Greater Noida Authority News : “9 साल से फंसा प्लॉट, अधूरी सड़कें और भारी नियमों का बोझ, अब जागा प्रशासन!”, एनईए की पहल पर उद्योगपतियों की गुहार, ACEO सौम्य श्रीवास्तव, ACEO सुमित यादव ने 10 दिन में समाधान का दिया अल्टीमेटम, उद्योगपतियों की पीड़ा “पैसा दिया, लेकिन हक नहीं मिला”, अधूरी सड़कें, लीज रेंट और किराया नीति पर उठे गंभीर सवाल
अधूरी सड़कें बनी विकास की सबसे बड़ी रुकावट, ट्रांसफर चार्ज और नियमों की जटिलता बनी बाधा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे । ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से पनप रही समस्याएं आखिरकार प्रशासन के दरवाजे तक मजबूती से पहुंच गईं। नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (NEA) की सक्रिय पहल पर आयोजित एक अहम बैठक में उद्यमियों ने अपनी वर्षों पुरानी परेशानियों को खुलकर रखा। बैठक में मौजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने न सिर्फ इन समस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि संबंधित विभागों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के निर्देश भी जारी किए।
उद्योगपतियों की पीड़ा: “पैसा दिया, लेकिन हक नहीं मिला”
बैठक के दौरान सबसे बड़ा मुद्दा इकोटेक-3 उद्योग केंद्र एक्सटेंशन का सामने आया, जहां एक उद्यमी को वर्ष 2016 में 450 वर्गमीटर का औद्योगिक प्लॉट आवंटित किया गया था। उद्यमी द्वारा सभी किस्तों का भुगतान समय पर करने के बावजूद, करीब 9 वर्षों तक उसे जमीन का वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया।
यह मामला सामने आते ही बैठक का माहौल गंभीर हो गया। उद्यमियों ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बताया, बल्कि यह भी कहा कि ऐसी स्थितियां निवेशकों के विश्वास को कमजोर करती हैं। इस पर एसीईओ ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि इस तरह के सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
अधूरी सड़कें बनी विकास की सबसे बड़ी रुकावट
उद्यमियों ने एक और बड़ी समस्या की ओर ध्यान दिलाया—औद्योगिक क्षेत्रों में अधूरी पड़ी सड़कों की। इकोटेक-3 क्षेत्र में मुख्य सड़क का निर्माण दो अलग-अलग स्थानों पर अधूरा पड़ा है, जिसके चलते वाहनों की आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है। कई उद्योगपतियों ने बताया कि कर्मचारियों, सप्लाई वाहनों और कच्चे माल की ढुलाई में रोजाना बाधाएं आती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इस पर एसीईओ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य को तुरंत गति दी जाए और जब तक स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लीज रेंट और किराया नीति पर उठे गंभीर सवाल
बैठक में उद्यमियों ने प्राधिकरण की लीज रेंट नीति पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि प्राधिकरण पूरे प्लॉट क्षेत्रफल पर लीज रेंट वसूलता है, जबकि कई मामलों में केवल भवन का एक छोटा हिस्सा ही किराए पर दिया गया होता है। उद्यमियों ने मांग रखी कि लीज रेंट केवल उसी हिस्से पर लिया जाए, जो वास्तव में उपयोग में है या किराए पर दिया गया है। इसके अलावा किराया अनुमति प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की भी मांग उठाई गई, ताकि उद्योगों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत मिल सके।
ट्रांसफर चार्ज और नियमों की जटिलता बनी बाधा
उद्योगपतियों ने ट्रांसफर चार्ज को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि वर्तमान शुल्क संरचना काफी अधिक है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। साथ ही “यूनिफाइड रेगुलेशन नीति” के कुछ प्रावधान ऐसे हैं, जो व्यावहारिक नहीं हैं और उद्योग संचालन में बाधा उत्पन्न करते हैं।
इस पर एसीईओ ने भरोसा दिलाया कि इन सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी और उद्योग हित में व्यवहारिक बदलाव किए जाएंगे, ताकि कारोबार को सुगम बनाया जा सके।
एसीईओ का सख्त रुख: 10 दिन में दिखेगा असर
बैठक का सबसे अहम और निर्णायक पहलू रहा एसीईओ का कड़ा रुख। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि:
सभी लंबित मामलों का समाधान 10 दिनों के भीतर किया जाए
जिन उद्यमियों को अब तक कब्जा नहीं मिला है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर कब्जा दिलाया जाए
सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को तुरंत ठीक किया जाए
यह निर्देश उद्यमियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में सामने आया है, जो लंबे समय से इन समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे थे।
वन टाइम बिल्डिंग बायलॉज: उद्योगों को मिलेगी राहत
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि सभी प्राधिकरणों के लिए एक समान “वन टाइम बिल्डिंग बायलॉज” लागू करने की तैयारी चल रही है। इससे निर्माण और संचालन से जुड़े नियमों को सरल बनाया जाएगा और उद्योगों को तेजी से कार्य शुरू करने में मदद मिलेगी।
अब वादों से आगे बढ़कर कार्रवाई की जरूरत
इस बैठक ने यह साबित कर दिया कि जब उद्यमी एकजुट होकर अपनी समस्याएं रखते हैं, तो प्रशासन को गंभीरता से सुनना पड़ता है। हालांकि अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव दिखता है। उद्योगपतियों को उम्मीद है कि इस बार केवल बैठकों और आश्वासनों तक बात सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वास्तविक बदलाव और तेज कार्रवाई देखने को मिलेगी, जिससे ग्रेटर नोएडा का औद्योगिक विकास नई गति पकड़ सके।



