Yashoda Medicity Hospital : 7 घंटे की जटिल माइक्रोसर्जरी से 18 वर्षीय युवक का कटा हाथ फिर जोड़ा, यशोदा मेडिसिटी के डॉक्टरों को मिली सफलता, कंस्ट्रक्शन साइट हादसे में कलाई से पूरी तरह कट गया था दाहिना हाथ, माइक्रोसर्जरी से रक्त वाहिकाओं, नसों और टेंडन्स को जोड़ा, इमरजेंसी में तुरंत शुरू हुई विशेषज्ञों की टीम, “पूरी तरह कटे हाथ को जोड़ना समय के साथ दौड़ जैसा”
डॉ. शोभित शर्मा, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी एवं प्लास्टिक सर्जरी, ने कहा, “पूरी तरह से कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ना समय के साथ एक दौड़ जैसा होता है। इस मामले में क्रश इंजरी के कारण टिश्यू बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे। माइक्रोस्कोप की सहायता से रक्त वाहिकाओं, टेंडन्स और नसों की सावधानीपूर्वक मरम्मत करनी पड़ी।”

दिल्ली/NCR, रफ़्तार टूडे। गाजियाबाद की एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए गंभीर हादसे में कलाई से पूरी तरह कटे 18 वर्षीय युवक के दाहिने हाथ को यशोदा मेडिसिटी के डॉक्टरों ने करीब 7 घंटे चली जटिल माइक्रोसर्जरी के बाद सफलतापूर्वक दोबारा जोड़ दिया। सर्जरी के बाद रिप्लांट किए गए हाथ में रक्त संचार बहाल हो गया है और मरीज की स्थिति में सुधार बताया गया है। हापुड़ निवासी यह युवक गाजियाबाद में कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करता था। 21 जुलाई को काम के दौरान उसका हाथ एक मशीन में फंस गया, जिससे कलाई के स्तर पर हाथ पूरी तरह अलग हो गया। हादसे के बाद युवक को तेज दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में तत्काल यशोदा मेडिसिटी के इमरजेंसी विभाग लाया गया। राहत की बात यह रही कि कटे हुए हाथ को सुरक्षित तरीके से अस्पताल तक पहुंचाया गया, जिससे डॉक्टरों को उसे दोबारा जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर मिला।
इमरजेंसी में तुरंत शुरू हुई विशेषज्ञों की टीम
अस्पताल पहुंचने के बाद मरीज का तत्काल मूल्यांकन और स्थिरीकरण किया गया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने इमरजेंसी हैंड रीइम्प्लांटेशन का निर्णय लिया। सर्जिकल टीम का नेतृत्व प्लास्टिक, एस्थेटिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. शोभित शर्मा ने किया। टीम में ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स मेडिसिन के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. ब्रजेश कौशले भी शामिल रहे। डॉक्टरों के मुताबिक यह सामान्य कटने की चोट नहीं थी, बल्कि क्रश इंजरी थी, जिसके कारण हाथ के कई महत्वपूर्ण ऊतक क्षतिग्रस्त हो गए थे। इसके अलावा अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज को स्थिर रखना भी शुरुआती चुनौती थी।
7 घंटे चली जटिल माइक्रोसर्जरी
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने सबसे पहले कलाई की टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में लाकर स्थिर किया, ताकि दोबारा जोड़े जाने वाले हाथ को आवश्यक संरचनात्मक सहारा मिल सके। इसके बाद माइक्रोस्कोप की सहायता से बेहद बारीकी से रक्त वाहिकाओं, नसों और टेंडन्स को जोड़ा गया। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम ने मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी। रक्त की अत्यधिक कमी को देखते हुए आवश्यकतानुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया।
करीब सात घंटे की चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के बाद रिप्लांट किए गए हाथ में रक्त का प्रवाह बहाल हुआ। डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया समय के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि कटे हुए अंग में रक्त संचार लंबे समय तक बाधित रहने से ऊतकों को स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

“पूरी तरह कटे हाथ को जोड़ना समय के साथ दौड़ जैसा”
डॉ. शोभित शर्मा, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी एवं प्लास्टिक सर्जरी, ने कहा, “पूरी तरह से कटे हुए हाथ को दोबारा जोड़ना समय के साथ एक दौड़ जैसा होता है। इस मामले में क्रश इंजरी के कारण टिश्यू बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे। माइक्रोस्कोप की सहायता से रक्त वाहिकाओं, टेंडन्स और नसों की सावधानीपूर्वक मरम्मत करनी पड़ी।” उन्होंने कहा कि मरीज का महत्वपूर्ण समय के भीतर अस्पताल पहुंचना उपचार के लिए बेहद अहम रहा। उन्होंने बताया कि फिलहाल हाथ में रक्त का प्रवाह बहाल है, लेकिन हाथ को सामान्य कार्यक्षमता हासिल करने में समय लगेगा। अगले कुछ महीनों में मरीज की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद है।
डिस्चार्ज के बाद भी जारी रहेगा रिहैबिलिटेशन
सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ और उसे स्थिर अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। अब वह नियमित फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन के लिए चिकित्सकीय टीम के संपर्क में रहेगा। डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती हीलिंग पूरी होने के बाद फिजियोथेरेपी शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य हाथ की ताकत, मूवमेंट और कार्यक्षमता को धीरे-धीरे बेहतर करना होगा। आने वाले महीनों में उंगलियों में सेंसेशन और मूवमेंट की वापसी की संभावना का आकलन नियमित फॉलो-अप के दौरान किया जाएगा।
कटे अंग को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी
चिकित्सकों ने बताया कि ट्रॉमेटिक लिंब एम्प्यूटेशन के मामलों में चोट लगने से लेकर सर्जरी शुरू होने तक का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में मरीज को जल्द से जल्द विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना सफलता की संभावना को बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि कटे हुए अंग को सुरक्षित तरीके से संरक्षित करके मरीज के साथ अस्पताल लाना महत्वपूर्ण है। इसके बाद माइक्रोसर्जरी में विशेषज्ञता रखने वाली टीम द्वारा तत्काल मूल्यांकन किया जाता है कि अंग को दोबारा जोड़ा जा सकता है या नहीं।
यशोदा मेडिसिटी की टीम के अनुसार इस मामले में त्वरित इमरजेंसी रिस्पॉन्स, विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम, माइक्रोसर्जिकल तकनीक और पोस्ट-ऑपरेटिव रिहैबिलिटेशन ने उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह जटिल मामला गंभीर औद्योगिक एवं कंस्ट्रक्शन साइट ट्रॉमा के लिए समय पर विशेषज्ञ उपचार की अहमियत को भी सामने लाता है।



