Indin Expo News : ‘विरासत’ का रंग, हस्तकरघा का संग, ग्रेटर नोएडा में कारीगरों का मेला, सितारों का मंज़र और संस्कृति का जश्न, गिरिराज सिंह बोले “हस्तकरघा हमारी आत्मा”, कंगना रनौत ने की कारीगरों की मेहनत को सलाम, फैशन शो में बुनाई और परंपरा की चमक ने सबका दिल जीता

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में इस बार कुछ अलग ही नज़ारा था। मौका था हस्तकरघा दिवस का और मंच सजा था ‘विरासत’ प्रदर्शनी के लिए – एक ऐसा आयोजन जहां भारत की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और वस्त्र शिल्प ने एक साथ अपने रंग बिखेरे। इस भव्य आयोजन की मेज़बानी एक्सपो बाजार और ट्रेवल एंड इंडस्ट्री कॉन्क्लेव एसोसिएशन (TICA) ने की।
यह प्रदर्शनी सिर्फ एक इवेंट नहीं, बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक कहानी का जीवंत अध्याय थी, जो सदियों से करघों की थाप, रंगों के जादू और बुनकरों की मेहनत से लिखी जाती रही है।
शानदार आगाज़ – हस्तकरघा की महिमा पर गर्व का इज़हार
प्रदर्शनी का शुभारंभ केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री गिरिराज सिंह ने किया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा—
“हमारा हस्तकरघा और हस्तशिल्प न केवल भारत की आत्मा है, बल्कि अब वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना चुका है। यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को नए युग से जोड़ने का कार्य सफलतापूर्वक हो रहा है।”
गिरिराज सिंह के शब्दों में गर्व साफ झलक रहा था, और दर्शक भी उनकी बातों से सहमति में सिर हिला रहे थे।
सितारों की मौजूदगी ने बढ़ाई शोभा
इस मौके पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत भी विशेष अतिथि के रूप में पहुंचीं। अपनी बात में उन्होंने कहा—
“भारत की असली सुंदरता इसकी जड़ों में है, और हस्तशिल्प इसका गौरव है। हमारे कारीगर न केवल कला में माहिर हैं, बल्कि वे भारत की पहचान को दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।”
कंगना ने मंच पर मौजूद कारीगरों से मुलाकात की, उनके बनाए कपड़ों को नज़दीक से देखा और कई डिज़ाइनों की तारीफ भी की।
विशिष्ट मेहमानों की शिरकत
इस कार्यक्रम में राजनीति और उद्योग जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें शामिल थे –
- केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी
- उत्तर प्रदेश MSME मंत्री राकेश सचान
- लोकसभा सांसद डॉ. महेश शर्मा
- राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल
सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे आयोजन न केवल कारीगरों को पहचान दिलाते हैं, बल्कि उन्हें नए बाजार और अवसर भी प्रदान करते हैं।
कारीगरों का हुनर – धागों से सपनों तक
देश के अलग-अलग कोनों से आए बुनकरों और कारीगरों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में खादी, सूती, रेशमी, जरदोज़ी, मिट्टी के शिल्प, लकड़ी की नक्काशी जैसी अनगिनत पारंपरिक कलाओं के नमूने लोगों को आकर्षित कर रहे थे।
हर स्टॉल पर एक कहानी थी – कभी पीढ़ियों से चली आ रही बुनाई की परंपरा की, तो कभी मिट्टी को आकार देने वाले कलाकार के संघर्ष और जुनून की।
एक्सपो बाजार का मिशन – कारीगर से सीधे ग्राहक तक
एक्सपो बाजार के सीईओ अजय सिंह ने बताया कि उनका प्लेटफॉर्म देश का पहला B2B कैश एंड कैरी मंच है, जो सीधे कारीगरों से सामान खरीदकर उसे देश और विदेश के व्यापारियों तक पहुंचाता है।
“हमारा उद्देश्य है भारत के कोने-कोने में छिपी कला को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना, ताकि कारीगरों की मेहनत का सही मूल्य मिल सके,” उन्होंने कहा।
फैशन शो – परंपरा और आधुनिकता का संगम
आयोजन का सबसे चर्चित हिस्सा रहा फैशन शो, जिसमें मॉडल्स ने पारंपरिक भारतीय वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया। ये सभी परिधान देश के विभिन्न राज्यों के कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित थे।
जब मंच पर खादी की सादगी, बनारसी ब्रोकेड की शान, और रेशम की चमक एक साथ उतरी, तो दर्शकों की तालियां गूंज उठीं। यह नजारा इस बात का प्रमाण था कि भारतीय फैशन इंडस्ट्री में हस्तकरघा का स्थान आज भी सर्वोपरि है।
कारीगरों की आवाज़ – आयोजन से मिली नई उम्मीद
कारीगरों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से उन्हें न सिर्फ बिक्री का मौका मिलता है, बल्कि नए डिज़ाइन, नए ग्राहक और बाजार की मांग को समझने का भी अवसर मिलता है।
राजस्थान से आए एक बुनकर ने कहा—
“हम सालों से खादी बुन रहे हैं, लेकिन ऐसे बड़े आयोजन में पहली बार अपने उत्पाद को देश-विदेश के खरीदारों के सामने पेश किया है। इससे हमें नई पहचान और आत्मविश्वास मिला है।”
विरासत का महत्व – अतीत से भविष्य तक
‘विरासत’ सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि यह अतीत और भविष्य के बीच एक पुल की तरह थी। इसने यह साबित किया कि भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प न सिर्फ संग्रहालयों की चीज़ हैं, बल्कि ये आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनकर भी चमक सकते हैं।
निष्कर्ष – संस्कृति, कला और व्यापार का संगम
ग्रेटर नोएडा की यह प्रदर्शनी हस्तकरघा दिवस को मनाने का सिर्फ एक माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय शिल्प की शक्ति का उत्सव भी थी। इससे यह संदेश गया कि जब सरकार, उद्योग, कलाकार और समाज एक साथ आएं, तो कला सिर्फ जीवित ही नहीं रहती, बल्कि नए पंख भी पाती है।
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