ITS College News : “कोडिंग के दबाव में टूटते युवाओं को मिला ‘मेंटल हेल्थ का सिस्टम अपडेट’!, आईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज में ‘Debug Your Mind’ सत्र बना छात्रों के लिए इमोशनल रीबूट”, तनाव प्रबंधन से लेकर आत्म-जागरूकता तक हुई खुली चर्चा
तनाव, करियर प्रेशर और डिजिटल लाइफ के बीच मानसिक संतुलन का बड़ा संदेश, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अंजु सिंह ने छात्रों को सिखाया—‘दिमाग भी चाहता है रेगुलर सर्विसिंग’

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी, बढ़ती प्रतियोगिता, करियर का दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और लगातार बेहतर प्रदर्शन की होड़… आज का युवा बाहर से जितना स्मार्ट और आत्मविश्वासी दिखाई देता है, अंदर से उतना ही तनाव, चिंता और मानसिक दबाव से जूझ रहा है। इंजीनियरिंग और प्रोफेशनल शिक्षा से जुड़े छात्रों के बीच बढ़ती मानसिक चुनौतियों को गंभीरता से समझते हुए ग्रेटर नोएडा स्थित आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक बेहद महत्वपूर्ण और जागरूकता से भरपूर पहल की। कॉलेज के भाभा हॉल में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर आधारित विशेष सत्र “Debug Your Mind” का आयोजन किया गया, जिसने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानसिक मजबूती, भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता का नया संदेश दिया।
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक सेमिनार नहीं रहा, बल्कि छात्रों के भीतर छिपे तनाव, डर, अकेलेपन और भावनात्मक संघर्षों को समझने और उन्हें सकारात्मक दिशा देने का एक प्रभावशाली प्रयास बन गया।
जब ‘मेंटल हेल्थ’ बनी सबसे जरूरी चर्चा का विषय
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अंजु सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों से बेहद सहज और संवादात्मक शैली में बातचीत करते हुए बताया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी का विषय नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता, सोचने की क्षमता और सफलता की नींव है।
उन्होंने कहा कि आज के युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अपने तनाव को पहचान नहीं पाते। लगातार असाइनमेंट, परीक्षा, प्लेसमेंट, भविष्य की चिंता और सोशल मीडिया तुलना की वजह से युवा मानसिक रूप से थकते जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि वे अपने दिमाग और भावनाओं को भी उतनी ही प्राथमिकता दें, जितनी अपने करियर और पढ़ाई को देते हैं।
“डिबग योर माइंड” नाम ने ही खींचा युवाओं का ध्यान
कार्यक्रम का शीर्षक “Debug Your Mind” विद्यार्थियों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना। इंजीनियरिंग छात्रों के लिए ‘डिबग’ शब्द किसी सॉफ्टवेयर की त्रुटि सुधारने की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। इसी अवधारणा को मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए सत्र में समझाया गया कि जैसे कंप्यूटर सिस्टम को समय-समय पर अपडेट और रिपेयर की जरूरत होती है, वैसे ही इंसानी दिमाग को भी आराम, सकारात्मक सोच और भावनात्मक देखभाल की आवश्यकता होती है।
डॉ. अंजु सिंह ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि यदि व्यक्ति समय रहते अपने मानसिक तनाव को नहीं समझता, तो यह आगे चलकर गंभीर चिंता, अवसाद और आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकता है।
तनाव प्रबंधन से लेकर आत्म-जागरूकता तक हुई खुली चर्चा
सत्र के दौरान विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई, जिनमें शामिल रहे—
तनाव प्रबंधन (Stress Management)
भावनात्मक संतुलन (Emotional Balance)
आत्म-जागरूकता (Self Awareness)
पढ़ाई और निजी जीवन में संतुलन
असफलता से निपटने की क्षमता
सोशल मीडिया और मानसिक स्वास्थ्य
आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके
छात्रों ने भी खुलकर सवाल पूछे और अपनी समस्याएं साझा कीं। कई विद्यार्थियों ने माना कि वे अक्सर भविष्य और करियर को लेकर मानसिक दबाव महसूस करते हैं, लेकिन ऐसे सत्र उन्हें खुद को बेहतर तरीके से समझने का अवसर देते हैं।
कॉलेज प्रशासन ने बताया—“मानसिक रूप से मजबूत छात्र ही बेहतर भविष्य बनाते हैं”
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के निदेशक डॉ. मयंक गर्ग ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में केवल तकनीकी शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों का मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत होना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा— “जब विद्यार्थी मानसिक रूप से स्वस्थ और आत्मविश्वासी होंगे, तभी वे शिक्षा, करियर और जीवन में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को भीतर से मजबूत बनाते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज हमेशा ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां विद्यार्थी केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी सुरक्षित और समर्थ महसूस करें।
संकाय और स्टाफ की बड़ी भागीदारी
इस विशेष सत्र में कॉलेज के संकाय सदस्य, स्टाफ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम पूरी तरह संवादात्मक रहा, जहां छात्रों को केवल सुनने ही नहीं बल्कि अपनी बात रखने का भी अवसर मिला।
सत्र के अंत में कई विद्यार्थियों ने कहा कि यह कार्यक्रम उनके लिए बेहद प्रेरणादायक रहा और उन्होंने पहली बार मानसिक स्वास्थ्य को इतने व्यावहारिक तरीके से समझा।
आज के युवाओं के लिए क्यों जरूरी हैं ऐसे आयोजन?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे तेजी से बढ़ रहे हैं। इंजीनियरिंग, मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्सेज के छात्र लगातार प्रदर्शन के दबाव में रहते हैं। ऐसे में यदि संस्थान समय-समय पर इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें, तो विद्यार्थियों में तनाव कम करने और सकारात्मक मानसिकता विकसित करने में मदद मिल सकती है।
आई.टी.एस इंजीनियरिंग कॉलेज की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



