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Sparsh School News : जहाँ ककहरा नहीं, सपनों की पहली उड़ान सिखाई जाती है ग्रेटर नोएडा में ‘स्वर्ण आरंभ–प्ले स्कूल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2026’ ने शिक्षा को दिया नया सम्मान, प्रारंभिक बाल शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले संस्थान हुए सम्मानित

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। बच्चों की हँसी, मासूम सवालों और रंग-बिरंगे सपनों से सजी एक बेहद भावनात्मक और प्रेरणादायी शाम का गवाह बना ग्रेटर नोएडा, जब वर्ल्ड ट्रेड कनेक्ट बिज़नेस एंड इंडस्ट्री एसोसिएशन (WTCBIA) के तत्वावधान में “स्वर्ण आरंभ–प्ले स्कूल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2026” का भव्य आयोजन स्पर्श ग्लोबल स्कूल के प्रांगण में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं था, बल्कि उस शिक्षा को सम्मान देने का मंच बना, जो बच्चों के दिलों से शुरू होकर उनके भविष्य तक पहुँचती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री शिशिर अग्रवाल द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दीप की लौ के साथ जैसे पूरे सभागार में यह संदेश फैल गया कि शिक्षा का असली उजाला वहीं से शुरू होता है, जहाँ बच्चों को डर नहीं, भरोसा मिलता है। इसके पश्चात प्रस्तुत की गई गणेश वंदना ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।


प्ले स्कूल: जहाँ किताबों से पहले बच्चे को समझा जाता है

इस आयोजन का मूल उद्देश्य उन प्ले स्कूलों को सम्मानित करना रहा, जिन्होंने प्रारंभिक बाल शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे संवेदनशीलता, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों से जोड़ा। मंच से यह बात बार-बार दोहराई गई कि बच्चे की पहली कक्षा ही उसका जीवन दर्शन तय करती है।
WTCBIA के प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में कहा कि प्रारंभिक शिक्षा वह बीज है, जिससे आगे चलकर व्यक्तित्व का विशाल वृक्ष तैयार होता है। उन्होंने कहा कि आज सम्मानित किए गए संस्थानों ने यह सिद्ध किया है कि प्ले स्कूल केवल बच्चों को “पढ़ाने” की जगह नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, जिज्ञासा और संस्कार देने की प्रयोगशाला हैं।

बच्चों का भविष्य, शिक्षकों के हाथों में सुरक्षित’
कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविदों और संस्थान प्रतिनिधियों की आँखों में गर्व और चेहरे पर मुस्कान साफ झलक रही थी। सम्मान प्राप्त करने वाले कई शिक्षकों ने भावुक होकर कहा कि जब समाज प्रारंभिक शिक्षा को पहचान देता है, तो उनका समर्पण और मजबूत हो जाता है।
इस अवसर पर स्पर्श यूनिवर्स के सीईओ श्री अमित सक्सेना ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा, “प्ले स्कूल बच्चों के जीवन की पहली प्रयोगशाला होते हैं, जहाँ गलती करने की आज़ादी होती है और सीखने की प्रक्रिया आनंद से आगे बढ़ती है। अगर हम इस स्तर पर बच्चे को सुरक्षित, खुश और समझा हुआ महसूस करा दें, तो उसका भविष्य अपने आप संवर जाता है।”
उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे हर बच्चे को एक जैसी किताब से नहीं, बल्कि उसकी व्यक्तिगत समझ और रुचि के अनुसार गढ़ें।


सम्मान नहीं, जिम्मेदारी का एहसास
‘स्वर्ण आरंभ–प्ले स्कूल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2026’ ने यह भी संदेश दिया कि यह सम्मान केवल उपलब्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है—आने वाली पीढ़ी को बेहतर इंसान बनाने की। समारोह में यह बात खास तौर पर उभरकर सामने आई कि आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में सबसे ज्यादा जरूरत संवेदनशील शिक्षा की है, न कि रटने वाली पढ़ाई की।
अभिभावकों ने भी इस पहल की खुलकर सराहना की। कई अभिभावकों ने कहा कि ऐसे आयोजनों से उन्हें यह भरोसा मिलता है कि उनके बच्चों का भविष्य केवल डिग्री नहीं, बल्कि मूल्य आधारित शिक्षा की ओर बढ़ रहा है।

शिक्षा का नया चेहरा, नई सोच
कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि ग्रेटर नोएडा और एनसीआर क्षेत्र में प्रारंभिक बाल शिक्षा अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है—जहाँ शिक्षा को बोझ नहीं, बल्कि उत्सव बनाया जा रहा है। ‘स्वर्ण आरंभ’ जैसे मंच इस बदलाव के सशक्त उदाहरण हैं।


उज्ज्वल भविष्य के संकल्प के साथ हुआ समापन
समारोह का समापन शिक्षा के माध्यम से एक संवेदनशील, सशक्त और मानवीय समाज के निर्माण के संकल्प के साथ किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह विश्वास भी व्यक्त किया गया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और भी व्यापक स्वरूप में शिक्षा जगत को प्रेरित करता रहेगा।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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