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Good News : मानवता की मिसाल अंकिता राजपूत और उनके ‘जीवन रक्षक देवदूत’ बन रहे कैंसर मरीजों की उम्मीद, “नर सेवा ही नारायण सेवा” – सेवा ही उनका धर्म, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेवा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। राष्ट्रीय स्तर की समाज सेविका अंकिता राजपूत एक बार फिर मानवता की सच्ची मिसाल बनकर सामने आई हैं। कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए उन्होंने अपने “जीवन रक्षक देवदूत” अभियान के माध्यम से प्लेटलेट्स और रक्तदान कर कई जिंदगियों में उम्मीद की नई किरण जगाई है।
अंकिता राजपूत लंबे समय से समाज कल्याण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और नि:स्वार्थ भाव से सेवा कार्य कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल मदद करना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। उनके सामाजिक कार्यों ने समाज में एक अमिट छाप छोड़ी है।


“नर सेवा ही नारायण सेवा” – सेवा ही उनका धर्म
अंकिता राजपूत का मानना है कि “नर सेवा ही नारायण सेवा है।” वह कहती हैं कि जब किसी अंधकारमय जीवन में उम्मीद की रोशनी जलती है और किसी मरीज के उदास चेहरे पर मुस्कान लौटती है, वही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
उनका लक्ष्य केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है, बल्कि वह “थैलेसीमिया मुक्त भारत” का सपना भी देखती हैं। इसके लिए वह स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का लगातार अभियान चला रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेवा
हाल ही में उनके “जीवन रक्षक देवदूत” वसीम ने यमन देश से इलाज के लिए आए एक कैंसर पीड़ित बच्चे के लिए नोएडा स्थित पीजीआई अस्पताल में प्लेटलेट्स दान कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की।
इसी क्रम में— चित्रेश भारद्वाज, आशीष परासर, आशीष त्रिपाठी ने दिल्ली स्थित राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए रक्तदान कर जरूरतमंद की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अंकिता राजपूत ने इन सभी “जीवन रक्षक देवदूतों” का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे लोग ही समाज की असली ताकत हैं।

गंभीर बीमारियों में निरंतर सेवा
यह अभियान केवल कैंसर तक सीमित नहीं है। उनके जीवन रक्षक देवदूत—
ब्लड कैंसर,
थैलेसीमिया,
डायलिसिस मरीजों, बोन मैरो सर्जरी जैसे जटिल उपचारों में भी नियमित रूप से रक्तदान और प्लेटलेट्स दान कर रहे हैं।
अंकिता राजपूत का कहना है कि उनकी टीम 24×7 सेवा के लिए तैयार रहती है। किसी भी आपात स्थिति में जरूरतमंद मरीज तक रक्त या प्लेटलेट्स पहुंचाना उनका संकल्प है।


समाज के लिए प्रेरणा
अंकिता राजपूत न केवल सेवा कार्य कर रही हैं, बल्कि लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। वह कहती हैं कि रक्तदान एक महादान है, जो किसी की जिंदगी बचा सकता है। उनका संदेश साफ है—“यदि हम स्वस्थ हैं, तो हमें आगे आकर रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि एक यूनिट रक्त किसी की सांसों को नई जिंदगी दे सकता है।”


मानवता की सच्ची पहचान
आज जब समाज में संवेदनशीलता कम होती दिख रही है, ऐसे समय में अंकिता राजपूत और उनके जीवन रक्षक देवदूत यह साबित कर रहे हैं कि मानवता अभी भी जीवित है।
उनकी यह पहल न केवल मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो रही है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और करुणा की भावना को भी मजबूत कर रही है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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