GIMS College News : जंगल, नेतृत्व और प्रबंधन का मेल, जीआईएमएस ने जिम कॉर्बेट में किया पांच दिवसीय आउटबाउंड ट्रेनिंग का आयोजन, ‘किताबों से बाहर निकल कर सिखाई गई टीमवर्क, नेतृत्व और समाधान की कला', छात्रों को मिला जीवन बदलने वाला अनुभव

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शहरी क्लासरूम से बाहर निकलकर जब शिक्षा प्रकृति की गोद में पहुंचती है, तो ज्ञान केवल किताबों में सीमित नहीं रहता – वह जीवन का हिस्सा बन जाता है। इसी दृष्टिकोण को साकार करते हुए जीएनआईओटी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ (GIMS) ने 10 जुलाई से 14 जुलाई 2025 तक जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में PGDM छात्रों के लिए एक शानदार पांच दिवसीय आउटबाउंड ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया।
उद्देश्य: क्लासरूम से करियर तक — व्यवहारिक प्रशिक्षण की नींव
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को नेतृत्व, टीमवर्क, समस्या समाधान, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और संचार कौशल जैसे प्रबंधकीय गुणों से लैस करना था।
संस्थान ने यह सुनिश्चित किया कि छात्र सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षताओं में भी निपुण हों।
जीआईएमएस के सीईओ श्री स्वदेश कुमार सिंह ने बताया:
“पुस्तकों में पढ़ा ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसे वास्तविक जीवन में लागू किया जाए। आउटबाउंड ट्रेनिंग छात्रों को न केवल एक टीम में काम करना सिखाती है, बल्कि उन्हें आत्मनिरीक्षण, धैर्य और निर्णय क्षमता भी प्रदान करती है।”
ट्रेनिंग की संरचना: खेलों में छिपा प्रबंधन का पाठ
इस अनोखे ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान विद्यार्थियों ने भाग लिया:
- ट्रस्ट फॉल: विश्वास और नेतृत्व के बीच का तालमेल
- माइंड चैलेंज गेम्स: समस्या समाधान और तेज सोच
- कोलैबोरेशन टास्क: समूह में कार्य करने की कला
- लीडरशिप रोल-प्ले: नेतृत्व की भूमिका को व्यवहार में समझना
- इमोशनल इंटेलिजेंस पर आधारित गतिविधियाँ: भावनाओं का प्रबंधन, तनाव नियंत्रण
हर गतिविधि को प्रशिक्षित एक्सपर्ट्स और फैकल्टी सदस्यों की देखरेख में क्रियान्वित किया गया, जिससे छात्रों को संरक्षित और प्रेरणादायक माहौल मिला।

जंगल सफारी: प्रकृति से सीखने का अद्भुत अनुभव
प्रशिक्षण का मुख्य आकर्षण रहा जंगल सफारी, जिसमें छात्र प्रकृति के बेहद करीब पहुंचे।
वन्य जीवन, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को देखने और समझने के इस अनुभव ने छात्रों के भीतर संवेदनशीलता, अनुशासन और सहनशीलता जैसे गुण विकसित किए।
भागीदारी और स्केल: शिक्षा के इस महायज्ञ में जुटे 510 प्रतिभागी
इस कार्यक्रम में 450 नवप्रवेशित पीजीडीएम छात्रों के साथ-साथ 60 फैकल्टी और स्टाफ सदस्य भी शामिल हुए।
सभी प्रतिभागियों ने इसे “जीवन की सबसे यादगार और शिक्षाप्रद यात्रा” करार दिया।
नेतृत्व से विचार:
🔹 सीईओ श्री स्वदेश कुमार सिंह ने कहा:
“हमारा लक्ष्य है कि छात्र सिर्फ एक डिग्री धारक न रहें, बल्कि वे वह नेता बनें जो परिवर्तन ला सकें — अपने करियर में, समाज में और राष्ट्र निर्माण में।”
🔹 फैकल्टी कोऑर्डिनेटर प्रो. मीनाक्षी गर्ग और डॉ. नीरज कुमार ने बताया:
“ऐसी ट्रेनिंग न केवल छात्रों की कॉर्पोरेट रेडीनेस को बढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें स्वस्थ मानसिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ती हैं।”

छात्रों की प्रतिक्रिया:
छात्रों ने अनुभव साझा करते हुए कहा:
“हमने पहली बार जाना कि एक टीम को लीड करना केवल आदेश देना नहीं होता, बल्कि सबको साथ लेकर चलना होता है। जंगल की शांति में खुद को जानना और चुनौतीपूर्ण गेम्स में दूसरों पर भरोसा करना — ये अनुभव कभी नहीं भूलेंगे।”
GIMS की पहचान: शिक्षा में व्यवहारिकता का स्तंभ
जीआईएमएस ने एक बार फिर साबित किया है कि वह सिर्फ डिग्री नहीं देता, बल्कि समर्पित, व्यावसायिक और संवेदनशील प्रबंधक तैयार करता है।
संस्थान आने वाले समय में और भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करेगा जिससे शिक्षा और वास्तविकता के बीच की खाई को पाटा जा सके।
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