Dronacharya School News : गौतमबुद्ध नगर में जिला स्तरीय ‘विकसित भारत युवा संसद 2025–26’ का भव्य आयोजन लोकतंत्र, आपातकाल और युवाओं की भूमिका पर गूंजे विचार, आपातकाल से मिले सबक आज भी प्रासंगिक डॉ. संजय मयूख
संवाद और जवाबदेही की संस्कृति जरूरी: डॉ. संगीता मंगेश

गौतमबुद्धनगर, रफ़्तार टूडे। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी पहल ‘माय भारत’ के संयुक्त तत्वावधान में विकसित भारत युवा संसद 2025–26 का जिला स्तरीय कार्यक्रम बुधवार को गुरु द्रोणाचार्य ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, ग्रेटर नोएडा में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना रहा।
प्रतिष्ठित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजय मयूख रहे। उनके साथ पार्टी प्रवक्ता अनुरुद्ध प्रताप सिंह एवं अंतरराष्ट्रीय योग गुरु डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
संस्थान की ओर से निदेशक डॉ. संगीता मंगेश, रजिस्ट्रार डॉ. शैलेश सिंह, युवा संसद एवं एनएसएस समन्वयक डॉ. ममता भारद्वाज तथा माय भारत के उपनिदेशक शिवेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।
500 से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा
गौतमबुद्ध नगर जनपद से 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के 500 से अधिक युवाओं ने माय भारत पोर्टल के माध्यम से इस प्रतियोगिता में पंजीकरण कराया। जिला स्तरीय चरण में प्रतिभागियों ने “आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सबक” विषय पर अपने विचार रखे। युवाओं ने ऐतिहासिक संदर्भों, संवैधानिक मूल्यों, नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र की मजबूती पर गंभीर एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुतियां दीं।
राज्य स्तर के लिए प्रतिभागियों का चयन
जिला स्तरीय मूल्यांकन के बाद प्रथम स्थान – अनिरुद्ध त्यागी
द्वितीय स्थान – वेदांत व्यास
तृतीय स्थान – हर्षिता दरग को प्राप्त हुआ। ये तीनों प्रतिभागी आगामी राज्य स्तरीय युवा संसद, जो कि विधानसभा परिसर में आयोजित की जाएगी, में गौतमबुद्ध नगर का प्रतिनिधित्व करेंगे।
राज्य स्तर से चयनित शीर्ष तीन प्रतिभागी आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर की युवा संसद में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसका आयोजन भारतीय संसद में प्रस्तावित है।
आपातकाल से मिले सबक आज भी प्रासंगिक: डॉ. संजय मयूख
मुख्य अतिथि डॉ. संजय मयूख ने अपने संबोधन में कहा कि
“आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जो हमें निरंतर सतर्क रहने की सीख देता है। लोकतंत्र की रक्षा केवल संस्थाओं की नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि युवा संसद जैसे मंच युवाओं में आलोचनात्मक सोच, संवैधानिक समझ और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं, जो विकसित और समावेशी भारत के निर्माण की नींव है।
सजग नागरिक ही लोकतंत्र की असली ताकत: अनुरुद्ध प्रताप सिंह
विशिष्ट अतिथि अनुरुद्ध प्रताप सिंह ने कहा कि “आपातकाल के 50 वर्ष हमें यह याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है जब नागरिक सजग, जागरूक और सवाल पूछने वाले हों।”
उन्होंने कहा कि युवा संसद मंच युवाओं को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों को समझने का सशक्त अवसर प्रदान करता है।
संवाद और जवाबदेही की संस्कृति जरूरी: डॉ. संगीता मंगेश
संस्थान की निदेशक डॉ. संगीता मंगेश ने कहा कि
“आपातकाल का दौर लोकतांत्रिक संस्थाओं और कानून के शासन के महत्व को रेखांकित करता है। युवा संसद जैसे मंच संवाद, विचार-विमर्श और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करते हैं, जिससे अतीत की गलतियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।”
युवा ही लोकतंत्र के सशक्त संरक्षक: डॉ. शैलेश सिंह
रजिस्ट्रार डॉ. शैलेश सिंह ने कहा कि “लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने के लिए सक्रिय नागरिक आवश्यक हैं। गौतमबुद्ध नगर के युवा विचार-विमर्श, जागरूकता और सहभागिता के माध्यम से भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।”
युवा संसद—विकसित भारत की दिशा में सशक्त कदम
कार्यक्रम का समापन राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक चेतना और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के संकल्प के साथ हुआ। विकसित भारत युवा संसद 2025–26 ने यह संदेश दिया कि जागरूक, शिक्षित और सक्रिय युवा ही भारत के लोकतंत्र और भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं।



