Galgotia News : गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने बढ़ाया भारत–रूस शैक्षणिक सहयोग का सेतु, इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में बनी कूटनीतिक शिक्षा संवाद की धुरी, अंतरराष्ट्रीय मंच पर नोएडा की चमक, गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने निभाई केंद्रीय भूमिका, डॉ. ध्रुव गलगोटिया बोले – “शिक्षा है वैश्विक सहयोग की सबसे सशक्त भाषा”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में इस बार न केवल व्यापार और उद्योग बल्कि शिक्षा की दुनिया ने भी नई दिशा पाई। इसी क्रम में गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने भारत–रूस शैक्षणिक सहयोग को नई ऊंचाई देने में अग्रणी भूमिका निभाई।
विश्वविद्यालय के सीईओ डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने प्रतिष्ठित इंडिया–रूस राउंडटेबल में भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और दो देशों के बीच अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ाने के लिए ठोस रणनीतियों पर बल दिया।
इंडिया–रूस राउंडटेबल: शिक्षा, व्यापार और कूटनीति का संगम
यह राउंडटेबल यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें भारत और रूस के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ, नीति निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के नेता शामिल हुए।
इस संवाद का मुख्य उद्देश्य था – द्विपक्षीय शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना, जिससे दोनों देशों के बीच नवाचार-आधारित आर्थिक विकास और भविष्य-तैयार कार्यबल का निर्माण हो सके।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा, अनुसंधान और कौशल साझेदारी ही वे आधार हैं जिन पर भारत और रूस के दीर्घकालिक संबंध और आर्थिक प्रगति खड़ी है।
डॉ. ध्रुव गलगोटिया बोले – “शिक्षा है वैश्विक सहयोग की सबसे सशक्त भाषा”
इस अवसर पर डॉ. ध्रुव गलगोटिया, सीईओ, गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने कहा “शिक्षा हमेशा वैश्विक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक सशक्त माध्यम रही है। भारत–रूस अकादमिक संबंधों को मजबूत करना न केवल छात्र आदान-प्रदान और अनुसंधान साझेदारी के नए द्वार खोलेगा, बल्कि नवाचार-संचालित शिक्षा के नए मॉडल को भी जन्म देगा।”
उन्होंने कहा कि गलगोटियास यूनिवर्सिटी ऐसे हर प्रयास में विश्वास रखती है जो ज्ञान-साझेदारी और सीमा-पार सहयोग को बढ़ावा दे “ऐसे मंच दोनों देशों के लिए परस्पर विकास और साझा प्रगति की दिशा में ठोस कदम साबित होते हैं,” उन्होंने जोड़ा।
अनुसंधान और नवाचार में साझेदारी – भारत–रूस शिक्षा सहयोग का नया अध्याय
राउंडटेबल चर्चा के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत–रूस साझेदारी कई नए अवसर पैदा करेगी।
इंजीनियरिंग, एआई, साइबर सिक्योरिटी, एग्रीटेक, और क्लीन एनर्जी जैसे विषयों में संयुक्त रिसर्च प्रोग्राम, फैकल्टी एक्सचेंज, और इनोवेशन हब्स पर काम किया जाएगा।
गलगोटियास यूनिवर्सिटी, जो पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 200+ संस्थानों से जुड़ी है, इस सहयोग को धरातल पर उतारने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
गलगोटियास का विज़न – “लोकल से ग्लोबल तक शिक्षा में भारत की पहचान”
गलगोटियास यूनिवर्सिटी का लक्ष्य है भारत को “ग्लोबल एजुकेशन हब” बनाना।
विश्वविद्यालय के शैक्षणिक मॉडल में नवाचार, कौशल और शोध पर विशेष फोकस है। इसी विज़न को आगे बढ़ाते हुए विश्वविद्यालय भारत की शिक्षा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ रहा है, ताकि छात्र न केवल अकादमिक रूप से बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी सक्षम बन सकें।
इस पहल से भारत के छात्रों को रूस की तकनीकी और शोध विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा, जबकि रूसी छात्रों को भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति और अकादमिक परंपराओं से सीखने का अवसर प्राप्त होगा।
शिक्षा के माध्यम से बनेगा “फ्यूचर-रेडी” वर्कफोर्स
राउंडटेबल में यह बात बार-बार दोहराई गई कि वैश्विक चुनौतियों जैसे एआई, क्लाइमेट चेंज, और टेक्नोलॉजिकल ट्रांजिशन का समाधान केवल शिक्षा के ज़रिए ही संभव है।
डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने कहा,
> “आज का विद्यार्थी केवल डिग्री नहीं चाहता, बल्कि उसे कौशल और वैश्विक समझ की आवश्यकता है। भारत और रूस का यह सहयोग आने वाली पीढ़ी को न केवल रोजगार बल्कि उद्यमिता की दिशा में भी सशक्त करेगा।”
कूटनीति में शिक्षा की नई भूमिका – गलगोटियास बना पुल
भारत–रूस संबंध दशकों से सामरिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक स्तर पर मज़बूत रहे हैं, लेकिन अब इन रिश्तों में शिक्षा एक नई कड़ी के रूप में उभर रही है।
गलगोटियास यूनिवर्सिटी इस पुल का हिस्सा बनकर भारत की “सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी” को और सशक्त बना रही है।
नोएडा जैसे शिक्षा-हब शहर में इस तरह का अंतरराष्ट्रीय संवाद होना इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल ज्ञान का उपभोक्ता नहीं बल्कि “ज्ञान का निर्यातक” बन चुका है।
गलगोटियास की पहल – “ज्ञान, नवाचार और मानवता का संगम”
विश्वविद्यालय के इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में भागीदारी उसके उस सिद्धांत को और मजबूत करती है, जिसके तहत शिक्षा केवल करियर का माध्यम नहीं बल्कि वैश्विक नागरिकता का आधार है।
गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने हमेशा अपने छात्रों को “थिंक ग्लोबल, एक्ट लोकल” की सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
गलगोटियास ने शिक्षा के जरिए लिखा भारत–रूस मित्रता का नया अध्याय
इस राउंडटेबल में गलगोटियास यूनिवर्सिटी की उपस्थिति ने न सिर्फ नोएडा को गर्व का क्षण दिया बल्कि भारत की शिक्षा कूटनीति में एक नया पन्ना जोड़ दिया।
यह सहयोग आने वाले वर्षों में इनोवेशन, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट के नए आयाम खोलेगा, जिससे भारत–रूस संबंध और मज़बूत होंगे।
सोशल मीडिया पर चर्चा में गलगोटियास – “#IndiaRussiaEducation” हुआ ट्रेंड
जैसे ही ट्रेड शो से गलगोटियास यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधित्व की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आईं, ट्विटर (X) और लिंक्डइन पर #IndiaRussiaEducation, #GalgotiasUniversity, और #GlobalLearning जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
लोगों ने विश्वविद्यालय की इस पहल को भारत की “शिक्षा की वैश्विक उड़ान” बताया।



