता है। सूखे मौसम में धूल के गुबार से सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोज़ाना इस मार्ग पर छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं, कारों के सस्पेंशन टूट रहे हैं और पैदल चलना तक जोखिम भरा हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह सड़क किसी परीक्षा से कम नहीं।
धूल, कीचड़ और बीमारियां: सेहत पर भी संकट
सड़क से उठती धूल ने दमा, एलर्जी और आंखों की समस्याओं को बढ़ा दिया है। कई परिवारों का कहना है कि बच्चों को बार-बार बीमार पड़ने की शिकायत हो रही है। लोग मास्क पहनकर घर से निकलने को मजबूर हैं, लेकिन प्राधिकरण की ओर से न तो पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही मरम्मत कार्य शुरू हुआ है।
पानी-बिजली की मार, जनता बेहाल
सिर्फ सड़क ही नहीं, पानी और बिजली की समस्या ने भी लोगों का सब्र तोड़ दिया है। पानी की सप्लाई अनियमित है—कभी प्रेशर कम, तो कभी कई-कई दिन पानी गायब। वहीं, बिजली कटौती अब आम बात हो चुकी है। गर्मी हो या सर्दी, बिना सूचना के बिजली गुल कर दी जाती है।
शहरवासियों का कहना है कि जब वे समय पर टैक्स देते हैं, मेंटेनेंस चार्ज भरते हैं और लोकतंत्र में अपने मत का प्रयोग करते हैं, तो बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए। लेकिन यहां हालात उलटे हैं—सुविधाएं मांगने पर सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, काम नहीं।
AOA अध्यक्ष अनुभव दुबे का तीखा बयान
फ्यूज़न होम्स के AOA अध्यक्ष अनुभव दुबे ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा,
“जब जनता समय पर टैक्स देती है और लोकतंत्र में अपना वोट देती है, तो बदले में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना उसका अधिकार है। दुर्भाग्य की बात है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हालत आज गांव से भी बदतर होती जा रही है। अगर ये सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी, तो शहर में रहने का औचित्य ही क्या रह जाएगा?”
उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ और हालात नहीं सुधरे, तो जनता को मजबूर होकर संगठित आंदोलन करना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्राधिकरण की होगी।
शिकायतें, ज्ञापन… फिर भी सन्नाटा
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार लिखित शिकायतें दीं, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। न कोई स्थलीय निरीक्षण, न मरम्मत का ठोस प्लान और न ही समयसीमा तय की गई।
लोगों का कहना है कि प्राधिकरण को न मीडिया का डर है, न जनप्रतिनिधियों का दबाव और न ही जनता की पीड़ा से कोई सरोकार।
आंदोलन की आहट, जनता का सब्र जवाब दे रहा
अब हालात ऐसे बन चुके हैं कि निवासियों में भारी आक्रोश है। सोसाइटी प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और मीडिया अभियान चलाने को मजबूर होंगे। यह सिर्फ एक सड़क की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है।
सवाल वही, जवाब कोई नहीं
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ग्रेटर नोएडा वेस्ट की जनता को कभी राहत मिलेगी?
क्या प्राधिकरण नींद से जागेगा या फिर यह इलाका यूं ही गड्ढों और धूल में दम तोड़ता रहेगा?
शहरवासियों की एक ही मांग है—बैठकों और फाइलों से बाहर निकलकर, जमीन पर काम शुरू किया जाए, ताकि ग्रेटर नोएडा वेस्ट सच में रहने लायक शहर बन सके, न कि सिर्फ कागज़ों की “स्मार्ट सिटी”।



