Breaking News : “उद्यमियों की हुंकार या मजबूरी की पुकार?, ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि पर भड़का उद्योग जगत, बोले- ‘पीठ में छुरा घोंपा गया!’”, संयुक्त प्रेस वार्ता में MSME उद्यमियों ने खोला मोर्चा, सरकार से राहत और संतुलन की मांग तेज

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे । ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक परिदृश्य में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। हाल ही में श्रमिकों के वेतन और ओवरटाइम दरों में हुई वृद्धि के बाद अब क्षेत्र के उद्यमियों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। ग्रेटर नोएडा प्रेस क्लब के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में MSME सेक्टर से जुड़े उद्यमियों ने सरकार और प्रशासन के फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े किए। यह प्रेस वार्ता केवल शिकायतों का मंच नहीं रही, बल्कि यह उद्योग जगत की उस चिंता का आईना बनी, जिसमें आर्थिक बोझ, असुरक्षा और असंतुलित निर्णयों की गूंज साफ सुनाई दी।
“वेतन वृद्धि बनी संकट—उद्योग की वायबिलिटी पर खतरा”
उद्यमियों का कहना है कि हालिया वेतन वृद्धि और ओवरटाइम समायोजन के फैसलों ने उद्योगों की आर्थिक स्थिति को हिला दिया है। नरेश गुप्ता (लघु उद्योग भारती) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अचानक लिए गए फैसलों से उद्योग की वायबिलिटी शून्य होने की स्थिति बन रही है।” “हमें सुबह बातचीत के लिए बुलाया गया और रातों-रात मजदूरी बढ़ा दी गई।” “यह माहौल डर का है और प्रशासन ने हमारी पीठ में छुरा घोंपा है।” उनका यह भी आरोप रहा कि मजदूरों के दबाव में आकर शासन-प्रशासन ने यह निर्णय लिया, जिससे उद्योगों पर असंतुलित बोझ पड़ा है।
“औद्योगिक माहौल में असुरक्षा—आगजनी और तोड़फोड़ से बढ़ी चिंता”
प्रेस वार्ता में यह भी मुद्दा उठा कि हाल के दिनों में गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिससे उद्योग जगत में असुरक्षा का माहौल बन गया है।
उद्यमियों का कहना है कि यदि इस तरह का वातावरण बना रहा, तो निवेश और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
“सरकार के फैसले का समर्थन, लेकिन राहत भी जरूरी”
दिलचस्प बात यह रही कि उद्यमियों ने सरकार के फैसले का पूर्ण विरोध नहीं किया, बल्कि उन्होंने संतुलन की मांग उठाई।
उनका कहना है— हम सरकार के निर्णय को लागू करेंगे
लेकिन सरकार को भी इस आर्थिक बोझ में भागीदारी निभानी चाहिए
टैक्स में राहत, सब्सिडी या अन्य आर्थिक सहयोग दिया जाए
उद्यमियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार राहत नहीं देती, तो उद्योगों को चलाना मुश्किल हो सकता है।
“निरीक्षण पर रोक की मांग—दो माह का समय चाहिए”
उद्यमियों ने यह भी मांग रखी कि— वर्तमान में सरकारी विभागों द्वारा उद्योगों में निरीक्षण किए जा रहे हैं
इन्हें कम से कम दो माह के लिए रोका जाए
ताकि उद्योगपति नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल सकें
उनका मानना है कि अचानक बढ़े आर्थिक दबाव के बीच लगातार निरीक्षण से स्थिति और जटिल हो रही है।
“कई संगठनों के प्रतिनिधि हुए शामिल”
इस संयुक्त प्रेस वार्ता में कई औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें—सरबजीत सिंह, जे. एस. राणा, अमित शर्मा, संजीव शर्मा, पुष्पेंद्र तिवारी, डॉ. खुशबू, संजय बत्रा साहिल सहित 40 से अधिक उद्यमियों ने अपनी बात खुलकर रखी।
संतुलन ही समाधान, संवाद जरूरी”
ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में उभरती यह स्थिति साफ संकेत देती है कि विकास और संतुलन के बीच तालमेल बनाना बेहद जरूरी है।।जहां एक ओर श्रमिकों के हितों की रक्षा आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों की स्थिरता और विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि दोनों पक्षों के बीच संतुलन और संवाद कायम नहीं हुआ, तो इसका असर पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम पर पड़ सकता है।



