Sharda University Jyoti case News : शारदा यूनिवर्सिटी कांड पर उठा जनाक्रोश, आरडब्ल्यूए फेडरेशन ने सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन!, “बेटी बचाओ” के नारे को लगा धक्का, न्याय के लिए सड़कों पर उतरे ग्रेटर नोएडा के नागरिक

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में बीडीएस की छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या से जुड़ा मामला अब सिर्फ एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहा। यह अब एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
शनिवार को फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूएज़ ग्रेटर नोएडा के एक प्रतिनिधिमंडल ने संगठन के उपाध्यक्ष श्री आलोक नागर और महासचिव श्री ऋषिपाल जी के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर श्री मनीष वर्मा जी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख मांगें
ज्ञापन में कई सशक्त और ठोस बिंदुओं के साथ, एक प्रशासनिक एवं सामाजिक समिति के गठन की मांग की गई, जो छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या जैसे गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच और भविष्य में छात्रों की समस्याओं की समय पर सुनवाई सुनिश्चित कर सके।
“पुलिस कार्रवाई पर सवाल, संस्थान पर दबाव में काम करने का आरोप”
फेडरेशन के पूर्व महासचिव और विधिक सलाहकार श्री दीपक भाटी (एड.) ने इस मौके पर कहा:
“हम इस दुखद घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। पुलिस द्वारा छात्रों के विरोध को बल प्रयोग से दबाना, शारदा यूनिवर्सिटी के दबाव में कार्य करने का स्पष्ट संकेत है। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन अन्य छात्रों पर भी अनैतिक दबाव बना रहा है। यह गंभीर चिंता का विषय है।”
दो और आत्महत्याओं का संदर्भ, पहले भी रही घटनाएं
ज्ञापन में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि यूनिवर्सिटी में इससे पहले दो छात्राओं की आत्महत्या हो चुकी है। मगर उन मामलों में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, न ही समाज को न्याय मिला। यह रवैया बताता है कि संस्थान में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हो चुकी है।
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति का मूल्यांकन आवश्यक
फेडरेशन ने जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध किया कि
“ज्योति की आत्महत्या की गहन जांच के साथ-साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे अन्य छात्रों की मानसिक स्थिति, शैक्षिक वातावरण और उत्पीड़न की आशंकाओं का मूल्यांकन किया जाए।”
इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि एक संयुक्त प्रशासनिक और सामाजिक समिति का गठन किया जाए जिसमें रिटायर्ड IAS, IPS, न्यायिक अधिकारी, शिक्षाविद और समाजसेवी शामिल हों।
मनोरोग और उत्पीड़न मामलों में बने नीति-संरचना
यह प्रस्ताव भी रखा गया कि भविष्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान में अगर छात्र उत्पीड़न का शिकार होते हैं तो उनके लिए एक स्वतंत्र हेल्पलाइन, काउंसलिंग टीम और शिकायत तंत्र सक्रिय रूप से काम करे। यह न केवल छात्रों की मानसिक सेहत को मजबूत करेगा बल्कि संस्थानों को जवाबदेह भी बनाएगा।
सामाजिक जिम्मेदारियों की मिसाल बना फेडरेशन
शहर की आरडब्ल्यूए फैडरेशन ने साबित कर दिया है कि सामाजिक संगठन केवल गेट और लाइट की राजनीति नहीं करते, बल्कि जरूरत पड़ने पर जनहित और न्याय के लिए भी आवाज़ उठाते हैं।
यह ज्ञापन ना केवल ज्योति को न्याय दिलाने की दिशा में उठाया गया कदम है, बल्कि प्रशासन को झकझोरने वाला दस्तावेज़ भी है।
महिलाओं की गरिमा और बेटी बचाओ अभियान को झटका
ज्योति की आत्महत्या से सिर्फ एक परिवार नहीं टूटा, बल्कि यह घटना बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ जैसे राष्ट्रीय अभियान पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने कहा:
“यह घटना न केवल शारदा यूनिवर्सिटी की विफलता है, बल्कि पूरे सिस्टम की जिम्मेदारी है। अगर हमने अब आंखें मूंद लीं तो ना जाने कितनी और बेटियां इसी तरह इस तंत्र की बलि चढ़ जाएंगी।”
जिलाधिकारी ने दिया निष्पक्ष कार्यवाही का आश्वासन
श्री मनीष वर्मा, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर ने प्रतिनिधिमंडल को सावधानीपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि
“ज्योति शर्मा की आत्महत्या के प्रकरण में पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता से कार्यवाही की जाएगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
प्रतिनिधिमंडल में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
इस प्रतिनिधिमंडल में शहर के अनेक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, रेजिडेंट्स और जागरूक नागरिक उपस्थित रहे:
- श्री आलोक साध
- श्री ओमप्रकाश कसाना
- श्री सतीश शर्मा
- श्री दिनेश भाटी
- श्री प्रशांत राठी
- श्रीमती रूपा गुप्ता
- श्रीमती पिंकी त्रिपाठी
- श्री पंकज राणा
- श्री जितेंद्र मावी
- श्री कर्मवीर फौजी
- श्री तिलकराम भाटी
- श्री भुवनेश गर्ग
- श्री वीरेश बैंसला
- श्री रमाकांत दीक्षित
- श्री विनय शर्मा
- श्री पंकज शर्मा
- श्री देवराज नागर
- श्री रवि कसाना
- श्री जरजिश खान आदि।
इन सभी लोगों ने ज्योति के परिवार के प्रति संवेदना जताई और उनके साथ न्याय के लिए संघर्ष की एकजुटता दिखाई।
अब रुकना नहीं है – ये जन-जागरण का अवसर है!
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूएज़ के ज्ञापन से यह बात स्पष्ट होती है कि अब चुप्पी नहीं चलेगी। यह घटना केवल ज्योति की नहीं, हर अभिभावक, हर छात्र और हर संवेदनशील नागरिक की है।
अब समय आ गया है कि संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए और हर छात्र को मिले सम्मानजनक, सुरक्षित और समावेशी शिक्षा का वातावरण।



