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Sharda Care News : एक साथ दो ट्यूमर, एक जटिल ऑपरेशन और एक नई ज़िंदगी, शारदा केयर हेल्थसिटी में दुर्लभ सर्जरी की अद्भुत सफलता, एक ही बार में निकाले गए दोनों ट्यूमर, थायरॉइड कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी, युवतियों पर अधिक असर


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
स्वास्थ्य जगत की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा केयर हेल्थसिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ ड्यूल ट्यूमर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने 37 वर्षीय महिला मरीज के शरीर से दो अलग-अलग स्थानों पर मौजूद ट्यूमर को एक ही सर्जिकल सत्र में, मिनिमली इनवेसिव तकनीक से सफलतापूर्वक निकाल दिया।


थायरॉइड और मीडियास्टाइनल: दो जगहों पर था खतरा

ग्रेटर नोएडा की निवासी प्रीति शर्मा के शरीर में दो बड़े और खतरनाक ट्यूमर थे —

  • एक 13 सेमी का थायरॉइड ट्यूमर, जो गर्दन में सूजन के रूप में प्रकट हो रहा था, और
  • दूसरा 5 सेमी का मीडियास्टाइनल ट्यूमर, जो छाती के अंदर फेफड़ों के बीच स्थित था।

ये दोनों ट्यूमर मरीज की सांस नली को दो तरफ से दबा रहे थे, जिससे उसकी ट्रेकिया S के आकार में मुड़ गई थी। मरीज को सांस लेने, खाना निगलने और लेटते समय गला बंद होने जैसी गंभीर दिक्कतें आने लगी थीं।


लक्षणों से बढ़ी चिंता, दूसरी जगह से शुरू हुआ था ऑपरेशन

मरीज के गले में सूजन, आवाज भारी होना, छाती में जकड़न और नींद में घुटन जैसे लक्षण धीरे-धीरे गंभीर होते गए। प्रारंभ में वह दूसरी जगह इलाज के लिए गई थी, जहां ऑपरेशन शुरू तो किया गया लेकिन जटिलता और रिस्क को देखकर अधूरा छोड़ना पड़ा।

इसके बाद सेकंड ओपिनियन के लिए प्रीति शर्मा ने शारदा केयर हेल्थसिटी का रुख किया — और यहीं से उनकी किस्मत बदली।


आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का कमाल: एक ही बार में निकाले गए दोनों ट्यूमर

शारदा केयर हेल्थसिटी में सीनियर सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हेमकांत वर्मा के नेतृत्व में एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम गठित की गई। टीम ने एक ही सर्जिकल सत्र में दोनों ट्यूमर को निकालने का निर्णय लिया।

इस सर्जरी के लिए इस्तेमाल की गई तकनीक थी वीडियो-असिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) — जो एक मिनिमली इनवेसिव और एडवांस्ड सर्जिकल प्रक्रिया है। इसके जरिए मरीज की छाती में सिर्फ तीन छोटे (1 सेमी) चीरे लगाकर मीडियास्टाइनल ट्यूमर को निकाला गया। थायरॉइड ट्यूमर को गले के एक छोटे चीरे से हटाया गया।


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शारदा केयर हेल्थसिटी में दुर्लभ सर्जरी की अद्भुत सफलता

सर्जरी के दौरान थी कई बड़ी चुनौतियां

डॉ. हेमकांत वर्मा ने बताया,

“दोनों ट्यूमर बेहद संवेदनशील क्षेत्रों में थे। मीडियास्टाइनल ट्यूमर दिल और उसकी प्रमुख नसों के पास था, वहीं थायरॉइड ट्यूमर वोकल कॉर्ड्स और सांस की नली के पास था। जरा सी गलती जानलेवा हो सकती थी।”

उन्होंने यह भी बताया कि ट्यूमर रीकरन्ट लेरिन्जियल नर्व्स और फ्रेनिक नर्व के बेहद करीब थे — जो आवाज और डायाफ्राम को कंट्रोल करती हैं। इस कारण यह ऑपरेशन बेहद उच्च तकनीकी कौशल की मांग करता था।


तीन घंटे चली जटिल सर्जरी, बिना किसी जटिलता के रही सफलता

पूरी सर्जरी लगभग तीन घंटे तक चली और डॉक्टरों की टीम ने दोनों ट्यूमर को सफलतापूर्वक और सावधानीपूर्वक निकाल दिया। मरीज की सर्जरी के बाद तेज़ रिकवरी देखी गई और कोई जटिलता सामने नहीं आई।
अब वह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं।


“10 साल के करियर में ऐसा केस नहीं देखा” – डॉ. वर्मा

डॉ. हेमकांत वर्मा ने कहा,

“अपने दस वर्षों के करियर में शायद ही कभी ऐसा दुर्लभ मामला देखा है, जहां दो ट्यूमर शरीर के दो अलग-अलग हिस्सों में हों और दोनों मिलकर एक ही जीवन रेखा — सांस की नली — को दबा रहे हों। साथ ही दोनों को एक बार में निकाला गया हो, वो भी बिना बड़ी सर्जरी के। यह हमारे पूरे मेडिकल स्टाफ के लिए गर्व का विषय है।”


अस्पताल प्रबंधन भी हुआ गौरवान्वित

श्री ऋषभ गुप्ता, वाइस प्रेसिडेंट, शारदा केयर हेल्थसिटी ने इस अवसर पर कहा,

“यह उपलब्धि सिर्फ मेडिकल विशेषज्ञता नहीं, बल्कि हमारी आधुनिक तकनीक, टीमवर्क और मरीजों के प्रति समर्पण का परिणाम है। हम इस तरह की हाई-रिस्क सर्जरी को भी विश्व स्तरीय सुविधाओं के साथ सम्भव बना रहे हैं। हमारा लक्ष्य ग्रेटर नोएडा को उत्तर भारत का मेडिकल हब बनाना है।”


थायरॉइड कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी, युवतियों पर अधिक असर

वर्ल्ड कैंसर ऑब्ज़र्वेटरी के अनुसार,

थायरॉइड कैंसर अब 25 से 45 वर्ष की महिलाओं में तीसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है।

यह खासतौर से उनके प्रजनन वर्षों के दौरान ज्यादा देखा जाता है। समय पर निदान, सर्जरी और एडवांस्ड तकनीक ही इसके प्रभाव को कम करने का एकमात्र उपाय है।


VATS तकनीक क्यों है ख़ास?

  • ✅ बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं
  • ✅ पसलियों को हटाना नहीं पड़ता
  • ✅ दर्द कम होता है
  • ✅ रिकवरी जल्दी होती है
  • ✅ अस्पताल में कम समय लगाना पड़ता है
  • ✅ न्यूनतम संक्रमण का खतरा

मरीज की तरफ से टीम को धन्यवाद

प्रीति शर्मा और उनके परिवार ने शारदा केयर हेल्थसिटी की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा,

“जहां एक अस्पताल ने सर्जरी अधूरी छोड़ दी, वहीं शारदा में हमें न सिर्फ नई उम्मीद मिली, बल्कि ज़िंदगी वापस मिल गई। हम हमेशा इस टीम के ऋणी रहेंगे।”


शारदा केयर हेल्थसिटी: ग्रेटर नोएडा में चिकित्सा का नया भरोसा

शारदा केयर हेल्थसिटी ग्रेटर नोएडा का एक प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है, जो लगातार कैंसर, न्यूरोसर्जरी, हृदय रोग, गाइनी और ऑर्थोपेडिक मामलों में अग्रणी तकनीक के साथ सफलता प्राप्त कर रहा है।


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