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Dharmik Ramlila News : ग्रेटर नोएडा की रामलीला में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे, सुपर्णखा प्रसंग से लेकर सीता हरण तक का अद्भुत मंचन, सांसद डॉ. महेश शर्मा बने साक्षी, अनसूया माता ने दिया स्त्री धर्म का ज्ञान, लक्ष्मण रेखा और रावण का छल

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। श्री धार्मिक रामलीला कमेटी ग्रेटर नोएडा के तत्वावधान में आयोजित हो रही रामलीला महोत्सव 2025 का सातवां दिन आज बेहद रोमांचकारी और भावनात्मक रहा। परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज के दिव्य दिशा-निर्देशन और समिति अध्यक्ष श्री आनंद भाटी के नेतृत्व में आज की लीला का मंचन हुआ। इस मौके पर मंचन के मुख्य अतिथि गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा रहे, जिन्होंने पूरे श्रद्धा भाव से लीला का आनंद लिया और आयोजकों की सराहना की।

ग्रेटर नोएडा की इस रामलीला ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों का महत्व आज भी उतना ही है जितना सदियों पहले था।

सुपर्णखा प्रसंग, खर-दूषण वध, सीता हरण और जटायु की शहादत जैसे प्रसंगों ने न केवल दर्शकों का मनोरंजन किया बल्कि उन्हें गहरी जीवन शिक्षा भी दी।

गणेश वंदना से आरंभ हुई कथा

आज की लीला का शुभारंभ गणेश वंदना से हुआ। इसके बाद मंच पर भगवान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के पंचवटी प्रवास की कथा जीवंत हो उठी। लीला में दिखाया गया कि कैसे प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ऋषियों के आश्रमों से होते हुए पंचवटी पहुंचे और वहां कुटिया का निर्माण किया।

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ग्रेटर नोएडा की रामलीला में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे, सुपर्णखा प्रसंग से लेकर सीता हरण तक का अद्भुत मंचन, सांसद डॉ. महेश शर्मा बने साक्षी, अनसूया माता ने दिया स्त्री धर्म का ज्ञान

अनसूया माता ने दिया स्त्री धर्म का ज्ञान

लीला में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया जब माता सीता, अनसूया माता के आश्रम पहुंचती हैं। अनसूया माता उन्हें स्त्री धर्म, पतिव्रता और आदर्श जीवन के महत्व का उपदेश देती हैं। इस दृश्य ने महिला दर्शकों को विशेष रूप से भावुक कर दिया।

सुपर्णखा प्रसंग – राक्षसी के अभिमान का अंत

इसके बाद मंच पर सुपर्णखा प्रसंग का सजीव चित्रण हुआ।

सुपर्णखा, श्रीराम के सौंदर्य पर मोहित होकर विवाह का प्रस्ताव रखती है। जब राम मना करते हैं, तो वह लक्ष्मण के पास जाती है।
अंत में माता सीता पर आक्रमण का प्रयास करती है।

लक्ष्मण उसकी करनी देखकर उसका नाक और कान काटकर दंडित करते हैं। यह दृश्य देखकर पूरा रामलीला परिसर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा।

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ग्रेटर नोएडा की रामलीला में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे, सुपर्णखा प्रसंग से लेकर सीता हरण तक का अद्भुत मंचन, सांसद डॉ. महेश शर्मा बने साक्षी, अनसूया माता ने दिया स्त्री धर्म का ज्ञान

खर-दूषण वध और युद्ध का अद्भुत मंचन

नाक कटने से अपमानित सुपर्णखा अपने भाइयों खर-दूषण को बुलाती है। दोनों भाइयों और राक्षसों की भारी सेना के साथ युद्ध का मंचन बेहद रोमांचकारी रहा। श्रीराम ने अपने बाणों से उनका संहार किया।

