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Sharda University News : "तथ्य को सुनना और समझना ही बनाता है सच्चा न्यायविद!", सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने शारदा विश्वविद्यालय में दी छात्रों को प्रेरणादायक सीख, मूट कोर्ट का किया उद्घाटन


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
शारदा विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लॉ में आयोजित “श्री आनंद स्वरुप गुप्ता मेमोरियल लॉ लेक्चर सीरीज” के प्रथम संस्करण में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने अत्याधुनिक मूट कोर्ट हॉल का उद्घाटन किया और छात्रों को न्यायशास्त्र की बारीकियों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी।


“सुनो, सोचो और विश्लेषण करो – यही सफलता की कुंजी है”

अपने विशेष संबोधन में जस्टिस बिंदल ने कहा:

“एक सफल वकील या न्यायाधीश वही बन सकता है, जो हर तथ्य को ध्यान से सुनता और समझता है।”

उन्होंने छात्रों को न केवल कानूनी किताबों में गहराई से पढ़ाई करने, बल्कि तार्किक विश्लेषण, सुनने की सतर्कता और सोचने की स्पष्टता विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायशास्त्र केवल बहस का नहीं, बल्कि सहनशीलता, सूझबूझ और संवेदनशीलता का भी विज्ञान है।


डिजिटल युग में ध्यान की चुनौती और AI का विवेकपूर्ण प्रयोग

जस्टिस बिंदल ने आधुनिक छात्रों में एकाग्रता के अभाव और डिजिटल विकर्षणों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा:

“डिजिटल संसाधनों का प्रयोग करें, लेकिन उनकी गिरफ्त में न आएं।”

इसके साथ ही उन्होंने Artificial Intelligence (AI) के बढ़ते उपयोग को लेकर चेताया कि AI, कानूनी फैसलों में मानवीय निर्णय की जगह नहीं ले सकता। यह एक सहायक उपकरण है, विकल्प नहीं। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में नैतिकता, न्याय भावना और विवेक सर्वोपरि हैं।


मूट कोर्ट का उद्घाटन – शारदा यूनिवर्सिटी को मिला अनोखा उपहार

जस्टिस बिंदल ने स्कूल ऑफ लॉ में बने नए मूट कोर्ट हॉल का उद्घाटन करते हुए इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा:

“इस स्तर की सुविधा और संरचना मैंने भारत के किसी अन्य विश्वविद्यालय में नहीं देखी। यह छात्रों को व्यवहारिक प्रशिक्षण का सशक्त मंच देगा।”


“आप सिर्फ वकील नहीं, राष्ट्र के प्रहरी हो” – चांसलर पी.के. गुप्ता

विश्वविद्यालय के चांसलर पी.के. गुप्ता ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा:

“आप केवल कानून के छात्र नहीं, राष्ट्र की आत्मा के रक्षक हो। वकीलों ने भारत की आज़ादी में अग्रणी भूमिका निभाई है और यह जिम्मेदारी आज भी बरकरार है।”

उन्होंने तुलनात्मक विधि अध्ययन को वैश्विक दृष्टिकोण का माध्यम बताते हुए कहा कि इस तरह के मंच छात्रों की व्यावसायिक और बौद्धिक क्षमताओं को निखारते हैं।


शिक्षा, नीति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर न्यायविद की सोच

जस्टिस बिंदल ने “ब्रेन ड्रेन” की समस्या पर बात करते हुए कहा कि भारत में ऐसा शैक्षणिक ढांचा विकसित किया जाए जो न केवल प्रतिभाओं को देश में रोके, बल्कि विदेशी छात्रों को भारत की ओर आकर्षित करे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि राष्ट्र की नींव है और छात्र शिक्षा नीतियों को समझते हुए अपने भविष्य को सक्रिय रूप से आकार दें।


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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल ने शारदा विश्वविद्यालय में दी छात्रों को प्रेरणादायक सीख

मौजूद रहे अनेक प्रमुख शख्सियतें

इस कार्यक्रम में शारदा विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद रहे:

  • प्रो चांसलर वाइ.के. गुप्ता
  • वाइस चांसलर सिबाराम खारा
  • प्रो वाइस चांसलर डॉ. परमानंद
  • डीन, स्कूल ऑफ लॉ डॉ. ऋषिकेश दवे
  • डीन रिसर्च डॉ. भुवनेश कुमार
  • अन्य विभागों के डीन, एचओडी व संकाय सदस्य

छात्रों से संवाद और प्रश्नोत्तर

कार्यक्रम के अंत में छात्रों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए जस्टिस बिंदल ने न्यायपालिका में करियर निर्माण, संवैधानिक जिम्मेदारियों और कानून की बदलती परिभाषाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि:

“न्याय के क्षेत्र में आने का अर्थ है, खुद को आजीवन सीखने और समाज के प्रति उत्तरदायी बनाने की तैयारी।”


कार्यक्रम की झलकियाँ:

  • मूट कोर्ट हॉल का उद्घाटन
  • न्यायविदों के साथ छात्रों की संवाद श्रृंखला
  • लॉ फैकल्टी और नीति निर्माताओं की सहभागिता
  • छात्रों में दिखा उत्साह और प्रेरणा की लहर

निष्कर्ष:

शारदा विश्वविद्यालय में आयोजित श्री आनंद स्वरुप गुप्ता मेमोरियल लॉ लेक्चर सीरीज के प्रथम आयोजन ने साबित कर दिया कि कानून की पढ़ाई केवल सिलेबस नहीं, बल्कि सोच, समझ और समाज के प्रति संवेदना का विषय है। जस्टिस राजेश बिंदल के विचारों ने छात्रों को कानून के गहरे और मानवीय पक्ष को देखने का नया दृष्टिकोण दिया।


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