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Greater Noida Authority News : “अब नहीं होगा पानी-पानी”, मंडी श्यामनगर में जलभराव की समस्या से मिली बड़ी राहत, प्राधिकरण की तत्परता बनी मिसाल, कच्चा नाला बना समाधान की कुंजी, दो किलोमीटर तक बनी निकासी लाइन, एसीईओ सुमित यादव ने दी जानकारी: "एक तरफ काम पूरा, दूसरी तरफ खुदाई जारी"


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।

बारिश के मौसम में जब ज्यादातर इलाकों में जलभराव और सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात देखने को मिलते हैं, ऐसे में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक सराहनीय कार्य करते हुए मंडी श्यामनगर के लोगों को लंबे समय से चली आ रही जलभराव की समस्या से राहत दिला दी है।

इस क्षेत्र के निवासियों को अब हर बारिश के बाद घरों और दुकानों में घुसते पानी से जूझना नहीं पड़ेगा, क्योंकि अब बारिश का पानी कच्चे नाले के जरिए सीधे निकासी मार्ग तक पहुंच रहा है।


शिकायत से समाधान तक: प्रशासन की तत्परता बनी राहत का कारण

मंडी श्यामनगर के निवासी लंबे समय से सड़क पर जमा पानी और ड्रेनेज की कमी से परेशान थे। हर वर्ष बारिश के मौसम में यह समस्या इतनी गंभीर हो जाती थी कि लोगों का आवागमन बाधित हो जाता था, और दुकानें बंद करनी पड़ती थीं

स्थानीय निवासियों ने इस समस्या को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से कई बार संपर्क किया। अंततः सीईओ एन. जी. रवि कुमार के निर्देश पर एसीईओ सुमित यादव ने स्वयं स्थल का मुआयना किया और परियोजना विभाग को तत्काल कार्यवाही के आदेश दिए


कच्चा नाला बना समाधान की कुंजी, दो किलोमीटर तक बनी निकासी लाइन

प्राधिकरण के वर्क सर्किल-8 के वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह और उनकी टीम ने जलभराव के कारणों का मौके पर गहन अध्ययन किया और तय किया गया कि मंडी श्यामनगर से बरसाती नाले तक कच्चे नाले का निर्माण किया जाएगा।

तत्काल कार्रवाई के तहत करीब दो किलोमीटर लंबा कच्चा नाला रोड के एक तरफ खुदवाया गया, जिससे अब बारिश का पानी बिना किसी रुकावट के बहकर बरसाती नाले तक पहुंच रहा है

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार इस मानसून में उन्हें पानी में फंसे बिना चलने का अवसर मिला है, और यह बदलाव न केवल राहत का प्रतीक है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता का प्रमाण भी।


एसीईओ सुमित यादव ने दी जानकारी: “एक तरफ काम पूरा, दूसरी तरफ खुदाई जारी”

एसीईओ सुमित यादव ने बताया कि—

“मंडी श्यामनगर क्षेत्र में दो तरफ से जलभराव होता था।
एक साइड का नाला पूरा हो चुका है, जिससे वहां से पानी निकलने में कोई समस्या नहीं आ रही।
दूसरी साइड का कार्य तेजी से किया जा रहा है और जल्द ही पूरा हो जाएगा।”


जलभराव से कैसे था जीवन अस्त-व्यस्त? स्थानीय निवासियों ने बताया दर्द

मंडी श्यामनगर के निवासी रामवीर सिंह का कहना है—

“हर साल बारिश के समय हमारा पूरा मोहल्ला तालाब बन जाता था। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, दुकानों में पानी भर जाता, और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता। अब पहली बार लगता है कि प्रशासन ने हमारी बात सुनी है।”

वहीं, स्थानीय व्यापारी राजकुमार शर्मा ने कहा—

“प्राधिकरण को धन्यवाद देना चाहेंगे कि उन्होंने इतनी जल्दी और असरदार व्यवस्था कराई, जिससे हम अब बिना डर के अपना व्यवसाय कर पा रहे हैं।”


जल प्रबंधन का यह मॉडल क्यों है अनुकरणीय?

1️⃣ शिकायत मिलने के 72 घंटों के भीतर स्थल निरीक्षण
2️⃣ स्थानीय भूगोल और जलनिकासी प्रणाली का अध्ययन
3️⃣ कम लागत और तेज़ क्रियान्वयन वाला समाधान – कच्चा नाला
4️⃣ स्थायी समाधान की दिशा में पहला मजबूत कदम

यह पूरा मॉडल दर्शाता है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए तो गंभीर समस्याओं का समाधान बेहद सरल तरीके से किया जा सकता है।


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एसीईओ सुमित यादव ने दी जानकारी: “एक तरफ काम पूरा, दूसरी तरफ खुदाई जारी”

क्या इससे ग्रेटर नोएडा के अन्य क्षेत्र भी ले सकते हैं सबक?

बिलकुल। ग्रेटर नोएडा के कई अन्य गांव और सेक्टर जैसे—रोहीनिया, जलालपुर, बीटा-2, साइट-5 आदि इलाकों में भी हर साल जलभराव की समस्या आती है। यदि वहां भी मंडी श्यामनगर जैसे नाले बनाए जाएं, तो समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।


रफ़्तार टुडे रिपोर्ट कार्ड:

विषयविवरण
📍स्थानमंडी श्यामनगर, बिलासपुर के पास, ग्रेटर नोएडा
🚧 समस्यावर्षा जल निकासी की कमी, जलभराव
🧑‍💼 कार्रवाईसीईओ के निर्देश, एसीईओ का स्थल निरीक्षण
🧑‍🔧 कार्यान्वयनवर्क सर्किल-8 द्वारा नाला खुदाई
📏 दूरीलगभग 2 किमी कच्चा नाला
🔧 स्थितिएक साइड पूरा, दूसरी साइड कार्य प्रगति पर
🎯 लाभजलभराव से राहत, जीवन सुगम

निष्कर्ष: “हर समस्या का हल है—ज़रूरत है सुनने और करने की”

मंडी श्यामनगर की कहानी यह बताती है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर समाधान चाहते हैं, तो रास्ता निकल ही आता है।
कच्चा नाला कोई बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं था, लेकिन इसका असर पूरे मोहल्ले के जीवन पर पड़ा। यह एक “स्मार्ट एक्शन फॉर स्मार्ट सिटी” की मिसाल है।


रफ़्तार टुडे आपसे अपील करता है:

यदि आपके क्षेत्र में भी जलभराव की समस्या है, तो स्थानीय प्राधिकरण, ग्राम पंचायत या नगर निकाय को शिकायत अवश्य दर्ज कराएं।
समय पर सूचना देने और फॉलोअप करने से ही सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।


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