Breaking News : 20 दिन की जंग के बाद सरकार ने मानी बात!, यूपी में डीड राइटर्स और वकीलों की बड़ी जीत, खत्म हुई ऐतिहासिक हड़ताल, आज से फिर दौड़ी रजिस्ट्री व्यवस्था, ई-पंजीयन विवाद पर सरकार ने बदला फैसला, 32 जिलों में फिर शुरू हुई रजिस्ट्री, लाखों लोगों को मिली राहत, अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने जीत का किया ऐलान

लखनऊ, रफ़्तार टूडे। करीब 20 दिनों तक चली उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। ई-पंजीयन (ऑनलाइन रजिस्ट्री) व्यवस्था के विरोध में आंदोलन कर रहे डीड राइटर्स, अधिवक्ताओं और स्टांप वेंडरों ने अपनी मांगें माने जाने के बाद हड़ताल खत्म करने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही बुधवार से प्रदेश के 32 से अधिक जिलों में रजिस्ट्री कार्यालयों में फिर से कामकाज शुरू हो गया है। लंबे समय से रुकी संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू होने से आम नागरिकों, खरीदारों, विक्रेताओं और रियल एस्टेट क्षेत्र को बड़ी राहत मिली है।
प्रदेशभर में चली इस हड़ताल ने न केवल लाखों लोगों के जमीन और मकान संबंधी कार्यों को प्रभावित किया, बल्कि सरकार के राजस्व पर भी बड़ा असर डाला। प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ हजारों संपत्तियों की रजिस्ट्री अटक गई थी। अब सरकार और डीड राइटर्स के बीच सहमति बनने के बाद स्थिति सामान्य होने लगी है।
लखनऊ में दो दिन चली मैराथन बैठक, आखिरकार बनी सहमति
हड़ताल समाप्त होने के पीछे लखनऊ में हुई लगातार दो दिनों की महत्वपूर्ण बैठकों को अहम माना जा रहा है। डीड राइटर्स और अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश की आईजी पंजीयन नेहा शर्मा के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में ई-पंजीयन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ। प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष यह चिंता रखी कि नई व्यवस्था से डीड राइटर्स, अधिवक्ताओं और स्टांप वेंडरों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत के बाद सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
सरकार ने वापस लिया विवादित शासनादेश
स्टांप एवं पंजीयन विभाग द्वारा 4 जून को जारी किए गए ई-पंजीयन मॉड्यूल के शासनादेश को लेकर सबसे अधिक विवाद था। इस आदेश के तहत विकास प्राधिकरणों और अन्य सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों की पहली रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रस्ताव था।
हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स में यह आशंका पैदा हो गई थी कि भविष्य में उनकी भूमिका सीमित हो जाएगी और रोजगार प्रभावित होगा। लगातार बढ़ते विरोध और प्रदेशव्यापी हड़ताल के बाद सरकार ने विवादित शासनादेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया।
मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने किया बड़ा ऐलान
उत्तर प्रदेश सरकार के स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार ने सभी पक्षों की चिंताओं को गंभीरता से सुना है। उन्होंने घोषणा की कि ई-पंजीयन संबंधी विवादित शासनादेश को निरस्त कर दिया गया है और रजिस्ट्री व्यवस्था फिलहाल पूर्ववत तरीके से ही संचालित होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना था, लेकिन यदि इससे किसी वर्ग के रोजगार पर संकट की आशंका पैदा होती है तो सरकार संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है।
क्यों शुरू हुई थी यह हड़ताल?
डीड राइटर्स और अधिवक्ताओं का कहना था कि नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से भविष्य में दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया में उनकी भूमिका कम हो सकती है। उनका आरोप था कि बिना पर्याप्त परामर्श के नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया गया।
इसी विरोध में प्रदेश के 32 से अधिक जिलों में अधिवक्ताओं, डीड राइटर्स और स्टांप वेंडरों ने सामूहिक हड़ताल शुरू कर दी थी। धीरे-धीरे यह आंदोलन प्रदेशव्यापी बन गया और रजिस्ट्री कार्यालयों का कामकाज लगभग ठप हो गया।
लाखों लोगों के रुके थे काम
हड़ताल के कारण प्रदेशभर में हजारों संपत्तियों की खरीद-बिक्री प्रभावित हुई। कई लोगों की बैंक लोन प्रक्रिया रुक गई, बिल्डरों के प्रोजेक्ट प्रभावित हुए और जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाने से आम नागरिकों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
अब हड़ताल समाप्त होने के बाद बुधवार से सभी जिलों में उप निबंधक कार्यालयों में सामान्य रूप से रजिस्ट्री का कार्य प्रारंभ हो गया है। इससे रियल एस्टेट कारोबार में भी दोबारा गति आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार का क्या था उद्देश्य?
सरकार के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद, औद्योगिक विकास प्राधिकरण और अन्य सरकारी संस्थाओं द्वारा बेची जाने वाली संपत्तियों की पहली रजिस्ट्री को अधिक सरल बनाना था। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संबंधित प्राधिकरण का अधिकृत अधिकारी अपने कार्यालय से ही तैयार दस्तावेज ऑनलाइन उप निबंधक कार्यालय भेजता, जहां पंजीकरण पूरा होने के बाद दस्तावेज दोबारा ऑनलाइन वापस भेज दिए जाते। इससे नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनती।
संवाद से निकला समाधान, मिली दोहरी राहत
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार और विभिन्न पेशेवर संगठनों के बीच संवाद के माध्यम से जटिल समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। जहां एक ओर अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने अपनी मांगें मनवाकर इसे अपनी बड़ी जीत बताया, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को भी लंबे समय बाद राहत मिली है क्योंकि अब संपत्ति संबंधी कार्य फिर से सामान्य रूप से शुरू हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि ई-पंजीयन जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं लागू की जाती हैं तो सभी हितधारकों को विश्वास में लेकर ही उन्हें लागू किया जाना चाहिए, ताकि तकनीकी सुधार और रोजगार सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बना रहे।



