
दादरी, रफ़्तार टुडे।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करते हुए दादरी कटहरा रोड स्थित सिटी हार्ट अकैडमी स्कूल ने इस वर्ष गणेश चतुर्थी को बेहद धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया। सोमवार की सुबह जैसे ही सूरज की पहली किरणें स्कूल प्रांगण में पहुंचीं, पूरा वातावरण भक्ति-भाव और उल्लास से सराबोर हो उठा। मॉर्निंग असेंबली को विशेष रूप से इस पर्व को समर्पित किया गया और हर कोई गणपति बप्पा मोरया के जयकारों में डूबा नजर आया।
गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल के डायरेक्टर संदीप भाटी और प्रधानाचार्य रुचि भाटी ने गणपति बप्पा की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर की। इसके बाद प्रतिमा को भोग अर्पित किया गया। पूरी प्रक्रिया पारंपरिक ढंग से, मंत्रोच्चार और शुद्ध विधि-विधान के साथ सम्पन्न की गई। इस दौरान शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं सभी बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा में शामिल हुए।
बच्चों और शिक्षकों ने मिलकर की गणपति आरती
पूजा-अर्चना के बाद सामूहिक गणपति आरती का आयोजन किया गया। बच्चों ने हाथ जोड़कर गणेश जी से बुद्धि, ज्ञान और सफलता का आशीर्वाद मांगा। शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर भक्ति गीत गाए और प्रतिमा पर रोली-चावल से टीका लगाया। जैसे ही सभी ने मिलकर “गणपति बप्पा मोरया” का जयघोष किया, पूरा वातावरण गूंज उठा और वहां मौजूद हर व्यक्ति के चेहरे पर भक्ति का उल्लास स्पष्ट नजर आया।
भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम
इस अवसर पर स्कूल परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया था। रंग-बिरंगी झालरें, फूलों की महक और दीपों की रोशनी ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। छोटे-छोटे बच्चों ने अपने परंपरागत परिधानों में गणपति जी की स्तुति करते हुए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक था बल्कि एक संस्कृतिक संगम भी बना जिसने बच्चों को भारतीय परंपराओं और संस्कारों से जोड़ने का कार्य किया।
सहभागिता और सामूहिकता की झलक
पूरे आयोजन में शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। सभी ने एक साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और यह संदेश दिया कि जब समाज और परिवार एक साथ मिलकर आस्था का पर्व मनाते हैं, तो उसका प्रभाव और भी गहरा होता है। प्रधानाचार्य रुचि भाटी ने कहा कि “गणेश चतुर्थी का पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में ज्ञान और विवेक ही सबसे बड़ा धन है। बच्चों को संस्कार और परंपरा की सीख देने के लिए ऐसे आयोजनों का होना बेहद आवश्यक है।”
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी
डायरेक्टर संदीप भाटी ने इस अवसर पर कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का ही केंद्र नहीं बल्कि संस्कार और संस्कृति का भी गढ़ होना चाहिए। गणेश चतुर्थी जैसे त्योहार बच्चों को एकजुट होकर भक्ति, भाईचारे और अनुशासन का महत्व सिखाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाली पीढ़ी को हमारी परंपराओं और मूल्यों से जोड़ना ही शिक्षा का असली उद्देश्य है।
बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियां
गणपति पूजन और आरती के बाद बच्चों ने गणेश वंदना प्रस्तुत की, जिससे सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। नन्हे-मुन्ने बच्चों की मासूम आवाजें जब “जय गणेश, जय गणेश” के स्वर में गूंजीं, तो वहां मौजूद हर शख्स भावविभोर हो गया। यह प्रस्तुति न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी बल्कि इसने बच्चों को आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी अनुभव कराया।
संदेश – भक्ति से मिलती है शक्ति और एकता
इस आयोजन ने स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज और शिक्षा संस्थानों में सकारात्मकता, एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं। बच्चों के मन में गणपति जी के प्रति जो भक्ति भाव जगाया गया, वह उनके जीवन में मार्गदर्शन और प्रेरणा का काम करेगा।
समापन भक्ति के स्वर और आशीर्वाद के साथ
कार्यक्रम का समापन गणेश जी की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। सभी बच्चों ने बप्पा से ज्ञान, सफलता और अच्छे भविष्य की कामना की। इस दौरान शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच आपसी सहयोग और सहभागिता की झलक देखने को मिली।
सिटी हार्ट अकैडमी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक पर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने शिक्षा और संस्कृति को एक धागे में पिरो दिया। यहां हर किसी ने यह महसूस किया कि गणपति बप्पा सचमुच “विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता” हैं और उनका आशीर्वाद सब पर बना रहे।



