Sharda HealthCare News : शारदाकेयर हेल्थसिटी में मेडिकल चमत्कार, दुर्लभ गर्भावस्था जटिलता से जूझ रही महिला और नवजात की बची जान, डॉक्टरों ने की सफल इमरजेंसी सर्जरी, पहले भी तीन बार समयपूर्व प्रसव और हर बार आई थी गंभीर समस्या, जान बचाने के लिए करनी पड़ी इमरजेंसी हिस्टेरेक्टॉमी, डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने समय रहते पहचानी गंभीर जटिलता
ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने कहा "यह गर्भावस्था से जुड़ी सबसे चुनौतीपूर्ण मेडिकल इमरजेंसी में से एक थी। मरीज को पहले भी कई बार रिटेन्ड प्लेसेंटा की समस्या हो चुकी थी और उसके गर्भाशय में दुर्लभ जन्मजात असामान्यता भी थी। शारदाकेयर हेल्थसिटी एवं शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह ने कहा"इतने दुर्लभ और गंभीर मामले का सफल उपचार हमारी विशेषज्ञ मेडिकल टीम की दक्षता और शारदाकेयर हेल्थसिटी की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा स्थित शारदाकेयर हेल्थसिटी के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल गर्भावस्था के मामले में समय रहते सफल इमरजेंसी सर्जरी कर 36 वर्षीय महिला और उसके नवजात शिशु की जान बचाकर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस हाई-रिस्क केस में महिला को प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (Placenta Accreta Spectrum-PAS) जैसी जानलेवा स्थिति के साथ यूनिकॉर्नुएट यूटेरस (Unicornuate Uterus) जैसी दुर्लभ जन्मजात असामान्यता भी थी, जिसका संयोजन दुनिया भर में बेहद कम मामलों में देखने को मिलता है।
डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने समय रहते पहचानी गंभीर जटिलता
शारदाकेयर हेल्थसिटी की ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने महिला की गंभीर स्थिति का सटीक आकलन करते हुए तत्काल जीवनरक्षक सर्जरी का निर्णय लिया। उनकी अगुवाई में विशेषज्ञ टीम ने अत्यधिक रक्तस्राव पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पाया और महिला की जान बचाने में सफलता हासिल की। साथ ही नवजात शिशु भी पूरी तरह सुरक्षित है।
पहले भी तीन बार समयपूर्व प्रसव और हर बार आई थी गंभीर समस्या
अस्पताल के अनुसार, महिला (बदला हुआ नाम अंजलि) की पहले भी तीन बार 6.5 से 7.5 महीने के बीच समयपूर्व डिलीवरी हो चुकी थी। प्रत्येक प्रसव के दौरान प्लेसेंटा (गर्भनाल) अपने आप बाहर नहीं निकल पाया था और डॉक्टरों को उसे मैन्युअली निकालना पड़ा था। इसी कारण वर्तमान गर्भावस्था को पहले से ही अत्यधिक जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया था।
दूसरे अस्पताल से रेफर होने के बाद बिगड़ी हालत
वर्तमान गर्भावस्था में महिला ने दूसरे अस्पताल में लगभग 1.7 किलोग्राम वजन के प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म दिया। हालांकि डिलीवरी के बाद भी प्लेसेंटा बाहर नहीं निकल सका। कई घंटे तक प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिली। लगभग 10 घंटे बाद महिला की स्थिति गंभीर होने पर उसे सुबह-सुबह शारदाकेयर हेल्थसिटी रेफर किया गया।

सर्जरी में सामने आया बेहद दुर्लभ मामला
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में गहराई तक चिपक चुका था। इस स्थिति को प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (PAS) कहा जाता है, जिसमें अत्यधिक रक्तस्राव होने का खतरा रहता है और समय पर उपचार न मिलने पर मरीज की जान भी जा सकती है। जांच के दौरान यह भी पता चला कि महिला का गर्भाशय यूनिकॉर्नुएट यूटेरस था, यानी उसका गर्भाशय सामान्य रूप से पूरी तरह विकसित नहीं हुआ था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यूनिकॉर्नुएट यूटेरस और प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम का एक साथ पाया जाना अत्यंत दुर्लभ है और विश्वभर में इसके गिने-चुने मामले ही दर्ज किए गए हैं।
जान बचाने के लिए करनी पड़ी इमरजेंसी हिस्टेरेक्टॉमी
प्लेसेंटा निकालने के दौरान महिला को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत इमरजेंसी हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय निकालने की सर्जरी) करने का फैसला लिया। विशेषज्ञ टीम की त्वरित कार्रवाई और कुशल सर्जरी के कारण रक्तस्राव पर नियंत्रण पाया गया और महिला की जान बचाई जा सकी। उपचार के बाद माँ और नवजात दोनों स्वस्थ हैं।
डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने क्या कहा
ऑब्सटेट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने कहा “यह गर्भावस्था से जुड़ी सबसे चुनौतीपूर्ण मेडिकल इमरजेंसी में से एक थी। मरीज को पहले भी कई बार रिटेन्ड प्लेसेंटा की समस्या हो चुकी थी और उसके गर्भाशय में दुर्लभ जन्मजात असामान्यता भी थी। समय पर सही पहचान, तत्काल सर्जरी का निर्णय और पूरी मेडिकल टीम के बेहतरीन समन्वय की वजह से हम माँ की जान बचाने और बच्चे के लिए भी बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में सफल रहे। ऐसे हाई-रिस्क मामलों का इलाज केवल उन अस्पतालों में होना चाहिए जहां एडवांस्ड सर्जिकल और क्रिटिकल केयर सुविधाएं उपलब्ध हों।”
ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह का बयान
शारदाकेयर हेल्थसिटी एवं शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ. कौसर शाह ने कहा“इतने दुर्लभ और गंभीर मामले का सफल उपचार हमारी विशेषज्ञ मेडिकल टीम की दक्षता और शारदाकेयर हेल्थसिटी की अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमाण है। यह उपलब्धि हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को विश्वस्तरीय और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराने की हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। हमारा उद्देश्य सबसे कठिन मेडिकल इमरजेंसी में भी मरीजों को समय पर सर्वोत्तम इलाज उपलब्ध कराना है।”
हाई-रिस्क गर्भावस्था में विशेषज्ञ इलाज है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम और यूनिकॉर्नुएट यूटेरस जैसी जटिल स्थितियों में समय पर पहचान, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। शारदाकेयर हेल्थसिटी की इस सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा हस्तक्षेप से सबसे कठिन और दुर्लभ गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं का भी सफलतापूर्वक उपचार संभव है।



