ब्रेकिंग न्यूज़पुलिसप्रशासनशिक्षा

Breaking News : ग्रेटर नोएडा की इस यूनिवर्सिटी फिर घिरी विवादों में, बीटेक छात्र शिवम डे की आत्महत्या से उठे सवाल, क्या शिक्षा मंदिर बने दबाव का अड्डा?,सुसाइड नोट खुद को ठहराया जिम्मेदार, फीस लौटाने की रखी गुज़ारिश


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। महज कुछ महीनों पहले ही बीडीएस की छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या का मामला सामने आया था, और अब यूनिवर्सिटी के एक और छात्र शिवम डे ने निजी हॉस्टल में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना ने न केवल यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर क्यों हमारे विश्वविद्यालय शिक्षा देने के साथ-साथ छात्रों की मानसिक स्थिति और उनके जीवन के प्रति इतनी संवेदनहीनता बरतते हैं?


शिवम डे कौन था और क्यों कर गया इतना बड़ा कदम?

मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला शिवम डे, शारदा यूनिवर्सिटी से बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह पिछले डेढ़ साल से कक्षाओं में नहीं जा रहा था। न तो परिवार को इसकी भनक लगी और न ही यूनिवर्सिटी ने इस पर गंभीरता दिखाई। शिवम एक निजी हॉस्टल में रहता था और वहीं उसने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।

उसके इस कदम ने परिवार, सहपाठियों और स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार का कहना है कि अगर यूनिवर्सिटी प्रशासन समय रहते उन्हें सूचित करता तो शायद स्थिति कुछ और होती।


सुसाइड नोट: खुद को ठहराया जिम्मेदार, फीस लौटाने की रखी गुज़ारिश

शिवम ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट लिखा। उसमें उसने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराते हुए कहा कि इस घटना के लिए केवल वह खुद जिम्मेदार है। हालांकि, उसने यूनिवर्सिटी प्रबंधन से अनुरोध किया कि उसकी जमा की गई फीस परिवार को लौटा दी जाए।

यह नोट भले ही एक साधारण पंक्ति हो, लेकिन इसमें छिपे दर्द और असहायता को समझना कठिन नहीं है।


परिवार का गुस्सा और सवाल

शिवम के पिता का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कभी यह सूचना नहीं दी कि उनका बेटा कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो रहा। उल्टा, फीस समय पर जमा कराई जाती रही और प्रबंधन ने इसे स्वीकार भी किया। उनका आरोप है कि यूनिवर्सिटी केवल फीस वसूलने में लगी रहती है और छात्रों के भविष्य व मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं देती।

परिवार का यह भी कहना है कि अगर समय रहते उन्हें चेताया गया होता तो वे बेटे को संभाल सकते थे। अब वे अपने इकलौते बेटे को खोकर सवाल कर रहे हैं कि आखिर यूनिवर्सिटी की निगरानी व्यवस्था इतनी ढीली क्यों है?


यूनिवर्सिटी प्रशासन की सफाई

वहीं, शारदा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (पीआर) अजीत कुमार का कहना है कि छात्र के कॉलेज न आने की सूचना ईमेल के माध्यम से परिवार को दी गई थी। उनका दावा है कि परिवार से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस नहीं मांगी गई थी।

उन्होंने बताया कि छात्र के खाते में जमा की गई करीब दो लाख रुपये की अतिरिक्त राशि अगले एक-दो दिनों में परिवार को लौटा दी जाएगी।

हालांकि, परिवार का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई जानकारी ईमेल के माध्यम से नहीं मिली थी। अब सवाल यह है कि क्या वाकई यूनिवर्सिटी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई या यह सिर्फ एक औपचारिक बयान है?


शिक्षा व्यवस्था और छात्रों का मानसिक दबाव

यह मामला केवल एक आत्महत्या का नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था किस दिशा में जा रही है। क्या विश्वविद्यालय केवल फीस वसूलने और डिग्री बांटने तक सीमित हो चुके हैं?

आज के दौर में प्रतियोगिता इतनी अधिक है कि छात्र लगातार दबाव में रहते हैं। हर साल देशभर में हजारों छात्र मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करते हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्रों की काउंसलिंग करे, उनकी समस्याओं को सुने और उन्हें सहारा दे।


ज्योति शर्मा केस की गूंज अभी भी ताज़ा

ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले शारदा यूनिवर्सिटी की बीडीएस छात्रा ज्योति शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। उस समय भी प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठे थे। लोगों ने पूछा था कि आखिर क्यों छात्रों की समस्याओं को समय रहते सुना नहीं जाता।

अब शिवम की आत्महत्या ने एक बार फिर उस घाव को हरा कर दिया है।


पुलिस जांच में जुटी, लेकिन…

फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जांच अधिकारी का कहना है कि सुसाइड नोट में किसी के खिलाफ प्रत्यक्ष आरोप नहीं है, लेकिन परिवार की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

फिर भी, बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच के बाद कोई ठोस बदलाव होगा? या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


समाज और सिस्टम पर बड़ा सवाल

शिवम डे का मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है, बल्कि यह समाज और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए चेतावनी है। आज जरूरत है कि हम शिक्षा को केवल नौकरी पाने का साधन न मानें, बल्कि इसे मानसिक विकास और सहनशक्ति का मंच भी बनाएं।

अगर हम समय रहते छात्रों के तनाव और परेशानियों को गंभीरता से नहीं लेंगे, तो न जाने कितने और शिवम और ज्योति हमें खोने पड़ेंगे।


हैशटैग्स

#ShardaUniversity #GreaterNoida #StudentSuicide #शिवम_डे #BTechStudent #नोएडा_समाचार #EducationSystem #UniversityManagement #StudentIssues #MentalHealthAwareness #SuicidePrevention #CampusNews #RaftarToday #BiharStudent #शारदा_विवाद #NoidaUpdates #YouthDepression #IndianEducationSystem #JusticeForStudents


🛑 Raftar Today व्हाट्सएप चैनल से जुड़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को टच करें।
Follow the Raftar Today channel on WhatsApp

Twitter (X): Raftar Today (@raftartoday)


रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button