UP RTE Education News : "तीन महीने से हाथ में आवंटन पत्र, फिर भी दरवाज़े बंद!, आरटीई में चयनित 1400 बच्चे स्कूल प्रवेश को तरस रहे हैं", शिक्षा विभाग का नोटिस और सख्ती की चेतावनी, ग्रेटर नोएडा के डीपीएस 3 सहित तीन कॉलेजों को नोटिस

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
देश में शिक्षा को हर बच्चे का मौलिक अधिकार घोषित करने वाला आरटीई अधिनियम (Right to Education Act 2009) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इसकी वजह है – वो करीब 1400 बच्चे, जिन्हें तीन महीने पहले स्कूल आवंटित हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें दाखिला नहीं दिया गया है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन 1400 सपनों का गला घोंटने जैसा है, जो शिक्षा के भरोसे उड़ान भरना चाहते थे।
आरटीई – अधिनियम तो बना, लेकिन ज़मीन पर ध्वस्त है व्यवस्था
आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम कहता है कि देश के हर निजी स्कूल को अपनी कुल सीटों में से 25% सीटें समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होंगी। इसके तहत इस वर्ष उत्तर प्रदेश के 1040 प्राइवेट स्कूलों में 16,516 सीटों पर आवेदन मांगे गए थे। इस प्रक्रिया के अंतर्गत 8,200 से ज्यादा बच्चों ने ऑनलाइन आवेदन किया, और लॉटरी सिस्टम के जरिए 4,267 बच्चों को आवंटन पत्र सौंप दिए गए।
लेकिन असल मुसीबत यहीं से शुरू हुई।
तीन महीने बाद भी स्कूल की चौखट तक नहीं पहुंच सके नन्हे कदम
जिन बच्चों को स्कूल अलॉट हो चुके थे, उनके हाथों में आवंटन पत्र जरूर था, लेकिन स्कूल प्रशासन की बेरुख़ी और लापरवाही ने उन्हें अब तक शिक्षा की पहली सीढ़ी पर चढ़ने ही नहीं दिया। करीब 1400 बच्चों को स्कूलों में दाखिला नहीं मिला है, जबकि ये पूरी प्रक्रिया अप्रैल-मई के महीनों में ही पूरी हो चुकी थी।
अभिभावकों के लिए यह स्थिति किसी सदमे से कम नहीं है। वे स्कूलों के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं, लेकिन स्कूल प्रशासन हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें लौटा देता है।
नाम बड़े, लेकिन काम सिफ़र! डीपीएस नॉलेज पार्क-5 जैसे स्कूल भी घेरे में
अभिभावकों की बढ़ती शिकायतों के बाद जब शिक्षा विभाग ने जांच की, तो चौंकाने वाली बात सामने आई। डीपीएस नॉलेज पार्क-5, रायमिल स्कूल, और लॉयड इंटरनेशनल स्कूल जैसे प्रतिष्ठित नाम इन 1400 बच्चों को दाखिला देने से इंकार कर रहे हैं।
इन स्कूलों को जब आरटीई के तहत लॉटरी में बच्चे आवंटित किए गए थे, तब उन्होंने सहमति दी थी। लेकिन अब दाखिला देने से बचते हुए वे प्रशासनिक या तकनीकी कारणों का हवाला दे रहे हैं, जो सीधे-सीधे अधिनियम की अवमानना है।
शिक्षा विभाग का नोटिस और सख्ती की चेतावनी
प्रकरण सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तीनों स्कूलों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि इन स्कूलों ने बच्चों को प्रवेश नहीं दिया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम प्रशासन और डिप्टी डीईओ ने इस मुद्दे पर डीएम कार्यालय में विशेष बैठक की, जिसमें स्कूल प्रतिनिधियों, अभिभावकों और शिक्षा अधिकारियों को बुलाया गया।
बैठक में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि ऐसे स्कूल जो आरटीई के तहत दाखिला देने में टालमटोल कर रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द निर्देशित किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने पर उनकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़! क्या ये व्यवस्था की असफलता नहीं?
शिक्षा विभाग की लापरवाही और स्कूलों की मनमानी ने यह साबित कर दिया है कि आरटीई कानून केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है। जिन बच्चों का स्कूल में दाखिला नहीं हो पा रहा, वे या तो शिक्षा से पूरी तरह वंचित हैं, या फिर महंगे निजी स्कूलों के बाहर खड़े होकर केवल आशा की ओर देख रहे हैं।
कुछ बच्चों ने पास के सरकारी स्कूलों में एडमिशन ले लिया है, लेकिन यह आरटीई की मूल भावना के खिलाफ है, क्योंकि सरकार ने इसके लिए अलग बजट और प्रक्रिया तैयार की है, ताकि निजी संस्थानों में भी सामाजिक समानता बनी रहे।
RTE का उद्देश्य – लेकिन हकीकत है बेहद कड़वी
अधिनियम का उद्देश्य:
- गरीब और वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाना
- समाज में शैक्षिक असमानता को खत्म करना
- निजी स्कूलों में समान अवसर देना
❌ ज़मीनी सच्चाई:
- स्कूलों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं
- बच्चों को स्कूल से बाहर किया जा रहा है
- शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग बेहद कमज़ोर है
रफ़्तार टुडे की अपील – अब चुप रहने का वक्त नहीं
यदि आपके बच्चे को आरटीई के तहत आवंटन पत्र मिल चुका है और अभी तक प्रवेश नहीं मिला है, तो आप जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीएम कार्यालय, या शिकायत पोर्टल पर संपर्क करें।
आप चाहें तो अपनी शिकायत www.rteportal.upsdc.gov.in पर दर्ज भी कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु – एक नज़र में:
✔️ 16,516 सीटों के लिए 1040 स्कूलों में आवेदन
✔️ 8,200 बच्चों ने किया ऑनलाइन आवेदन
✔️ 4,267 बच्चों को अलॉट हुए स्कूल
✔️ 1400 बच्चों को अब तक नहीं मिला दाखिला
✔️ डीपीएस, रायमिल और लॉयड स्कूल को नोटिस
✔️ स्कूलों को चेतावनी – जल्द दाखिला दो वरना कार्रवाई तय
✔️ शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर
समाप्ति संदेश: शिक्षा की चौखट पर खड़ा बच्चा पूछ रहा है – मेरा दोष क्या है?
यह केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं, देश के भविष्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है। बच्चों को शिक्षा का अधिकार देना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
अब समय है कि हम मौन तोड़ें, आवाज़ उठाएं और अपने अधिकारों को प्राप्त करें।
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