BIG NEWS : “अब फाइलों की नहीं, कार्रवाई की चलेगी घड़ी!, विधान परिषद समिति की सख्त चेतावनी—जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर देरी बर्दाश्त नहीं, पारदर्शिता और जवाबदेही होगी अनिवार्य”, “तीनों प्राधिकरण से लेकर पुलिस-स्वास्थ्य तक, हर विभाग की हुई गहन पड़ताल”, “प्रोटोकॉल उल्लंघन पर भी सख्ती—रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच”, “आयुष्मान कार्ड और सफाई कर्मियों के सत्यापन पर भी खास निर्देश”

गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टूडे। प्रशासनिक कार्यप्रणाली को तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विनियमन समीक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता Ashwini Tyagi ने की, जिसमें जिले के लगभग सभी प्रमुख विभागों के अधिकारियों को बुलाकर 10 निर्धारित बिंदुओं पर गहन समीक्षा की गई।
बैठक का मुख्य फोकस स्पष्ट था—जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई, लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण और प्रशासनिक पारदर्शिता को हर हाल में सुनिश्चित करना।
“तीनों प्राधिकरण से लेकर पुलिस-स्वास्थ्य तक, हर विभाग की हुई गहन पड़ताल”
इस समीक्षा बैठक में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण सहित पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य, परिवहन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और शिक्षा विभाग के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई।
वर्ष 2024 से अब तक जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों, विकास कार्यों से जुड़े प्रस्तावों और उनके निस्तारण की वास्तविक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।
समिति ने स्पष्ट रूप से यह जानने का प्रयास किया कि कितने मामलों में कार्रवाई हुई, कितने लंबित हैं और देरी के पीछे क्या कारण हैं।
“जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर देरी नहीं चलेगी—सख्त निर्देश जारी”
बैठक में सभापति Ashwini Tyagi ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी अब स्वीकार नहीं की जाएगी, और सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि हर पत्र पर तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई हो।
इसके साथ ही समिति द्वारा मांगी गई सूचनाओं को भी समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
“प्रोटोकॉल उल्लंघन पर भी सख्ती—रजिस्टर और रिकॉर्ड की जांच”
बैठक में सरकारी कार्यक्रमों के दौरान प्रोटोकॉल के पालन की स्थिति पर भी गंभीर चर्चा हुई।
जनप्रतिनिधि रजिस्टर की उपलब्धता, उसमें दर्ज विवरण और प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामलों की जांच की गई।
समिति ने साफ किया कि भविष्य में किसी भी प्रकार का प्रोटोकॉल उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

“पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर—भ्रष्टाचार मामलों की भी समीक्षा”
बैठक के दौरान एमएलसी Shrichand Sharma ने मानव सम्पदा पोर्टल पर अधिकारियों द्वारा संपत्ति विवरण प्रस्तुत करने की स्थिति की समीक्षा की।
साथ ही भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई का भी आकलन किया गया।
समिति ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
“आयुष्मान कार्ड और सफाई कर्मियों के सत्यापन पर भी खास निर्देश”
जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों के 100% आयुष्मान कार्ड बनाए जाएं, ताकि जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मिल सके।
इसके अलावा सफाई कर्मचारियों के सत्यापन की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए, जिससे व्यवस्थाओं में सुधार लाया जा सके।
“जिलाधिकारी का भरोसा—हर निर्देश का होगा सख्ती से पालन”
जिलाधिकारी Medha Rupam ने समिति के समक्ष जिले में अब तक हुई प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
उन्होंने आश्वासन दिया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का प्रभावी और समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा, और जहां भी कमियां हैं, उन्हें जल्द से जल्द दूर किया जाएगा।
“जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी—बैठक बनी प्रभावशाली”
इस महत्वपूर्ण बैठक में समिति के सदस्य Shrichand Sharma, पवन कुमार सिंह, धर्मेन्द्र भारद्वाज, वीरेन्द्र सिंह, ओमप्रकाश सिंह, दिनेश कुमार गोयल, विधायक लक्ष्मीराज सिंह, जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सभी ने मिलकर जिले के विकास और प्रशासनिक सुधारों पर अपने विचार रखे।
“अब जवाबदेही तय, देरी पर लगेगा ब्रेक”
गौतमबुद्धनगर में आयोजित इस समीक्षा बैठक ने साफ संकेत दे दिया है कि अब प्रशासनिक ढिलाई और फाइलों में देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समयबद्ध कार्रवाई, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता—इन्हीं तीन स्तंभों पर अब जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को आगे बढ़ाया जाएगा।
यह बैठक आने वाले समय में प्रशासनिक सुधारों और जनसेवा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।



