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Greater Noida West Society News : 3 करोड़ के बकाया बनाम बुनियादी सुविधाएं!, इस सोसायटी में बिल्डर-निवासी टकराव, बिजली कटते ही हजारों परिवार बेहाल, बिल्‍डर की गजब गुंडई, बिजली कटी, लिफ्ट ठप, पानी को लेकर हाहाकार, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में मामला लंबित

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे । ग्रेटर नोएडा वेस्ट की चर्चित इरोस संपूर्णम सोसायटी इन दिनों अभूतपूर्व संकट से जूझ रही है। एक ओर बिल्डर द्वारा करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक मेंटेनेंस बकाया का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों परिवारों का आरोप है कि उन्हें वर्षों से खराब सुविधाएं, अधूरा निर्माण और असुरक्षित ढांचा झेलना पड़ रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि 16 जनवरी से पूरी सोसायटी की बिजली काट दी गई, साथ ही अन्य मूलभूत सुविधाएं भी बंद कर दी गईं, जिससे सोसायटी में हाहाकार मच गया है। सेकेट्री सरिता तिवारी लगातार इस प्रकरण को क्षेत्रीय सांसद , ऑथोरिटी और जिलाधिकारी के समझ उठाती आ रही है। कल से भी लगातार प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों से इस बाबत बात कर रही हैं।


बिजली कटी, लिफ्ट ठप, पानी को लेकर हाहाकार
बिल्डर की ओर से अचानक बिजली और मेंटेनेंस सेवाएं बंद किए जाने से इरोस संपूर्णम में रहने वाले हजारों परिवारों की दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गई है। ऊंची-ऊंची इमारतों में रहने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लिफ्ट बंद होने से लोगों को कई-कई मंजिल पैदल चढ़ना पड़ रहा है। वहीं, पानी की आपूर्ति बाधित होने से हालात और भी बदतर हो गए हैं।
सोसायटी के कई निवासियों का कहना है कि इस तरह से सामूहिक सजा देना पूरी तरह गैरकानूनी और अमानवीय है।


ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में मामला लंबित
सोसायटी के निवासियों और AOA (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) के अध्यक्ष दीपांकर कुमार ने बताया कि यह पूरा विवाद पहले से ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है और इस पर सुनवाई चल रही है।
दीपांकर कुमार का आरोप है कि जब मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर लंबित है, तब बिल्डर द्वारा एकतरफा तरीके से सेवाएं बंद करना कानून का खुला उल्लंघन है।

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इस सोसायटी में बिल्डर-निवासी टकराव, बिजली कटते ही हजारों परिवार बेहाल

सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां”
AOA अध्यक्ष ने सोसायटी में मौजूद गंभीर खामियों की ओर भी इशारा किया। उनके अनुसार—
कई टावरों की बाहरी दीवारें क्षतिग्रस्त हैं
छज्जे गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं
नई निर्माणाधीन इमारतों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया
फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल हैं
उन्होंने आरोप लगाया कि बिल्डर न तो तकनीकी रिपोर्ट देता है और न ही कानूनी दस्तावेज, लेकिन इसके बावजूद मनमाने तरीके से मेंटेनेंस बढ़ाने का दबाव बना रहा है।


भरोसे के नाम पर खरीदा था घर, अब पछता रहे हैं”
सोसायटी निवासी जगजीवन राम ने कहा कि इरोस ग्रुप का नाम कभी भरोसे का प्रतीक था। इसी विश्वास के साथ लोगों ने यहां अपने जीवन की पूंजी लगाकर फ्लैट खरीदे। लेकिन समय बीतने के साथ सुविधाएं बद से बदतर होती चली गईं।
उनका कहना है कि कई लोग आज भी समय पर मेंटेनेंस शुल्क देते रहे, लेकिन बदले में न तो बेहतर सुविधाएं मिलीं और न ही समस्याओं का समाधान। ऐसे में लोगों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है।

लिफ्ट, पानी और सुरक्षा पर सवाल
निवासी राघवेंद्र सिंह ने बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब चाहें नोटिस चिपका दिए जाते हैं और सेवाएं बंद करने की धमकी दी जाती है। उन्होंने बताया—
लिफ्ट की बिजली बार-बार काटी जाती है
पानी की सप्लाई अनियमित रहती है
सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है
उन्होंने क्लब हाउस विवाद को भी उजागर किया। रजिस्ट्री दस्तावेजों में जिस भवन को कम्युनिटी सेंटर बताया गया है, उसे बिल्डर क्लब हाउस बताकर डेढ़ लाख रुपये की मेंबरशिप फीस वसूलने का दबाव बना रहा है।


8 साल में नहीं हुई ठोस मरम्मत

स्थानीय निवासी अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि वे पिछले आठ वर्षों से सोसायटी में रह रहे हैं, लेकिन इस दौरान कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं किया गया। सीलन और लीकेज की वजह से घर का फर्नीचर और अलमारियां खराब हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने मेंटेनेंस भुगतान को लेकर आपत्ति जताई।


बिल्डर का पक्ष: “AOA खुद डिफॉल्टर”
वहीं, बिल्डर पक्ष से इरोस ग्रुप से जुड़े अलकशेंद्र सिंह ने सभी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि—
वर्ष 2017 में मेंटेनेंस ₹1.95 प्रति वर्गफुट तय किया गया था
इसमें 8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का प्रावधान था
शुरुआती तीन वर्षों और कोविड काल में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई
उनके अनुसार, वर्तमान में सोसायटी पर 3 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है और कई AOA पदाधिकारी खुद डिफॉल्टर हैं, जो अन्य निवासियों को भी भुगतान न करने के लिए उकसा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसी कारण 16 जनवरी से सेवाएं बंद करने का निर्णय लिया गया।

हजारों परिवार प्रशासन की ओर देख रहे
फिलहाल, इरोस संपूर्णम सोसायटी के हजारों परिवार प्रशासन और अथॉरिटी की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या बकाया के नाम पर किसी पूरी सोसायटी की बिजली काट देना जायज है? क्या बिल्डर को यह अधिकार है कि वह अदालत और अथॉरिटी में मामला लंबित होने के बावजूद ऐसा कठोर कदम उठाए?
अब यह देखना अहम होगा कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और जिला प्रशासन इस गंभीर विवाद में कितनी तेजी से हस्तक्षेप करता है और क्या हजारों परिवारों को राहत मिल पाती है या नहीं।

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Raftar Today
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