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Breaking News : गौतम बुद्ध नगर की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव, जिले में 4.47 लाख नाम कटे, चुनावी तैयारी के बीच प्रशासनिक कार्रवाई पर मचा सियासी और सामाजिक मंथन, 2003 के बाद सबसे बड़ा संशोधन?, राजनीतिक दलों की चिंता और सवाल

ग्रेटर नोएडा/नोएडा/जेवर, रफ़्तार टूडे। जिले की राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। जिले में मतदाता सूची से कुल 4.47 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक दलों से लेकर आम नागरिकों तक के बीच चर्चाओं का दौर तेज़ हो गया है। निर्वाचन विभाग द्वारा की गई इस व्यापक कार्रवाई को मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसके सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।


क्यों काटे गए लाखों नाम?
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत की गई है। जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से वे लोग शामिल हैं— जिनका निधन हो चुका है
जो स्थायी रूप से जिले से बाहर शिफ्ट हो गए हैं
जिनके नाम दो स्थानों पर दर्ज पाए गए
या जिनके पते और पहचान से संबंधित दस्तावेज़ सत्यापन में खामियां पाई गईं
प्रशासन का दावा है कि मतदाता सूची को साफ, पारदर्शी और अद्यतन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था, ताकि फर्जी वोटिंग और दोहरे नामों जैसी समस्याओं पर लगाम लगाई जा सके।

जिले में कुल स्थिति (समग्र आंकड़े)
विवरण
संख्या
कुल कटे मतदाता
4,47,000 (लगभग)


विधानसभा क्षेत्रों में कहां कितने नाम कटे?
जिले की अलग-अलग विधानसभा सीटों में नाम कटने का आंकड़ा भी सामने आया है। सबसे ज्यादा असर जेवर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है, जहां करीब 2.93 लाख नाम हटाए गए। इसके बाद नोएडा, दादरी और अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 के बाद जिले में जनसंख्या, शहरीकरण और प्रवासी आबादी में बड़ा बदलाव आया है। खासतौर पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक और आईटी हब में नौकरीपेशा लोगों का आवागमन लगातार बना रहता है, जिससे मतदाता सूची को अद्यतन करना एक बड़ी चुनौती रहा है

2003 के बाद सबसे बड़ा संशोधन?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि 2003 के बाद यह जिले में मतदाता सूची का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है। उस समय भी व्यापक स्तर पर नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया हुई थी। अब एक बार फिर इतने बड़े पैमाने पर नाम कटने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या सभी मामलों में उचित सत्यापन और सूचना प्रक्रिया का पालन किया गया।

एसआरआईआर (पुनरीक्षण) से पहले और बाद की स्थिति – विधानसभा-वार नोएडा विधानसभा
विवरण संख्या
पुरुष (पहले) 4,30,733
महिला (पहले) 3,40,337
थर्ड जेंडर (पहले) 12
कुल (पहले) 7,71,082
पुरुष (बाद) 3,12,007
महिला (बाद) 2,50,016
थर्ड जेंडर (बाद) 9
कुल (बाद)। 5,62,032
कटे नाम। 2,09,050


प्रशासन का पक्ष: पारदर्शिता और निष्पक्षता
जिला निर्वाचन कार्यालय का कहना है कि पूरी प्रक्रिया घर-घर सत्यापन, बीएलओ रिपोर्ट, ऑनलाइन डेटा और आधार से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें पहले नोटिस और सत्यापन का अवसर भी दिया गया था।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दोबारा नाम जुड़वा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और निर्वाचन कार्यालयों में सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

दादरी विधानसभा
विवरण संख्या
पुरुष (पहले) 3,96,703
महिला (पहले) 3,30,069
थर्ड जेंडर (पहले) 56
कुल (पहले) 7,26,828
पुरुष (बाद) 3,07,174
महिला (बाद) 2,55,457
थर्ड जेंडर (बाद) 40
कुल (बाद)। 5,62,671
कटे नाम। 1,64,157


राजनीतिक दलों की चिंता और सवाल
हालांकि प्रशासनिक दावे अपनी जगह हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने से चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है। विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि कहीं यह प्रक्रिया किसी खास वर्ग या क्षेत्र को प्रभावित करने वाली तो नहीं है।
वहीं सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं का कहना है कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है और फर्जी या अपात्र मतदाताओं के नाम हटना सकारात्मक कदम है।

दादरी विधानसभा
विवरण संख्या
पुरुष (पहले) 1,99,223
महिला (पहले) 1,68,530
थर्ड जेंडर (पहले) 10
कुल (पहले) 3,67,763
पुरुष (बाद) 1,60,640
महिला (बाद) 1,32,854
थर्ड जेंडर (बाद) 5
कुल (बाद) 2,93,499
कटे नाम। 74,264

आम मतदाता की चिंता: ‘कहीं मेरा नाम तो नहीं कटा?’
इस खबर के सामने आने के बाद आम नागरिकों में भी हलचल है। कई लोग निर्वाचन कार्यालय और ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना नाम जांच रहे हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, किराए पर रहने वाले और हाल ही में स्थान बदले लोगों में यह चिंता ज्यादा देखने को मिल रही है कि कहीं तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से उनका नाम सूची से बाहर तो नहीं हो गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि मतदाता जागरूकता इस समय बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।


चुनावी माहौल में बढ़ी सरगर्मी
जिले में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मतदाता सूची में हुए इस बड़े बदलाव ने राजनीतिक सरगर्मी को और तेज़ कर दिया है। राजनीतिक दल अब बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर रहे हैं, ताकि समर्थकों के नाम सूची में सुनिश्चित किए जा सकें।


आगे क्या?
निर्वाचन विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में पूरक मतदाता सूची (Supplementary List) जारी की जा सकती है, जिसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे और जिन पात्र लोगों के नाम गलती से कटे हैं, उन्हें शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन ने अपील की है कि सभी नागरिक समय रहते अपना नाम जांच लें।


लोकतंत्र की कसौटी पर सूची की शुद्धता
मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ होती है। ऐसे में जिले में 4.47 लाख नामों का कटना न सिर्फ एक प्रशासनिक आंकड़ा है, बल्कि यह लोकतंत्र की पारदर्शिता, प्रशासन की जिम्मेदारी और नागरिकों की जागरूकता—तीनों की परीक्षा भी है।
अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में कितने नाम दोबारा जुड़ते हैं और यह बदलाव चुनावी नतीजों को किस दिशा में मोड़ता है। फिलहाल, जिले की सियासत और आम जनजीवन—दोनों की निगाहें मतदाता सूची पर टिकी हुई हैं।

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Raftar Today
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