Folk dance
- ग्रेटर नोएडा
Surajpur Barahi Mela News : “रागनियों की गूंज, नृत्य का रंग—बाराही मेला 2026 में लोक संस्कृति का शानदार संगम”, कालू इंदौर और राधा चौधरी एंड पार्टी ने सुरों से सजाया मंच
सूरजपुर, रफ़्तार टूडे । सूरजपुर में आयोजित ऐतिहासिक बाराही मेला 2026 के अंतर्गत हुई भव्य सांस्कृतिकसंध्या में लोक कला और संगीत का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मंच पर जब कालू इंदौर और राधा चौधरी एंडपार्टी के कलाकार उतरे, तो पूरा मेला प्रांगण सुरों, तालियों और उत्साह से गूंज उठा। ‘रूप बसंत’ से शुरू हुआ सुरों का जादू कार्यक्रम की शुरुआत कालू इंदौर और राधा चौधरी की जोड़ी ने ‘रूप बसंत’ के किस्से पर आधारित रागनी से की।उनकी दमदार आवाज, सधी हुई प्रस्तुति और भावपूर्ण संवाद शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर ऐसामाहौल बना कि हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज देर तक सुनाई देती रही और दर्शक पूरी तरह लोक संगीत केरंग में रंग गए। ‘रानी पद्मावती’ की रागनी ने बढ़ाया रोमांच इसके बाद कलाकारों ने ‘रानी पद्मावती’ के किस्से पर आधारित सवाल–जवाब शैली की रागनी प्रस्तुत की, जिसनेकार्यक्रम में रोमांच और उत्सुकता को और बढ़ा दिया। इस प्रस्तुति में लोक परंपरा, भावनात्मक गहराई और संवादशैली का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसे दर्शकों ने भरपूर सराहा। ‘बागडो–बागड़ी’ की चटकीली प्रस्तुति ने बिखेरा रंग राधा चौधरी ने ‘बागडो–बागड़ी’ की रागनी प्रस्तुत कर माहौल को और भी रंगीन बना दिया। हास्य और व्यंग्य सेभरपूर इस प्रस्तुति ने दर्शकों को खूब हंसाया और तालियों से पूरा पंडाल गूंज उठा। नृत्य प्रस्तुतियों ने बढ़ाया जोश कार्यक्रम में पायल चौधरी और छाया चौधरी ने अपने आकर्षक नृत्य से माहौल में नई ऊर्जा भर दी। उनके जीवंतप्रदर्शन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया और मेला प्रांगण उत्साह से भर गया। अतिथियों का हुआ सम्मान, संस्कृति पर दिया संदेश इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में नीरज सरपंच उपस्थित रहे, जिनका शिव मंदिर सेवा समिति द्वारामाल्यार्पण कर स्वागत किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने मेले के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए प्रकृति संरक्षण और पौधारोपण कासंदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि उनका संरक्षण करना भी उतना ही जरूरी है। इतिहास और आस्था से जुड़ा बाराही मेला शिव मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बाराही मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। मान्यता है कि यह स्थल प्राचीन काल में पुलस्त्य मुनि और विश्रवा ऋषिकी तपोभूमि रहा है। यह भी माना जाता है कि यहां स्थित पवित्र सरोवर में स्नान करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलतीहै, जिसके चलते दूर–दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। सोशल मीडिया टीम और कलाकारों ने भी बांधा समा कार्यक्रम में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर टीम के सदस्य गौरव बैसला और निशांत सहित अन्य कलाकारों ने भीअपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। साथ ही, सभी कलाकारों और सहयोगियों को शिव मंदिर सेवासमिति द्वारा सम्मानित किया गया। 12 अप्रैल को फिर सजेगा मंच मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने जानकारी दी कि 12 अप्रैल को मेले में संतराज नागर और कुमारी सुक्कू राजस्थानीएंड पार्टी के कलाकार अपनी रागनियों से समां बांधेंगे।…
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