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Noida Authority News : जब सिविल अफसर बन गए शहर के प्लानर, नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग में कार्य-विभाजन पर मचा घमासान, ”जल विभाग के अनुभवी अफसर को टाउन प्लानिंग में तैनाती से उठे सवाल, कर्मचारियों ने कहा – ‘सही अधिकारी को सही जगह भेजो’

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग में कार्य-विभाजन को लेकर अब अंदरखाने बहस तेज हो गई है। विभाग के भीतर और बाहर दोनों जगह इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि आखिर टाउन प्लानिंग जैसे अत्यधिक तकनीकी और विशेष विशेषज्ञता वाले विभाग में सिविल व जल विभाग के अफसरों को क्यों तैनात किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में नियोजन विभाग में सिविल विंग के करीब छह अधिकारी काम कर रहे हैं, जबकि यह विभाग मूलतः शहरी नियोजन (Urban Planning) के पेशेवरों के लिए होता है।


नियोजन विभाग का महत्व — शहर के भविष्य की रीढ़
नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में नियोजन विभाग को विकास की रीढ़ माना जाता है। यह विभाग न केवल मास्टर प्लान तैयार करता है बल्कि सेक्टरों का ले-आउट, भूमि उपयोग, सड़क चौड़ाई, हरित क्षेत्र, आवासीय और औद्योगिक प्लानिंग जैसी बुनियादी नीतियां बनाता है। यही विभाग तय करता है कि शहर में कहां नया सेक्टर बनेगा, कहां स्कूल और अस्पताल होंगे और किन इलाकों में वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील और रणनीतिक फैसले उन्हीं लोगों द्वारा लिए जाने चाहिए, जिनके पास टाउन प्लानिंग, शहरी भूगोल और वास्तुशास्त्र का व्यावहारिक अनुभव हो।


सीनियर मैनेजर देवेंद्र निगम की तैनाती पर सबसे ज्यादा चर्चा
विभागीय चर्चाओं में सबसे ज्यादा नाम सीनियर मैनेजर देवेन्द्र निगम का लिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, निगम जल विभाग से जुड़े अनुभवी अधिकारी हैं और उन्हें गंगा जल आपूर्ति, सीवर लाइन, ड्रेनेज सिस्टम और पानी वितरण की गहरी समझ है।
प्राधिकरण के कुछ कर्मचारियों और स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि देवेंद्र निगम जैसे अफसर का अनुभव जल विभाग में अधिक उपयोगी साबित हो सकता है, खासकर तब जबकि शहर में जल गुणवत्ता और सप्लाई से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। नोएडा में पिछले कुछ महीनों से जल संकट एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। कई सेक्टरों में जल आपूर्ति की असमानता और पाइपलाइन लीकेज जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। ऐसे में जल विभाग को अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है, न कि ऐसे अफसरों को नियोजन में बिठा देना, जिनकी विशेषज्ञता पानी की आपूर्ति और संसाधन प्रबंधन में है।

सही अधिकारी को सही जगह” – कर्मचारियों की आवाज
प्राधिकरण के भीतर कर्मचारियों और तकनीकी जानकारों का कहना है कि यदि प्रत्येक विभाग में अधिकारियों की तैनाती उनकी विशेषज्ञता के आधार पर की जाए, तो न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि योजनाओं की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“नियोजन विभाग में टाउन प्लानर हों, सिविल विभाग में सिविल इंजीनियर हों और जल विभाग में वाटर एक्सपर्ट्स — यही सही व्यवस्था है। इससे विभागीय समन्वय भी मजबूत होता है और जवाबदेही भी तय रहती है।”


सिविल विभाग पर भी असर
विशेषज्ञों का कहना है कि सिविल विभाग में भी काबिल अफसरों की कमी महसूस की जा रही है। रोज़ाना अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों पर सीईओ स्तर से कड़ी कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सिविल विभाग में अनुभवी और फील्ड-केंद्रित अधिकारियों की मौजूदगी ज़रूरी है। अगर यही अधिकारी नियोजन या अन्य विभागों में भेज दिए जाएं तो अतिक्रमण और निर्माण की निगरानी कमजोर हो जाती है।
नियोजन विभाग के चार मुख्य पदाधिकारी
वर्तमान में नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग में चार प्रमुख पदाधिकारी कार्यरत हैं —
महाप्रबंधक मीना भार्गव
वरिष्ठ प्रबंधक (सीनियर मैनेजर) देवेन्द्र निगम
प्रबंधक (मैनेजर)
लेवल-1 अधिकारी
हालांकि, विभाग में सिविल विंग के अफसरों की संख्या इनसे अधिक बताई जा रही है, जिससे वास्तविक “टाउन प्लानिंग” विशेषज्ञों की भूमिका सीमित होती जा रही है।

विकास और विशेषज्ञता का संतुलन जरूरी
शहर का समुचित विकास तभी संभव है जब विभागीय कामकाज में तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभव दोनों का समावेश हो। नियोजन विभाग की भूमिका केवल कागज़ी प्लानिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह विभाग भविष्य के शहर की रूपरेखा तैयार करता है। ऐसे में प्लानिंग का हर निर्णय आने वाले दशकों पर असर डालता है।
यदि गैर-नियोजन पृष्ठभूमि के अधिकारी अधिक संख्या में इस विभाग में काम करेंगे तो निर्णय प्रक्रिया प्रभावित होगी — न तो प्लानिंग की बारीकियां समझ में आएंगी और न ही योजनाएं व्यवहारिक रूप से लागू होंगी।


पुनर्व्यवस्था की मांग तेज
प्राधिकरण के भीतर अब यह आवाज़ बुलंद हो रही है कि कार्य-कुशलता बढ़ाने के लिए विभागों की पुनर्व्यवस्था की जाए। सुझाव दिया जा रहा है कि —
नियोजन विभाग में टाउन प्लानर्स और शहरी विकास विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाए।
सिविल पृष्ठभूमि के अधिकारियों को निर्माण और अवसंरचना विभाग में तैनात किया जाए।
जल आपूर्ति और संसाधन प्रबंधन का दायित्व जल विभाग के अनुभवी अफसरों को सौंपा जाए।
इससे योजनाओं का क्रियान्वयन न केवल तेज़ होगा बल्कि शहर के सतत विकास (Sustainable Development) को भी मजबूती मिलेगी।


विशेषज्ञता के अनुरूप जिम्मेदारी ही विकास की कुंजी
नोएडा जैसे नियोजित शहर में विभागीय कुशलता और विशेषज्ञता का सही तालमेल बेहद अहम है। गलत विभाग में तैनाती न सिर्फ योजनाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करती है बल्कि संसाधनों की बर्बादी भी बढ़ाती है।
इसलिए अब ज़रूरत इस बात की है कि प्राधिकरण “सही अधिकारी को सही जगह” के सिद्धांत को नीति के रूप में लागू करे।
क्योंकि जिस दिन यह व्यवस्था स्थापित हो जाएगी, उसी दिन नोएडा एक बार फिर अपने “स्मार्ट और सुनियोजित शहर” वाले सपने की ओर तेजी से बढ़ सकेगा।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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