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Noida Authority Board Meeting : फैसलों की मेज पर बसा नोएडा का भविष्य, 221वीं बोर्ड बैठक में विकास, पर्यावरण और भरोसे की नई इबारत, आवासीय भूखंड योजना-2011 वर्षों का इंतजार अब खत्म होने की ओर, सिटी लॉजिस्टिक प्लान ट्रैफिक से राहत और स्मार्ट मूवमेंट की तैयारी, कोर्ट के आदेशों पर सख्ती, स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट पर बड़ा फैसला

नोएडा, रफ़्तार टुडे। नोएडा प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक सिर्फ एक औपचारिक प्रशासनिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह शहर के भविष्य, नागरिकों की उम्मीदों और वर्षों से अटके मुद्दों के समाधान की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हुई। शुक्रवार को प्राधिकरण सभागार में आयोजित इस बैठक में विकास, पर्यावरण संरक्षण, आवासीय योजनाओं, रियल एस्टेट परियोजनाओं और नियामक सुधारों से जुड़े ऐसे फैसले लिए गए, जिनका असर आने वाले वर्षों तक नोएडा की तस्वीर और तक़दीर दोनों पर दिखाई देगा।
बैठक की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त एवं नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने की। उनके साथ नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार सिंह सहित बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।


उप-धारक मामलों में राहत की उम्मीद, नई समिति को हरी झंडी
बोर्ड बैठक का पहला और अहम फैसला उप-धारक (सब-लीज) से जुड़े मामलों को लेकर रहा। लंबे समय से उप-पट्टा और ट्रांसफर से जुड़े प्रकरणों में आ रही देरी और तकनीकी अड़चनों को देखते हुए बोर्ड ने अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय समिति के गठन को मंजूरी दी।
इस समिति का उद्देश्य उप-धारक मामलों का तेजी से निस्तारण करना और नागरिकों को बार-बार प्राधिकरण के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है। यह फैसला खासतौर पर उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आया है, जिनके प्रॉपर्टी संबंधी मामले वर्षों से लंबित हैं।

ड्रेनों की बदहाली पर ब्रेक, पर्यावरण सुधार की ठोस पहल
नोएडा की ड्रेनों से निकलने वाले प्रदूषित पानी और उससे पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को लेकर भी बोर्ड गंभीर नजर आया। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्राधिकरण क्षेत्र की विभिन्न ड्रेनों के शोधन और सुधार के लिए एक आधुनिक और प्रभावी शोधन प्रणाली विकसित की जाएगी।
यह प्रणाली स्थानीय परिस्थितियों, पर्यावरण मानकों और लागत के संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI)’ जारी कर अनुभवी एजेंसियों का चयन किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से न सिर्फ जल प्रदूषण कम होगा, बल्कि हरित और स्वच्छ नोएडा के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।


आवासीय भूखंड योजना-2011: वर्षों का इंतजार अब खत्म होने की ओर
आवासीय भूखंड योजना-2011 के तहत लंबित मामलों पर भी बोर्ड ने अहम निर्णय लिया। वर्ष 2021 के बाद बचे 644 आवेदनों में से अपात्र आवेदकों को अलग करते हुए, पात्र आवेदकों के मामलों के निस्तारण के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों की संयुक्त समिति बनाने को मंजूरी दी गई।
यह फैसला उन सैकड़ों परिवारों के लिए राहत भरा है, जो वर्षों से अपने भूखंड आवंटन का इंतजार कर रहे थे और बार-बार प्राधिकरण के चक्कर काट रहे थे।

सिटी लॉजिस्टिक प्लान: ट्रैफिक से राहत और स्मार्ट मूवमेंट की तैयारी
तेजी से बढ़ते शहर नोएडा में ट्रैफिक और माल ढुलाई की चुनौतियों को देखते हुए बोर्ड ने सिटी लॉजिस्टिक प्लान तैयार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
इस योजना को तैयार करने के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA), नई दिल्ली या आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से किसी एक को सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। यह प्लान भविष्य में ट्रैफिक दबाव कम करने, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को सुचारू बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।


कोर्ट के आदेशों पर सख्ती, स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट पर बड़ा फैसला
माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को लेकर भी बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया। सेक्टर-150 स्थित स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े मामलों में आवश्यक संशोधन और कार्रवाई को बोर्ड ने स्वीकृति दी।
इसके साथ ही एससी-02 स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े प्रकरणों में भी कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। यह कदम उन निवेशकों और खरीदारों के लिए भरोसे का संकेत है, जो लंबे समय से न्याय और समाधान की प्रतीक्षा कर रहे थे।


यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 में बदलाव, निवेश को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 के तहत वाणिज्यिक, संस्थागत और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े नियमों में आंशिक संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
इन संशोधनों का उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और नोएडा को उद्योगों के लिए और अधिक आकर्षक बनाना है।

अटकी रियल एस्टेट परियोजनाएं: 36 को मिली रफ्तार, 4 पर सख्ती
पुरानी और अटकी रियल एस्टेट परियोजनाओं की समस्याओं पर भी बोर्ड ने विस्तार से चर्चा की। शासनादेश के तहत लागू नीति की प्रगति रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 57 परियोजनाओं में से 36 परियोजनाएं इस नीति का लाभ उठा चुकी हैं, जो कुल डेवलपमेंट का लगभग 60 प्रतिशत है।
हालांकि, 4 ऐसी परियोजनाएं भी सामने आईं, जिनमें जमा धनराशि के बावजूद संतोषजनक प्रगति नहीं हुई। इन मामलों में डेवलपर्स द्वारा जमा कराई गई लगभग 872 करोड़ रुपये की राशि पर बोर्ड ने नाराजगी जताई और रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज करने के सख्त निर्देश दिए।


भविष्य की ओर बढ़ता नोएडा
221वीं बोर्ड बैठक में लिए गए फैसले यह संकेत देते हैं कि नोएडा प्राधिकरण अब सिर्फ योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव चाहता है। चाहे पर्यावरण सुधार हो, नागरिकों की समस्याओं का समाधान, निवेश को बढ़ावा देना हो या वर्षों से अटकी परियोजनाओं को गति देना—इन फैसलों से नोएडा के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
शहर के नागरिकों के लिए यह बैठक एक संदेश भी है कि नोएडा का भविष्य अब फैसलों की फाइलों से निकलकर धरातल पर उतरने की ओर बढ़ रहा है।

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Raftar Today
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