शिक्षाग्रेटर नोएडा

GD Goenka School News : ग्रेटर नोएडा के जी.डी. गोयनका पब्लिक स्कूल में “ऑर्केस्ट्रा दिवस” की अद्भुत और सुरमयी गूंज, बच्चों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सबको मोहा, अभिभावक और शिक्षक हुए अभिभूत, प्रधानाचार्या डॉ रेनू सहगल का संदेश – “कला से ही होता है सर्वांगीण विकास”


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शहर के स्वर्ण नगरी स्थित जी.डी. गोयनका पब्लिक स्कूल का बुधवार का दिन बेहद खास रहा। विद्यालय में आयोजित “ऑर्केस्ट्रा दिवस” ने बच्चों की अद्भुत प्रतिभा, संगीत की सुरमयी लहरों और कला की अभिव्यक्ति से ऐसा माहौल बना दिया कि उपस्थित हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो गया।


कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायी शब्दों से

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की आदरणीय प्रधानाचार्या डॉ. रेनु सहगल के प्रेरणादायी संबोधन से हुआ। उन्होंने बच्चों को यह संदेश दिया कि –

“संगीत आत्मा की भाषा है। यह केवल आनंद ही नहीं देता बल्कि जीवन में अनुशासन, संतुलन और आत्मविश्वास भी जगाता है। हमें इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।”

उनके इन शब्दों ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि संगीत और कला का समन्वय ही बच्चों का वास्तविक विकास है।


वाद्य यंत्रों की सुरमयी झंकार

बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से यह सिद्ध कर दिया कि वे किसी भी बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।

  • तबला की थाप पर गूंजता लयबद्ध संगीत
  • गिटार की मनमोहक और आधुनिक धुनें
  • बांसुरी की सुमधुर तान
  • ड्रम की गूंजती हुई ताल
  • की-बोर्ड की विविध ध्वनियाँ

इन सभी वाद्य यंत्रों की संयुक्त प्रस्तुति ने वातावरण को पूरी तरह संगीत मय बना दिया। बच्चों ने ताल और सुर का अद्भुत सामंजस्य बिठाकर ऐसा माहौल बना दिया कि सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।


अभिभावक और शिक्षक हुए अभिभूत

बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर अभिभावक और शिक्षक दोनों ही गर्व और खुशी से भर गए।

  • अभिभावकों का कहना था कि मंच पर बच्चों का आत्मविश्वास और उनकी लगन देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है।
  • शिक्षकों ने माना कि यह आयोजन बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाने का सबसे बड़ा माध्यम है।

संगीत की धुनों ने केवल बच्चों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और शिक्षकों को भी भावविभोर कर दिया।


संगीत से सीखे जीवन के मूल्य

यह कार्यक्रम सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं था, बल्कि बच्चों के लिए एक जीवन शिक्षा का अनुभव भी रहा।

  • आत्मविश्वास : बड़े मंच पर प्रस्तुति देकर बच्चों ने आत्मविश्वास पाया।
  • अनुशासन : संगीत में लय और ताल का पालन बच्चों ने अनुशासन के रूप में सीखा।
  • टीमवर्क : सामूहिक प्रस्तुति ने बच्चों को साथ मिलकर काम करने की सीख दी।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि कला और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं।


प्रधानाचार्या का संदेश – “कला से ही होता है सर्वांगीण विकास”

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. रेनु सहगल ने सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि –

“संगीत और कला जीवन को संपूर्ण बनाते हैं। हमें अपने बच्चों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि कला और संस्कृति में भी आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। यही उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा।”

प्रधानाचार्या ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को इस दिशा में प्रोत्साहित करें ताकि उनकी प्रतिभा समाज के सामने आ सके।


कार्यक्रम का महत्व

“ऑर्केस्ट्रा दिवस” केवल एक विद्यालयी आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों की रचनात्मकता और उनके अंदर छिपी प्रतिभा को सामने लाने का एक अनोखा प्रयास था।

  • यह बच्चों के आत्मविश्वास का उत्सव था।
  • यह संगीत और कला के माध्यम से उनकी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा था।
  • यह समाज को यह संदेश देने का प्रयास था कि शिक्षा और कला साथ-साथ चलें तो ही बच्चों का विकास संभव है।

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