Eros Sampurnam Society News : 10 हफ्तों से गूंज रहा न्याय का स्वर ईरोस सम्पूर्णम सोसाइटी के निवासियों का शांतिपूर्ण आंदोलन, अब कानूनी जंग तेज, सांसद और प्राधिकरण तक बात पहुंची, डीएम कोर्ट में मामला AOA चुनाव का मुद्दा

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सबसे चर्चित सोसाइटियों में से एक ईरोस सम्पूर्णम (Eros Sampoornam), सेक्टर-2 में रहने वाले निवासियों का संघर्ष अब 10वें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। लगातार समस्याओं से जूझ रहे इन परिवारों ने शनिवार को अपनी 10वीं सप्ताहिक बैठक आयोजित की और यह साफ कर दिया कि अब वे बिल्डर की मनमानी और उदासीनता के खिलाफ कानूनी रास्ते पर पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेंगे। ईरोस सम्पूर्णम सोसाइटी का आंदोलन आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निवासियों की एकता और हिम्मत का प्रतीक बन चुका है। यह आंदोलन सिर्फ एक सोसाइटी का मामला नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की हाउसिंग सोसाइटीज़ के अधिकारों की लड़ाई का हिस्सा बन गया है।
10 हफ्तों से लगातार जारी यह शांतिपूर्ण संघर्ष यह संदेश देता है कि अगर लोग एकजुट हों तो किसी भी बिल्डर या संस्था की मनमानी को चुनौती दी जा सकती है। और न्याय की राह भले कठिन हो, पर अंत में सच की जीत होती है।
10 हफ्तों से जारी संघर्ष – क्यों उठी यह आवाज़?
पिछले दो महीनों से अधिक समय से इस सोसाइटी के निवासी हर सप्ताह बैठक कर रहे हैं। आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। निवासियों का कहना है कि वे अब तक धैर्य और संयम से अपनी बात रख रहे हैं। उनकी मांगें बिल्डर द्वारा वादे पूरे करने और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं।
लेकिन बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी रही।
निवासियों की मुख्य समस्याएं
बैठक में चार बड़े मुद्दे सबसे प्रमुख रहे VCAM चार्जेस की अवैध वसूली बिल्डर पर आरोप है कि निवासियों से मनमाने तरीके से VCAM (Variable Common Area Maintenance) चार्जेस वसूले जा रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह अवैध है।
डीजी पावर की कमी –
बार-बार बिजली जाने की स्थिति में डीजी (DG) बैकअप पर्याप्त नहीं है। कई बार लिफ्ट, पानी मोटर और बेसिक सुविधाएं ठप हो जाती हैं।
पानी की गंभीर समस्या –
निवासियों को साफ और नियमित पानी की सप्लाई नहीं मिल रही। गर्मियों में स्थिति और बिगड़ जाती है।
खराब रखरखाव सेवाएं –
सोसाइटी की साफ-सफाई, गार्डनिंग, सिक्योरिटी और बेसिक मेंटेनेंस पर बिल्डर का रवैया बेहद लापरवाह बताया जा रहा है।
एकजुटता का प्रतीक बना आंदोलन
निवासियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत या समूह विशेष का नहीं बल्कि पूरे समाज की एकजुट आवाज़ है। हर उम्र वर्ग के लोग, बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक, इसमें शामिल हैं। बैठक में बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया गया कि यह संघर्ष न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए है।
आंदोलन की विशेषता यह है कि इसमें किसी तरह की हिंसा या अराजकता नहीं, बल्कि कानूनी और शांतिपूर्ण रास्ता अपनाया जा रहा है।
अब कानूनी लड़ाई पर फोकस
बैठक में निवासियों ने साफ किया कि अब लड़ाई का अगला चरण अदालतों और प्रशासनिक संस्थाओं में लड़ा जाएगा।
पहले से दर्ज केस
बिल्डर के खिलाफ दो समूह उपभोक्ता केस (Consumer Cases) दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें Ajay Enterprises, SMSPL और NPCL को पार्टी बनाया गया है। अगली सुनवाई 3 अक्टूबर 2025 को उपभोक्ता अदालत में होगी।
डीएम कोर्ट में मामला
जुलाई 2025 के तीसरे सप्ताह में कम्युनिटी सेंटर में प्रवेश को लेकर डीएम कोर्ट में शिकायत दर्ज की गई। फिलहाल अंतरिम आदेश का इंतजार है।
सांसद और प्राधिकरण तक बात पहुंची
सांसद डॉ. महेश शर्मा की सिफारिश पर आंदोलन से जुड़े सभी मुद्दे ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ तक भेजे गए हैं। उम्मीद है कि प्राधिकरण स्तर पर भी कार्यवाही होगी।
AOA चुनाव का मुद्दा
सोसाइटी में AOA (Apartment Owners Association) का चुनाव पिछले 8 महीनों से लटका हुआ है। निवासियों ने डेप्युटी रजिस्ट्रार वैभव कुमार से व्यक्तिगत मुलाकात कर नए चुनाव नोटिस जारी करने की मांग की है।
उनका कहना है कि AOA बनने से निवासियों की आवाज़ और मज़बूत होगी और बिल्डर को जवाबदेह ठहराना आसान होगा।
निवासियों का बयान – सीमित साधनों में बड़ी लड़ाई
निवासियों ने मीडिया से बातचीत में कहा “हम सीमित संसाधनों में भी पूरी ताकत से लड़ रहे हैं। हमारा संघर्ष न्याय और पारदर्शिता के लिए है। यह आंदोलन हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने के लिए है।”
मीडिया और समाज से अपील
बैठक के अंत में सभी ने एक स्वर में कहा कि मीडिया इस आंदोलन को निष्पक्ष रूप से उजागर करे, ताकि प्रशासन और सरकार पर दबाव बने और बिल्डर जवाबदेह बने। साथ ही, अन्य सोसाइटियों के निवासियों से भी अपील की गई कि वे भी अपने अधिकारों के लिए इसी तरह संगठित और कानूनी रास्ते अपनाएं।
आगे की रणनीति
3 अक्टूबर की कंज्यूमर कोर्ट सुनवाई के बाद आंदोलन की दिशा तय होगी। यदि बिल्डर अभी भी झुकता नहीं है तो कानूनी मोर्चा और व्यापक किया जाएगा। AOA चुनाव को तेज़ी से करवाने की कोशिश जारी रहेगी।