इस युद्ध के दृश्य ने दर्शकों को तालियों और जयकारों पर मजबूर कर दिया।

रावण का षड्यंत्र और स्वर्ण मृग प्रसंग

लीला में आगे दिखाया गया कि सुपर्णखा लंका जाकर अपने भाई रावण को भड़काती है। रावण इसे अपना अपमान मानकर माता सीता का हरण करने की योजना बनाता है।

रावण मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण करने का आदेश देता है। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता मोहित हो जाती हैं और उसे पाने का आग्रह करती हैं।

राम मृग का पीछा करने जाते हैं और घायल होने पर मारीच, राम की आवाज़ में “लक्ष्मण! लक्ष्मण!” पुकारता है।
यह प्रसंग इतना जीवंत प्रस्तुत हुआ कि दर्शकों की सांसें थम गईं।

लक्ष्मण रेखा और रावण का छल

माता सीता की जिद पर लक्ष्मण, उनकी सुरक्षा के लिए लक्ष्मण रेखा खींचते हैं और राम की खोज में जाते हैं।

इसी बीच रावण ब्राह्मण वेश में आता है और भिक्षा मांगने के बहाने सीमा लांघने को बाध्य करता है। जैसे ही सीता माता सीमा पार करती हैं, रावण उनका हरण कर लेता है।

जटायु का वीरगति को प्राप्त होना

सीता हरण के समय पक्षीराज जटायु ने माता सीता की रक्षा का प्रयास किया। रावण से वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए जटायु गंभीर रूप से घायल होकर धराशायी हो गए।

बाद में श्रीराम जब सीता को खोजते हुए वहां पहुंचे, तो जटायु ने अंतिम सांसों में उन्हें पूरी कथा सुनाई और वीरगति को प्राप्त हुए। इस भावुक दृश्य ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं।

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ग्रेटर नोएडा की रामलीला में गूंजे प्रभु श्रीराम के जयकारे, सुपर्णखा प्रसंग से लेकर सीता हरण तक का अद्भुत मंचन, सांसद डॉ. महेश शर्मा बने साक्षी, अनसूया माता ने दिया स्त्री धर्म का ज्ञान

आज की लीला से मिली शिक्षा

आज की रामलीला के मंचन ने गहरी सीख दी “यदि मनुष्य पराई स्त्री या पुरुष के प्रति कुत्सित विचार रखेगा, तो उसका परिणाम अपमान, दुख और विनाश ही होगा।”

यह संदेश आज के सामाजिक जीवन में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना त्रेतायुग में था।

दर्शकों की भावनाएं और गूंजते जयकारे

आज का मंचन इतना भव्य और प्रभावशाली रहा कि पूरा रामलीला परिसर ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंजता रहा। हर दृश्य पर तालियों की गड़गड़ाहट और भक्तिभाव से भरे जयकारे माहौल को और पवित्र बना रहे थे।

मंच पर गरिमामयी उपस्थिति

आज की लीला में समिति के पदाधिकारी और संरक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे –

संस्थापक परम पूज्य गोस्वामी सुशील जी महाराज, संस्थापक एडवोकेट राजकुमार नागर, पंडित प्रदीप शर्मा, शेर सिंह भाटी, हरवीर मावी, मुख्य संरक्षक नरेश गुप्ता, संरक्षक सुशील नागर, धीरेंद्र भाटी, मनोज गुप्ता, सतीश भाटी

अध्यक्ष श्री आनंद भाटी, महासचिव ममता तिवारी, कोषाध्यक्ष अजय नागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश शर्मा बदौली, सुभाष भाटी, उमेश गौतम, योगेंद्र भाटी, मनीष डाबर, रोशनी सिंह, चैन पाल प्रधान, मीडिया प्रभारी अतुल आनंद, सत्यवीर मुखिया, पी पी शर्मा, महेश कमांडो, ज्योति सिंह, वीरपाल मावी, जयदीप सिंह, गीता सागर, यशपाल नागर, तेजकुमार भाटी और अन्य इन सभी की उपस्थिति ने आयोजन को और भव्य बना दिया।

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