Surajpur Barahi Mella : “रसिया की रंगत, बाजार की चकाचौंध और आस्था का महासंगम, सूरजपुर का बाराही मेला बना जनउत्सव का महाकुंभ!”, होली संगीत प्रतियोगिता में लोकधुनों की गूंज, ‘मीना बाजार’ में उमड़ा जनसैलाब—संस्कृति, समाज और कारोबार का अनोखा मेल, इतिहास से वर्तमान तक—मीना बाजार का बढ़ता दायरा

सूरजपुर, रफ़्तार टूडे । ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में आयोजित बाराही मेला 2026 इस वर्ष अपने भव्य स्वरूप, सांस्कृतिक विविधता और जबरदस्त जनसहभागिता के चलते पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह मेला अब केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संस्कृति, समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था का जीवंत मंच बन चुका है।
मंगलवार को आयोजित होली संगीत प्रतियोगिता और सजे हुए ‘मीना बाजार’ ने मेले की रौनक को चरम पर पहुंचा दिया, जहां हर उम्र के लोगों के लिए मनोरंजन, खरीदारी और सांस्कृतिक अनुभव का अनूठा संगम देखने को मिला।
होली संगीत प्रतियोगिता: लोक संस्कृति की गूंज से झूम उठा मंच
सांस्कृतिक मंच पर आयोजित होली संगीत प्रतियोगिता ने मेले को एक अलग ही रंग में रंग दिया। पारंपरिक रसिया, लोकगीत और पौराणिक कथाओं से सजी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस प्रतियोगिता में महाशय पंडित रामकुमार घरबरा, गौरव भाटी डाबरा और कैप्टन रिछपाल नागर (तिगांव, हरियाणा) एंड पार्टी के कलाकारों ने अपने अनूठे अंदाज में प्रस्तुति दी। हर टीम को 30 मिनट का समय दिया गया, जिसमें उन्होंने अपने गायन और कथाओं के माध्यम से मंच पर एक जीवंत माहौल तैयार किया।
विशेष रूप से अभिमन्यु वध प्रसंग की प्रस्तुति ने वीरता और करुणा का ऐसा संगम दिखाया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं “सती निहाल दे” जैसे लोक प्रसंगों ने परंपराओं की झलक पेश की।
गौरव भाटी डाबरा एंड पार्टी ने अपने रसिया के जरिए दहेज प्रथा जैसे सामाजिक मुद्दों को उठाते हुए मनोरंजन के साथ जागरूकता का संदेश भी दिया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
कलाकारों का सम्मान, परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागी कलाकारों को शिव मंदिर सेवा समिति द्वारा स्मृति चिन्ह और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजकों ने कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि लोक संस्कृति को जीवित रखने में इन कलाकारों की भूमिका अमूल्य है।

मुख्य अतिथि का संदेश: बेटियों की शिक्षा ही असली सशक्तिकरण
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश कबड्डी टीम की कप्तान सोनिका नागर उपस्थित रहीं। उनका समिति द्वारा भव्य स्वागत किया गया। अपने संबोधन में सोनिका नागर ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही समाज के विकास की असली नींव है। उन्होंने कहा कि यदि बेटियों को सही अवसर मिले, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
उन्होंने समाज में व्याप्त उस सोच पर भी चिंता जताई, जहां लड़कियों की शिक्षा से ज्यादा उनके विवाह को प्राथमिकता दी जाती है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि आज वे खेल और पुलिस सेवा दोनों क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं, जो बेटियों की क्षमता का प्रमाण है।
‘मीना बाजार’ बना मेले का दिल, खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़
जहां मंच पर संस्कृति की गूंज थी, वहीं दूसरी ओर मीना बाजार में खरीदारी का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। शाम होते ही पूरा बाजार रोशनी, रंग और भीड़ से जगमगा उठा।
यह बाजार खासतौर पर महिलाओं और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां मिट्टी के बर्तन, ज्वैलरी, खिलौने, कॉस्मेटिक्स, चश्मे, घड़ियां, बैलून, हुक्का और घरेलू सामान तक हर चीज उपलब्ध है।
सबसे खास बात यह रही कि अधिकांश दुकानों पर 10 से 100 रुपये तक के किफायती विकल्प मौजूद हैं, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से खरीदारी कर पा रहे हैं। मोलभाव की सुविधा ने भी ग्राहकों के अनुभव को और बेहतर बना दिया।
इतिहास से वर्तमान तक—मीना बाजार का बढ़ता दायरा
आयोजकों के अनुसार, बाराही मेले के शुरुआती दौर से ही यहां छोटे स्तर पर दुकानें लगती थीं, लेकिन समय के साथ मीना बाजार ने एक विशाल और व्यवस्थित स्वरूप ले लिया है।
इस वर्ष यह बाजार बर्फखाना क्षेत्र से लेकर प्राचीन बाराही मंदिर, सांस्कृतिक मंच और मल्ल स्थल तक फैला हुआ है, जिससे हर दिशा से आने वाले श्रद्धालु आसानी से बाजार तक पहुंच सकते हैं।

आने वाले कार्यक्रमों को लेकर उत्साह चरम पर
मेले में आगामी दिनों में भी कई आकर्षक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 9 अप्रैल को सांस्कृतिक मंच पर बलराम बैसला एंड पार्टी द्वारा विशेष रागनी प्रस्तुतियां दी जाएंगी, जिसमें कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे।
इसको लेकर अभी से लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा है और उम्मीद है कि आने वाले कार्यक्रम मेले की रौनक को और बढ़ाएंगे।
परंपरा, मनोरंजन और बाजार का अद्भुत संगम
बाराही मेला-2026 इस बार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव बनकर उभरा है। जहां एक ओर मंच पर लोक कला और परंपराएं जीवंत हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर मीना बाजार स्थानीय व्यापार और जनउत्साह का केंद्र बना हुआ है।
यह मेला इस बात का प्रमाण है कि जब परंपरा, संस्कृति और समाज एक साथ आते हैं, तो वह आयोजन एक जीवंत महोत्सव में बदल जाता है, जो हर किसी के दिल में अपनी खास जगह बना लेता है।



