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Golf Vista Society News : गोल्फ विस्टा सोसायटी में ‘सीएओस’ का तांडव, अध्यक्ष ने लगाया ₹20 लाख रंगदारी और दस्तावेज़ चोरी का गंभीर आरोप, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR, प्रबंधन समिति में घमासान से सहमे निवासी, गोल्फ विस्टा सोसायटी में ‘प्रबंधन’ बनाम ‘सदस्य’ की जंग, ग्रेटर नोएडा में मचा हड़कंप, 31 अगस्त की शाम का विवाद

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।। ग्रेटर नोएडा के प्रतिष्ठित आवासीय इलाके अल्फा-2 स्थित गोल्फ विस्टा सोसायटी में इन दिनों माहौल बेहद गर्म है। यहां प्रबंधन समिति और कुछ निवासियों के बीच विवाद अब कोर्ट और पुलिस तक पहुंच चुका है। सोसायटी के अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने समिति के छह सदस्यों पर रंगदारी, दस्तावेज़ चोरी और छवि धूमिल करने का गंभीर आरोप लगाया है।

मामला इतना बढ़ गया कि कोर्ट के आदेश पर कोतवाली कासना पुलिस ने इस विवाद को लेकर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोसायटी की चमक-दमक के बीच छिपी यह अंदरूनी राजनीति अब सबके सामने आ गई है।

फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप बना कर फैलाया गया भ्रम! अध्यक्ष बोले – “मेरे खिलाफ चल रही थी साजिश”

अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ सदस्यों ने मिलकर एक फर्जी WhatsApp ग्रुप बनाया, जिसमें समिति के खिलाफ झूठे संदेश और भ्रामक सूचनाएं फैलाई जा रही थीं। उनका कहना है कि यह सब सुनियोजित तरीके से उनकी छवि को खराब करने और समिति को बदनाम करने के लिए किया गया।

उन्होंने कहा कि जिन छह लोगों पर आरोप लगाया गया है, उनमें चंद्रमान कटारिया, शैली इटामन, अनिल भाटिया, कमल कक्कड़, केपी गुप्ता और दो अज्ञात व्यक्ति शामिल हैं। इन सभी ने कथित रूप से सोसायटी के ऑफिस में घुसकर जरूरी दस्तावेज़ों को जबरन ले लिया और बाद में उनमें छेड़छाड़ कर समिति के कार्यों पर संदेह पैदा किया।

पुराने रिकॉर्ड में भी ‘हेरा-फेरी’ के आरोप, मैनेजर को धमकाने की बात सामने आई

अध्यक्ष ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब सोसायटी के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई हो। 2008 से 2012 के बीच भी गबन और रिकॉर्ड छुपाने की शिकायतें दी गई थीं, जिनमें शैली इटामन और अनिल भाटिया के नाम शामिल थे।

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान विवाद में भी उन्हीं लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई है और सोसायटी के मैनेजर को धमकाकर पुराने कागजात गायब कराए गए हैं। अध्यक्ष ने कहा कि यदि पुलिस गहराई से जांच करे तो सोसायटी के खातों और कागजातों में बड़े घोटाले सामने आ सकते हैं।

31 अगस्त की शाम का विवाद – मांगी ₹20 लाख की रंगदारी, जान से मारने की धमकी

अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह के अनुसार, 31 अगस्त 2025 की शाम वे सोसायटी के बाहर टहल रहे थे, तभी आरोपितों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने उनसे ₹20 लाख की रंगदारी की मांग की और इनकार करने पर जान से मारने की धमकी दी।

बिजेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने किसी तरह मौके से भागकर अपनी जान बचाई और तुरंत पुलिस को सूचना दी। उनका आरोप है कि यह पूरा मामला सिर्फ उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने और प्रबंधन पर कब्जा जमाने की साजिश है।

पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर दर्ज की FIR, शुरू हुई विस्तृत जांच

कोतवाली प्रभारी ने पुष्टि की कि कोर्ट के आदेश पर यह मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा “हमें जो शिकायत मिली है, उसमें गंभीर आरोप हैं। हमने जांच शुरू कर दी है। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।”

सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने अब तक सोसायटी के रिकॉर्ड रूम, सिक्योरिटी ऑफिस और क्लब हाउस के कुछ कैमरों की फुटेज भी कब्जे में ली है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।

निवासियों में हड़कंप – “विकास कार्य ठप, माहौल खराब”

गोल्फ विस्टा सोसायटी के निवासी इस पूरे विवाद से बेहद परेशान हैं। लोगों का कहना है कि अब सोसायटी का माहौल ‘आदर्श आवासीय क्षेत्र’ से ज्यादा एक “राजनीतिक अखाड़ा” बनता जा रहा है।

एक निवासी ने बताया कि “हर मीटिंग में अब बहस, आरोप-प्रत्यारोप और गाली-गलौज होती है। बच्चों के खेलने का मैदान और पार्कों का रखरखाव भी रुका हुआ है। बिजली-पानी के मुद्दे पीछे छूट गए हैं, अब बस राजनीति बची है।”

अध्यक्ष बोले – “मेरे पास सारे सबूत हैं, झूठ बोलने वालों को जवाब मिलेगा”

अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने किसी भी स्तर पर कोई गलत कार्य नहीं किया है।“मेरे पास हर वित्तीय रिकॉर्ड, रसीद और साक्ष्य मौजूद हैं। ये सब झूठे आरोप हैं जो मेरी छवि बिगाड़ने के लिए लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में सब कुछ सामने आ जाएगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि वह जल्द ही अपने बचाव में सभी दस्तावेज़ और प्रमाण सार्वजनिक करेंगे ताकि सच्चाई जनता और निवासियों के सामने आए।

नागरिक संगठनों की अपील – “पारदर्शिता ही सोसायटी प्रबंधन की पहचान बने”

इस विवाद के बाद ग्रेटर नोएडा की कई आरडब्ल्यूए और नागरिक संस्थाओं ने भी बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि सोसायटियों में पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रबंधन प्रणाली को बढ़ावा देना ज़रूरी है।

“सोसायटी किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी है,” ऐसा कहते हुए नोएडा रेजिडेंट्स फेडरेशन ने जिला प्रशासन से अपील की कि वह इस मामले में मध्यस्थता कर विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाए।

अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और कोर्ट के फैसले पर

फिलहाल ग्रेटर नोएडा पुलिस मामले की हर बारीकी से जांच कर रही है। दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है ताकि पता चल सके कि रिकॉर्ड्स में वाकई छेड़छाड़ हुई या नहीं।

सोसायटी के निवासियों की नजर अब कोर्ट और पुलिस जांच के नतीजों पर टिकी हुई है। हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि जल्द सच सामने आए और गोल्फ विस्टा सोसायटी में शांति लौटे।

अंत में… “सपनों के घर” में मतभेद की दीवारें ऊंची हो गईं!

कभी अपने आधुनिक ढांचे और शांत वातावरण के लिए जानी जाने वाली गोल्फ विस्टा सोसायटी अब विवादों की गहराई में जा चुकी है। यहां अब चर्चा “ग्रीन बेल्ट” या “क्लब हाउस” की नहीं, बल्कि एफआईआर, रंगदारी और गबन के आरोपों की हो रही है।

ग्रेटर नोएडा की इस चर्चित सोसायटी में जो भी नतीजा निकले, एक बात तय है — अब हर निवासी चाहता है कि यह जंग खत्म हो और सोसायटी फिर से अपने नाम के अनुरूप “विस्टा ऑफ पीस” बने।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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