Yatharth Hospital News : यथार्थ अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल, मरीज की मौत के बाद उठी उच्चस्तरीय जांच की मांगपूर्व बार अध्यक्ष राकेश नागर ने निदेशक कपिल त्यागी को लिखा गंभीर पत्र, चिकित्सीय उदासीनता को बताया मौत का कारण, 6 दिन चला इलाज, फिर भी न मिली राहत, बाहर ही तोड़ा दम!

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
जनपद गौतमबुद्ध नगर स्थित यथार्थ अस्पताल, ग्रेटर नोएडा के प्रबंधन पर एक गंभीर आरोप सामने आया है, जहां ग्राम टीला शहबाजपुर निवासी श्री मनोज मावी की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मृत्यु को लेकर चिकित्सीय लापरवाही का मुद्दा गरमा गया है।
उचित उपचार और आवश्यक मेडिकल सपोर्ट की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। अंततः, लाचार होकर मरीज को मेक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां मुख्य द्वार पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
इस संदर्भ में दादरी बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश नागर द्वारा यथार्थ अस्पताल के निदेशक कपिल त्यागी को एक तीखा पत्र भेजा गया है, जिसमें 6 दिनों तक चले इलाज के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा की गई घोर लापरवाही की विस्तार से शिकायत की गई है।
6 दिन चला इलाज, फिर भी न मिली राहत — बाहर ही तोड़ा दम!
रिपोर्ट के मुताबिक, श्री मनोज मावी, जिनका यथार्थ अस्पताल में 28 जुलाई से 3 अगस्त दोपहर 1 बजे तक इलाज चल रहा था, को बार-बार इलाज में लापरवाही और दवाओं की अनुपलब्धता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
परिजनों और सहयोगियों ने समय-समय पर अस्पताल प्रबंधन को स्थिति की गंभीरता से अवगत भी कराया, लेकिन उचित उपचार और आवश्यक मेडिकल सपोर्ट की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई। अंततः, लाचार होकर मरीज को मेक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां मुख्य द्वार पर ही उनकी मृत्यु हो गई।
राकेश नागर ने जताई पीड़ा — “यह केवल मौत नहीं, एक व्यवस्था की विफलता है”
राकेश नागर, वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी सक्रिय हैं, उन्होंने इस घटना को न केवल व्यक्तिगत क्षति, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की असफलता करार दिया है। उन्होंने लिखा:
“यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है। मरीज की मौत केवल मेडिकल लापरवाही नहीं, बल्कि एक जानलेवा उदासीनता का परिणाम है।”
उन्होंने यथार्थ अस्पताल प्रबंधन से इस पूरे प्रकरण पर त्वरित उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की है।
पत्र में क्या लिखा गया है?
पत्र के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:
“बार-बार बताने के बावजूद उचित समय पर आवश्यक दवाइयों एवं उपचार की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके चलते मेरे मरीज श्री मनोज मावी की मौत हो गई। अस्पताल के प्रति यह एक सीधी आपराधिक लापरवाही है। मैं आपसे मांग करता हूँ कि तत्काल इस पर उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए और दोषी जनों पर कठोर कार्रवाई की जाए।“
पत्र के अंत में श्री नागर ने निदेशक से अपील की है कि ऐसी दुखद और अस्वीकार्य घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए नीति-स्तरीय बदलाव और जवाबदेही प्रणाली बनाई जाए।
मांग उठी — “जनपद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ले संज्ञान”
इस प्रकरण को लेकर क्षेत्र में रोष व्याप्त है और लोग मांग कर रहे हैं कि जनपद प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा चिकित्सा परिषद (Medical Council) को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।
पीड़ित पक्ष ने दी संपर्क जानकारी
पत्र के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश नागर ने अपना संपर्क भी दिया है ताकि इस प्रकरण में उनसे औपचारिक या जांच संबंधी संवाद किया जा सके।
निष्कर्ष: निजी अस्पतालों में बढ़ती लापरवाही पर लगे लगाम
IHE 2025 जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की हॉस्पिटैलिटी और हेल्थ सेक्टर की बात होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इस तरह की घटनाएं उजागर करती हैं कि कुछ निजी अस्पतालों में मानवता, सेवा और चिकित्सा आचार संहिता की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
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