Visvesvaraya College News : विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में सूफी धुनों और सांस्कृतिक रंगों के साथ नए सत्र का शुभारंभ, छात्रों ने पेश किया प्रतिभा का अनोखा संगम, चेयरमैन विजय कुमार जिंदल का संबोधन

दादरी (ग्रेटर नोएडा), रफ़्तार टुडे।
शिक्षा केवल पुस्तकों और क्लासरूम तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में संतुलित विकास का माध्यम है। इसी सोच को साकार करते हुए विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स (VGI) ने अपने नए शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और सूफी संगीत की मधुर लहरियों के साथ की।
कार्यक्रम का आयोजन संस्थान परिसर में बड़े उत्साह और गरिमामय माहौल में किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए करीब दो हजार छात्र-छात्राओं ने शिरकत की। यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा भी प्रदान की।
दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से हुआ आगाज़
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई। मुख्य अतिथि एसवीपी ग्रुप के चेयरमैन विजय कुमार जिंदल और पुलिस आयुक्त गौतम बुद्ध नगर के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अजीत कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर समारोह का शुभारंभ किया।
इसके बाद छात्रों द्वारा प्रस्तुत की गई गणेश वंदना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। वहीं, छात्रों के समूह नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
चेयरमैन विजय कुमार जिंदल का संबोधन
अपने संबोधन में विजय कुमार जिंदल ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करना ही नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और बौद्धिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करना है।
उन्होंने कहा –
“आज का समय बहुआयामी प्रतिभा का है। जो छात्र पढ़ाई के साथ वाद-विवाद, नृत्य, संगीत और खेलों में भी अपनी पहचान बनाते हैं, वही जीवन में आगे बढ़ते हैं।”
अनुशासन और कर्तव्य पर एसीपी अजीत कुमार सिंह का जोर
इस अवसर पर एसीपी अजीत कुमार सिंह ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में अनुशासन और जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संविधान में उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए छात्रों को याद दिलाया कि एक सजग नागरिक का निर्माण शिक्षा से ही संभव है।
उन्होंने कहा –
“अगर छात्र अपने कर्तव्यों को समझेंगे और उनका पालन करेंगे तो कानून और व्यवस्था का पालन करना सहज हो जाएगा। समाज में शांति और प्रगति तभी संभव है जब युवा पीढ़ी जिम्मेदार और अनुशासित बने।”
संस्थान का रोजगारोन्मुख शिक्षा पर फोकस
संस्थान की सीईओ डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने नए छात्रों का स्वागत करते हुए संस्थान की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि VGI छात्रों को इंडस्ट्री-रेडी बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।
गौरतलब है कि संस्थान ने टाटा IIS, सी-डैक, NSDC और टेक्नोब्रिज जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य छात्रों को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रदान करना है, जिससे उनका प्लेसमेंट आसान और सफल हो सके।

सूफी धुनों ने बांधा समां
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा सूफी संगीत का रंगारंग आयोजन। मध्यकालीन संस्कृति और भारतीय संगीत की गहराई को दर्शाती इन सूफी धुनों ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोकगीतों और क्षेत्रीय गीतों के साथ जब सूफी धुनों का संगम हुआ तो पूरा वातावरण भाव-विभोर और आत्मिक शांति से भर गया। छात्र-छात्राओं ने इस पल को जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
प्रबंधन की शुभकामनाएँ और धन्यवाद
संस्थान के सचिव सुनील जिंदल ने सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। वहीं, प्रशासनिक निदेशिका रतना वर्मा ने आयोजन की सफलता के लिए स्टाफ और छात्रों को धन्यवाद दिया।
संस्थान के एडवाइजर डॉ. एस. पी. पांडेय ने छात्रों को समय की महत्ता और नई टेक्नोलॉजी सीखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा –
“आज का युग टेक्नोलॉजी का है। जो छात्र समय के साथ खुद को अपडेट रखेंगे, वही सफलता की ऊँचाइयों को छुएंगे।”
प्रमुख अतिथि और प्राध्यापक रहे मौजूद
कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों और संस्थान के वरिष्ठ शिक्षकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। इनमें शामिल थे –
डॉ. वी. के. सिंह (एडिशनल डायरेक्टर, फार्मेसी)
डॉ. सी. एम. त्यागी (डीन, टेक्नोलॉजी)
डॉ. राजीव कुमार पांडेय
डॉ. अमित कुमार (कुलसचिव)
डॉ. अरविंद्र कुमार (चीफ प्रॉक्टर)
प्रबोध द्विवेदी
करीब दो हजार छात्र-छात्राओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को भव्य और ऐतिहासिक बना दिया। विश्वेश्वरैया ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में आयोजित यह सांस्कृतिक और सूफी कार्यक्रम केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत ही नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी था कि शिक्षा का अर्थ समग्र विकास है।
यह आयोजन छात्रों को न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक धरोहर, अनुशासन, जिम्मेदारी और आधुनिक कौशल को अपनाने की भी सीख देता है।



