Breaking News : सूरजपुर का सच, टूटी सड़कों, गंदगी और जाम में फंसा कारोबार, व्यापारी बोले “क्या हमारी सुनने वाला कोई है?”, जलभराव और जाम – हर दिन की नई मुसीबत, सूरजपुर का दर्द कब सुनेगा ग्रेनो प्राधिकरण और प्रशासन?

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। गौतमबुद्धनगर जिले के सूरजपुर क्षेत्र की हालत इन दिनों इतनी बदतर हो चुकी है कि यहां के व्यापारी और स्थानीय लोग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कभी ग्रेटर नोएडा का अहम व्यावसायिक केंद्र माना जाने वाला सूरजपुर आज टूटी सड़कों, जलभराव, नालियों की दुर्दशा और गंदगी के कारण पहचान खोता जा रहा है। सूरजपुर व्यापार मंडल ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
टूटी सड़कें बनीं सूरजपुर की सबसे बड़ी समस्या
सूरजपुर के मेन रोड का हाल यह है कि जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। बरसात के दिनों में ये गड्ढे छोटे तालाबों में बदल जाते हैं और लोगों को इसी के बीच से गुजरना पड़ता है। दुकानदार बताते हैं कि ग्राहकों को यहां तक पहुंचने में भारी दिक्कत होती है, जिसके चलते बिक्री पर सीधा असर पड़ा है।
जलभराव और जाम – हर दिन की नई मुसीबत
बरसात के मौसम में सूरजपुर कस्बे की मुख्य सड़कें ताल तलैया बन जाती हैं। सीवर का पानी नालियों से बहकर सड़कों पर फैल जाता है और घंटों लंबा जाम लग जाता है। यह जाम न सिर्फ व्यापारियों की समस्या है बल्कि स्कूली बच्चों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए भी सिरदर्द बन गया है।
गंदगी और संक्रमण का खतरा
सूरजपुर की गलियों और मुख्य बाजार में गंदगी का अंबार लगा रहता है। दुकानों के आगे कूड़े के ढेर बदबू फैलाते हैं। मच्छरों की भरमार से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय निवासी कहते हैं कि प्रशासन केवल कागजों पर सफाई करता है, जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा।
ट्रैफिक प्रबंधन पूरी तरह फेल
व्यापारियों का कहना है कि मेन मार्केट में पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। अव्यवस्थित ढंग से खड़े वाहन पहले से ही तंग सड़कों पर जाम का कारण बनते हैं। इस जाम से जहां ग्राहकों का आना-जाना बाधित होता है, वहीं पुलिस और प्रशासन भी इस ओर ध्यान नहीं देता।

व्यापारियों का गुस्सा और प्रशासन से सवाल
सूरजपुर व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि “हम कई बार जिला प्रशासन और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को ज्ञापन सौंप चुके हैं। हर बार आश्वासन मिलता है लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो व्यापारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”
व्यापारियों का कहना है कि बाजार का माहौल खराब होने से कारोबार 40-50% तक प्रभावित हुआ है और यह स्थिति लंबे समय तक रही तो छोटे दुकानदारों का जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा।
स्थानीय निवासियों की मजबूरी – गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है
सूरजपुर के आम नागरिकों का कहना है कि गलियों और मुख्य सड़क पर हर समय गंदा पानी भरा रहता है। स्थानीय निवासी एडवोकेट अतुल शर्मा ने बताया कि वे कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है। बच्चों को स्कूल भेजना और बुजुर्गों का अस्पताल पहुंचना तक कठिन हो गया है।
सूरजपुर का दर्द कब सुनेगा प्राधिकरण और सिस्टम?
आज सूरजपुर की हालत साफ दिखाती है कि यहां के लोग और व्यापारी रोजमर्रा की समस्याओं से जूझने को मजबूर हैं। टूटी सड़कें, गंदगी, जाम और जलभराव ने सूरजपुर को जीने लायक जगह नहीं छोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि जागेंगे या सूरजपुर यूं ही बदहाली की मार झेलता रहेगा?
बीमारियों का खतरा – जनता डरी सहमी
गंदगी और जलभराव ने लोगों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमण रोग फैलने की आशंका हर दिन बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसी स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बड़े पैमाने पर बीमारी फैल सकती है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधि चुप क्यों?
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब बार-बार शिकायत की जा रही है तो प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? चुनाव के वक्त तो नेता वादों की झड़ी लगाते हैं, लेकिन अब सूरजपुर की समस्याओं पर सबकी चुप्पी साधी हुई है।
ज्ञापन देने वालों में भाजपा के जिले के पूर्व महामंत्री लक्ष्मण सिंहल, जिला मंत्री सत्यपाल शर्मा, कर्मवीर आर्य, सुभाष राणा, योगेश कुमार उपाध्यायय, रामदेव अग्रवाल, सचिन, सिकंदर कुमार, विशाल, सचिन, सर्वेश शर्मा, अजित मुद्ग़ल, मुकेश समेत दर्जनों लोग मौजूद थे।



