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Samajwadi Party News : “AC हॉल में ‘समाजवाद’ की दावत!, दादरी के सम्मान समारोह ने सपा में छेड़ा संग्राम, अपने ही हुए आमने-सामने, ”रैली के बाद ‘सम्मान’ बना विवाद, सोशल मीडिया से संगठन तक तेज हुई गुटबाज़ी की आंच

दादरी, ग्रेटर नोएडा रफ़्तार टूडे । दादरी में 29 मार्च को आयोजित समाजवादी पार्टी की ‘समानता भाईचारा रैली’ के बाद अब पार्टी के भीतर सियासी घमासान खुलकर सामने आ गया है। रैली के बाद आयोजित मासिक बैठक और सम्मान समारोह ने जहां एक ओर संगठन को मजबूत करने का मंच देना था, वहीं अब वही कार्यक्रम गुटबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का कारण बनता नजर आ रहा है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता, जिनके बीच अब खुलकर मतभेद सामने आने लगे हैं।

“सोशल मीडिया बना नया अखाड़ा, अपने ही नेताओं पर हमले”
इस पूरे विवाद ने अब सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पर भी तूल पकड़ लिया है। पार्टी से जुड़े ही कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा खुलेआम पोस्ट लिखकर राजकुमार भाटी पर निशाना साधा जा रहा है।
एक वायरल पोस्ट में आरोप लगाया गया कि उन्हें केवल अपने विधानसभा चुनाव की चिंता है और उन्होंने गुर्जर समाज से जुड़े आंदोलनों में पहले विरोध किया, बाद में उसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की।
सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा है कि गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर हुए आंदोलन के दौरान उन्होंने युवाओं को “जातिवादी” तक कहा था, जबकि बाद में उसी मुद्दे पर सक्रिय होते नजर आए। इन आरोपों ने पार्टी के भीतर विवाद को और भड़का दिया है।

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फेसबुक पर बढ़ता हुआ विवाद


“सम्मान समारोह बना विवाद की जड़, उठे चयन पर सवाल”
जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी द्वारा ग्रेटर नोएडा के एक भव्य बैंक्वेट हॉल में आयोजित इस सम्मान समारोह में कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। लेकिन यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रैली को सफल बनाने वाले कई सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि ऐसे लोगों को मंच पर सम्मानित किया गया जो पहले रैली का विरोध कर चुके थे। इस फैसले ने संगठन के भीतर नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया।

“बड़े चेहरे गायब, सवाल और गहरे”
इस कार्यक्रम में रैली के संयोजक और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी, साथ ही प्रवक्ता प्रदीप भाटी और नवीन भाटी की अनुपस्थिति ने भी कई सवाल खड़े कर दिए।
राजनीतिक जानकार इसे साधारण अनुपस्थिति नहीं, बल्कि संगठन के भीतर बढ़ती दूरी और असहमति का संकेत मान रहे हैं।

“AC हॉल और लजीज व्यंजन: समाजवाद पर उठे तंज”
कार्यक्रम की भव्यता भी विवाद का बड़ा कारण बनी। एसी हॉल में आयोजित इस समारोह में लजीज व्यंजनों की व्यवस्था को लेकर कई कार्यकर्ताओं ने तंज कसा।
कुछ नेताओं का कहना है कि “समाजवाद” का असली मतलब जमीन पर संघर्ष और आम जनता के बीच रहना है, न कि एयरकंडीशन हॉल में बैठकर राजनीति करना। इस बयानबाजी ने संगठन के भीतर वैचारिक बहस को भी जन्म दे दिया है।


“क्या सपा में बन रहे हैं दो शक्ति केंद्र?”
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह विवाद केवल एक कार्यक्रम की चूक है या फिर संगठन के भीतर दो अलग-अलग गुटों के उभरने का संकेत।
नेतृत्व स्तर पर समन्वय की कमी और आपसी खींचतान के चलते अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या जिला इकाई में समानांतर शक्ति केंद्र तैयार हो रहे हैं।

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फेसबुक पर बढ़ता हुआ विवाद

“आने वाले दिनों में बदल सकते हैं समीकरण”
फिलहाल यह विवाद थमने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। जिस तरह से सोशल मीडिया से लेकर संगठन के भीतर तक खुलकर बयानबाजी हो रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सपा की जिला राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
यह घटनाक्रम न सिर्फ स्थानीय राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि 2027 के चुनावी समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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