Uttrakhand Mahakauthig Noida 2025 : लोकसंस्कृति, लोकसंगीत और लोकभावनाओं का महासंगम बना महाकौथिग, नोएडा स्टेडियम में 15वें महाकौथिग मेले का भव्य, ऐतिहासिक और यादगार समापन, आखिरी दिन रही रिकॉर्ड भीड़

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा स्टेडियम में बीते सात दिनों से चल रहा 15वां उत्तराखंड महाकौथिग मेला गुरुवार को रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकसंगीत और जनसैलाब के बीच भव्य एवं ऐतिहासिक समापन के साथ संपन्न हो गया। पहाड़ की संस्कृति, परंपरा, खानपान और लोककला को समर्पित यह आयोजन राजधानी एनसीआर में उत्तराखंड की आत्मा बनकर उभरा, जहां हर दिन संस्कृति की खुशबू और लोकभावनाओं की गूंज सुनाई दी।
सात दिवसीय महाकौथिग मेले के दौरान करीब ढाई से तीन लाख दर्शकों की उपस्थिति ने आयोजन की लोकप्रियता और सफलता की कहानी खुद बयां कर दी। समापन दिवस पर सुबह से लेकर देर रात तक नोएडा स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा रहा। अंतिम दिन नोएडा विधायक पंकज सिंह ने भी मेले में पहुंचकर आयोजन की सराहना की और इसे उत्तराखंडी समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देने वाला मंच बताया।
सुबह का सत्र: भजन-कीर्तन में डूबी श्रद्धा और संस्कृति
महाकौथिग के सातवें और अंतिम दिन का सुबह का सत्र उत्तराखंडी भजन-कीर्तन मंडली प्रतियोगिता के नाम रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मनीषा सिंह, डीसीपी साइबर क्राइम, नोएडा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “नोएडा जैसे आधुनिक शहर में महाकौथिग के मंच पर जागेश्वर धाम जैसा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दर्शन मिलना अपने आप में अद्भुत अनुभव है।”
उन्होंने उत्तराखंड के पारंपरिक खानपान, परिधान और लोकसंस्कृति की भी मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
भजन-कीर्तन मंडली प्रतियोगिता में 15 टीमों के करीब 180 कलाकारों ने भाग लिया। ढोल-दमाऊ, हुड़का और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के साथ प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। प्रतियोगिता में पूनम बछेती और लोकगायिका स्वर कोकिला कल्पना चौहान ने निर्णायक की भूमिका निभाई।
शाम का सत्र: लोकगीतों पर झूम उठा नोएडा
महाकौथिग का शाम का सत्र दर्शकों के लिए यादगार बन गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विजय कुमार रावल, डीजीएम, नोएडा अथॉरिटी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके बाद मंच पर एक के बाद एक लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
लोकगायक रोहित चौहान ने
“छोरी चंद्रा ज्यादा न शरमौ”, “धन सिंह की गाड़ी”, “बाँद सुषमा” जैसे लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं स्वर कोकिला कल्पना चौहान ने
“मन लगी गे मेरु पिंगली साड़ी मा”, “मारी जालू मैरा गढ़वाल मा बाघ लग्यु चा”, “बेडु पाको बारामासा”
जैसे सुपरहिट लोकगीतों से माहौल को पूरी तरह पहाड़ी रंग में रंग दिया।
इसके अलावा लोकगायिका हेमा भैंसोड़ा की सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। देर रात तक लोग लोकसंगीत में डूबे नजर आए।
महाकौथिग टीम का सम्मान, तालियों की गूंज
समापन समारोह के अवसर पर महाकौथिग के सफल आयोजन में योगदान देने वाली पूरी टीम को मंच पर सम्मानित किया गया। इस मौके पर मुख्य संयोजक राजेन्द्र चौहान, संस्थापक कल्पना चौहान, चेयरमैन आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष हरीश असवाल, संयोजिका इंद्रा चौधरी, मीडिया प्रभारी रजनी जोशी, सत्येंद्र नेगी, नीरज रावत सहित पूरी आयोजन समिति मौजूद रही।
संस्कृति की जीत, पहचान की मजबूती
15वां महाकौथिग मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकआत्मा, परंपरा और विरासत का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए यह मेला अपने गांव, अपने पहाड़ और अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम बना, वहीं नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से परिचित कराने का सशक्त मंच भी साबित हुआ।
महाकौथिग के समापन के साथ ही दर्शकों की आंखों में अगली बार फिर मिलने की उम्मीद और दिलों में पहाड़ की खुशबू बस गई।



