Breaking News : "ग्रेटर नोएडा में इलाज बना महंगा सौदा!, सरकारी अस्पतालों की भारी कमी से त्रस्त जनता, एक्टिव सिटीजन टीम ने उठाई आवाज़", सस्ता इलाज सपना क्यों? सरकारी व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल!

ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
शहर का विकास हो रहा है, लेकिन जनस्वास्थ्य सेवाएं पीछे छूटती जा रही हैं। ग्रेटर नोएडा में सरकारी अस्पतालों की भारी कमी आज आम नागरिकों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। निजी अस्पतालों की भरमार के बीच इलाज अब मध्यमवर्ग और गरीबों के लिए किसी आर्थिक संकट से कम नहीं। इन्हीं हालातों को देखते हुए “एक्टिव सिटीजन टीम” ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी गौतम बुद्ध नगर को एक सशक्त सामूहिक ज्ञापन सौंपा है।
क्या है ज्ञापन में?
ज्ञापन के माध्यम से टीम ने कुछ बेहद अहम और जमीनी मुद्दे उठाए, जो सीधे तौर पर जनता की सेहत और उनके आर्थिक बोझ से जुड़ते हैं:
1. निजी अस्पतालों का वर्चस्व – आम आदमी की पहुंच से बाहर
- प्राधिकरण द्वारा निकाले जाने वाले अस्पताल प्लॉट्स अक्सर ऊंची बोली लगाने वाली निजी कंपनियों के हाथों में चले जाते हैं।
- इससे इलाज महंगा होता है और गरीब-मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मेडिकल सुविधाएं पहुंच से दूर हो जाती हैं।
2. क्यों न बनाए जाएं सरकारी अस्पताल?
- एक्टिव सिटीजन टीम का कहना है कि जब निजी अस्पताल पहले से मौजूद हैं, तो नए प्लॉट्स पर सरकारी अस्पताल ही क्यों न बनाए जाएं?
- यदि प्राधिकरण स्वयं अस्पताल बनाए और शासन उनके संचालन की व्यवस्था करे, तो हर वर्ग को सस्ता और बेहतर इलाज मिल सकता है।
3. कोविड महामारी से मिले सबक – सरकारी स्वास्थ्य ढांचे की अनदेखी भारी पड़ी
- टीम ने उदाहरण दिया कि कोविड-19 के समय सरकारी अस्पतालों की कमी ने कैसे हालात बदतर बना दिए थे।
- यदि सरकारी व्यवस्था मजबूत होती, तो संकट की घड़ी में राहत ज्यादा मिलती।
जनता की मांग: सस्ता इलाज, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं
टीम ने साफ कहा कि प्राधिकरण को जनहित में नीति में बदलाव करना चाहिए। अस्पतालों के लिए जमीनों को सिर्फ निजी हाथों में सौंपने की बजाय, सरकारी स्तर पर इलाज की संरचना विकसित की जाए।
इससे न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी छवि और मजबूत होगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में कौन-कौन शामिल रहे?
इस मुहिम में कई प्रमुख नागरिक शामिल थे जो वर्षों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं:
- सरदार मंजीत सिंह
- आलोक सिंह
- हरेंद्र भाटी
- रमेश प्रेमचंदानी
- आशीष शर्मा
इन सभी सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि “स्वास्थ्य अधिकार है, सुविधा नहीं।” और हर नागरिक को यह सुविधा समान रूप से मिलनी चाहिए।
अब देखना यह है कि क्या सरकार इस आवाज़ को सुनेगी?
ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित हो रहे क्षेत्र में यदि सरकार अब भी सरकारी अस्पतालों के निर्माण की दिशा में सक्रिय पहल नहीं करती, तो यह शहरों में बढ़ती स्वास्थ्य असमानता का जीवंत उदाहरण बन जाएगा।
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✍️ रफ्तार टुडे टीम द्वारा प्रस्तुत – जनता की जुबान, जनहित की खबर।
इस मुहिम से जुड़े रहिए, हम आगे भी जनता की आवाज को पहुंचाते रहेंगे।



