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Breaking News : “हंसी के पीछे छुपा दर्द, जिम्मेदारियों से भरा जीवन और अचानक थम गई धड़कन”, 42 की उम्र में अधूरी रह गई एडवोकेट नीरज शर्मा की उजली कहानी, शोक में डूबा गौतमबुद्ध नगर, ABVP और भाजपा में थे सक्रिय, भाइयों के भाई” की पहचान, कभी किसी का बुरा नहीं किया ना ही सोची

दादरी, रफ़्तार टूडे। शनिवार की शाम गौतमबुद्ध नगर के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। खबर आई कि जिले के शासकीय अधिवक्ता (सिविल) एडवोकेट नीरज शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। मात्र 42 वर्ष की आयु में उनका अचानक निधन हो गया। यह समाचार जैसे ही जनपद में फैला, अदालतों के गलियारों से लेकर राजनीतिक दफ्तरों और सामाजिक संगठनों तक सन्नाटा पसर गया।
बताया गया कि शनिवार शाम करीब पांच बजे उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। परिजन तत्काल उन्हें मोहन स्वरूप हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें ग्रेटर नोएडा के कैलाश अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

एक अधिवक्ता नहीं, संवेदनशील व्यक्तित्व का अंत
एडवोकेट नीरज शर्मा केवल कानून के जानकार नहीं थे, बल्कि एक सहज, मृदुभाषी और सबको साथ लेकर चलने वाले इंसान थे। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे और परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते थे।
वे अपने पीछे माता-पिता, तीन भाइयों, पत्नी और तीन मासूम बच्चों—14 और 12 वर्ष की दो बेटियों तथा पांच वर्षीय पुत्र—को छोड़ गए हैं। इतनी कम उम्र में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना पूरे समाज को विचलित कर देने वाला है।


छात्र राजनीति से सामाजिक नेतृत्व तक का सफर
नीरज शर्मा ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad से की थी। छात्र जीवन में ही वे संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे और युवाओं के बीच लोकप्रिय बने। बाद में उन्होंने Bharatiya Janata Party में सक्रिय भूमिका निभाई और जिला कोषाध्यक्ष व जिला उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व संभाले।
वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद शासन ने उनकी निष्ठा और कर्तव्यपरायणता को देखते हुए उन्हें जनपद का सिविल शासकीय अधिवक्ता नियुक्त किया। अदालत में उनकी तैयारी, तथ्यों की स्पष्ट समझ और विनम्र व्यवहार ने उन्हें विधि समुदाय में विशिष्ट पहचान दिलाई।

अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब
रविवार सुबह बिसहड़ा रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में न्यायिक, प्रशासनिक और राजनीतिक जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ Mahesh Sharma, विधायक तेजपाल नागर, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा, जिलाधिकारी मेधा रूपम, बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज भाटी सहित हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। हर चेहरा गमगीन था, हर आंख नम थी।

भाइयों के भाई” की पहचान
नीरज शर्मा को लोग केवल एक पद या पहचान से नहीं जानते थे, बल्कि उनके आत्मीय स्वभाव के कारण याद करते थे। वे हर व्यक्ति की मदद के लिए तत्पर रहते थे। किसी का कानूनी मार्गदर्शन करना हो या व्यक्तिगत संकट में साथ खड़ा होना—वे हमेशा आगे रहते थे।
रफ़्तार टूडे परिवार के लिए भी यह क्षति बेहद व्यक्तिगत है। वे केवल एक अधिवक्ता नहीं, बल्कि बड़े भाई जैसे थे। उनकी मुस्कान, उनका आत्मीय व्यवहार और उनका सहज अंदाज अब स्मृतियों में बस गया है।

जनपद की अपूरणीय क्षति
आज गौतमबुद्ध नगर शोक में डूबा है। अदालतों में कामकाज के बीच भी खामोशी महसूस की जा रही है। राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर उनके योगदान को याद किया जा रहा है।
नीरज शर्मा का जीवन भले ही छोटा रहा, लेकिन उन्होंने अपने कर्म, व्यवहार और सादगी से जो छाप छोड़ी, वह हमेशा जीवित रहेगी। वे एक ईमानदार अधिवक्ता, सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता और स्नेही भाई के रूप में याद किए जाएंगे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे।
🕯️ श्रद्धांजलि

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