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Galgotia University News : “EV क्रांति की रफ्तार अब क्लासरूम से लैब तक!”, गलगोटियास यूनिवर्सिटी और L&T Edutech ने लॉन्च किया देश का पहला एडवांस्ड ईवी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, अब छात्र बनेंगे फ्यूचर मोबिलिटी के सुपर इंजीनियर!, CEO डॉ. ध्रुव गलगोटिया का विजन—भविष्य के इंजीनियर तैयार करना

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश में तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति के बीच शिक्षा जगत से एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटियास विश्वविद्यालय ने Larsen & Toubro Edutech के सहयोग से भारत का पहला “फर्स्ट-ऑफ-इट्स-काइंड” एडवांस्ड इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेंटर ऑफ एक्सीलेंस लॉन्च कर दिया है। यह कदम न केवल तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देगा, बल्कि भारत को सस्टेनेबल मोबिलिटी की वैश्विक दौड़ में भी मजबूत बनाएगा।
यह सेंटर छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई से बाहर निकालकर उन्हें रियल-टाइम इंडस्ट्री स्किल्स और प्रैक्टिकल अनुभव से लैस करेगा, जिससे वे आने वाले समय के “EV इनोवेटर्स” बन सकें।


क्लासरूम से बाहर, अब रियल वर्ल्ड टेक्नोलॉजी का अनुभव
यह एडवांस्ड EV सेंटर ऑफ एक्सीलेंस केवल एक लैब नहीं, बल्कि एक संपूर्ण “टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम” के रूप में विकसित किया गया है। यहां छात्रों को टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की नेक्स्ट-जनरेशन टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका मिलेगा।
इस सेंटर में छात्र EV आर्किटेक्चर, पावरट्रेन सिस्टम्स, बैटरी टेक्नोलॉजी, डायग्नोस्टिक्स और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को न सिर्फ समझेंगे, बल्कि उन पर काम भी करेंगे।
हाइब्रिड लर्निंग मॉडल के तहत इस सेंटर में डिजिटल मॉड्यूल्स, प्रैक्टिकल लैब्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की ट्रेनिंग को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे छात्रों की स्किल्स सीधे इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप विकसित होंगी।

EV सेक्टर में करियर का गोल्डन गेटवे बनेगा यह सेंटर
आज के समय में EV सेक्टर केवल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा, पर्यावरण, टेक्नोलॉजी और लॉजिस्टिक्स जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है।
इस सेंटर के माध्यम से छात्र बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम्स (BMS), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एम्बेडेड सिस्टम्स, मोबिलिटी सॉफ्टवेयर और व्हीकल डायग्नोस्टिक्स जैसे हाई-डिमांड क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे।
इससे छात्रों को न केवल बेहतर जॉब अवसर मिलेंगे, बल्कि वे स्टार्टअप्स और इनोवेशन के जरिए खुद भी रोजगार सृजक बन सकते हैं।


भारत की क्लीन मोबिलिटी मिशन को मिलेगा बड़ा बूस्ट
वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और भारत भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार द्वारा क्लीन एनर्जी और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
ऐसे में गलगोटियास विश्वविद्यालय और Larsen & Toubro Edutech का यह सहयोग देश में कुशल EV इंजीनियरों की कमी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह पहल भारत को “ग्रीन मोबिलिटी हब” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

CEO डॉ. ध्रुव गलगोटिया का विजन—भविष्य के इंजीनियर तैयार करना
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ना हमारे समय का सबसे बड़ा तकनीकी परिवर्तन है।
उन्होंने कहा कि यह सेंटर छात्रों को इंडस्ट्री-ग्रेड प्लेटफॉर्म पर सीखने का अवसर देगा, जिससे वे केवल डिग्री होल्डर नहीं, बल्कि स्किल्ड और इंडस्ट्री-रेडी प्रोफेशनल बनकर निकलेंगे।
उनका मानना है कि आने वाले समय में EV टेक्नोलॉजी में दक्षता ही इंजीनियरिंग करियर की सबसे बड़ी पहचान होगी।


इंडस्ट्री और एजुकेशन का परफेक्ट संगम
Larsen & Toubro Edutech के रीजनल लीड आशीष मिश्रा ने कहा कि उभरती तकनीकों के लिए इंडस्ट्री और अकादमिक सहयोग बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इस सेंटर के माध्यम से छात्रों को वास्तविक इंडस्ट्री वातावरण में काम करने का अनुभव मिलेगा, जिससे वे जॉब मार्केट में तुरंत योगदान देने के लिए तैयार होंगे।
यह पहल “लर्निंग टू अर्निंग” की दिशा में एक मजबूत कदम है।

फैकल्टी और छात्रों दोनों के लिए अवसर
यह सेंटर केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी नई संभावनाएं लेकर आया है।
यहां फैकल्टी ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन प्रोग्राम्स, इंडस्ट्री वर्कशॉप्स और एडवांस्ड टेक्निकल मॉड्यूल्स आयोजित किए जाएंगे। इससे शिक्षकों की भी स्किल्स अपडेट होंगी और वे छात्रों को बेहतर तरीके से गाइड कर पाएंगे।
इस प्रकार यह सेंटर “लाइफ लॉन्ग लर्निंग” की अवधारणा को भी मजबूत करेगा।


इंटरडिसिप्लिनरी लर्निंग से बनेगा फ्यूचर रेडी टैलेंट
इस सेंटर की खास बात यह है कि इसमें केवल एक ही ब्रांच के छात्र नहीं, बल्कि मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर साइंस जैसे विभिन्न क्षेत्रों के छात्र एक साथ सीख सकेंगे।
इससे इंटरडिसिप्लिनरी इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और छात्र जटिल समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी तरीके से कर सकेंगे।
यह मॉडल भविष्य के इंजीनियरिंग एजुकेशन का नया ट्रेंड साबित हो सकता है।

Experience Based Learning” की ओर बड़ा कदम
गलगोटियास यूनिवर्सिटी का यह कदम इस बात का प्रमाण है कि अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अनुभव आधारित सीखने की ओर तेजी से बढ़ रही है।
यह सेंटर छात्रों को “थ्योरी से प्रैक्टिकल” और “क्लासरूम से करियर” तक की यात्रा को आसान बनाएगा।


EV भविष्य की राह, और गलगोटियास बना उसका केंद्र
कुल मिलाकर, यह एडवांस्ड EV सेंटर ऑफ एक्सीलेंस न केवल एक शैक्षणिक पहल है, बल्कि यह भारत के तकनीकी और औद्योगिक भविष्य की नींव रखने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह पहल छात्रों को नई दिशा, नई सोच और नए अवसर प्रदान करेगी, जिससे वे न केवल देश बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकेंगे।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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